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इंदौर के लिए गर्व का क्षण: डॉ. ए. के. द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में सम्मानित
विश्व होम्योपैथी दिवस पर विशेष
विश्व होम्योपैथी दिवस के पावन अवसर पर नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एवं होम्योपैथी (NEIAH), शिलांग में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में इंदौर के सुप्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए. के. द्विवेदी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
डॉ. द्विवेदी ने वर्षों की अथक मेहनत, शोध और समर्पण से होम्योपैथी चिकित्सा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। वर्ष 2014 में आयुष मंत्रालय के गठन के बाद उन्होंने होम्योपैथी चिकित्सा, शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण योगदान दिए। वर्ष 2015 से वे केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार मंडल के सक्रिय सदस्य के रूप में अपनी विशेषज्ञता प्रदान कर रहे हैं।
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और योगदान को देखते हुए आयुष मंत्रालय ने जनवरी 2025 में उन्हें नॉर्थ ईस्ट के इस प्रतिष्ठित संस्थान में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। अब वे वहां होम्योपैथी चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के साथ-साथ विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय ज्ञान एवं क्लिनिकल दक्षता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
डॉ. द्विवेदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अप्लास्टिक एनीमिया, हेमेटोहाइड्रोसिस तथा कैंसर के बाद होने वाली पैनसाइटोपेनिया जैसी जटिल बीमारियों के होम्योपैथिक उपचार के लिए विशेष पहचान रखते हैं। उनके उपचार और शोध कार्यों ने अनेक मरीजों को नई जीवन आशा दी है।
वे सदैव यह संदेश देते हैं कि होम्योपैथी केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि प्रभावी और दीर्घकालिक समाधान देने वाली चिकित्सा पद्धति है। बार-बार होने वाली बीमारियों से मुक्ति दिलाने में यह अत्यंत उपयोगी है। साथ ही वे यह भ्रांति भी दूर करते हैं कि होम्योपैथी धीमी होती है या इसमें अत्यधिक परहेज की आवश्यकता होती है। उनका स्पष्ट मत है कि एडवांस्ड होम्योपैथी उपचार हर उम्र के रोगियों, यहां तक कि डायबिटीज जैसे रोगों में भी सुरक्षित और प्रभावी रूप से दिया जा सकता है।
डॉ. ए. के. द्विवेदी की यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह पूरे देश में होम्योपैथी के बढ़ते प्रभाव और स्वीकार्यता का प्रतीक भी है। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर उनका यह सम्मान देशभर के चिकित्सकों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
“हर घर में होम्योपैथी – हर उम्र में होम्योपैथी” का संदेश आज और भी अधिक सशक्त होकर उभर रहा है।


