- Sidharth Malhotra and Tamannaah Take on the Unknown as The Vvaan Trailer Unveils a Spectacle Like Never Before
- डायरेक्टर श्रीजा बरुआ नलावड़े की ‘द मशरूम्स’ लेकर आया 80’s रेट्रो बॉलीवुड का जादू, ‘कैसी है ये शाम आज की’ के साथ
- Rohit Sharma opens up about the family support that shaped his cricketing journey on Family Full House
- आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस वित्त वर्ष 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में 100% दावा निपटान अनुपात के साथ नेतृत्व की स्थिति में
- Ajay Devgn Praises Abhishek Pathak’s Directorial Vision to Bring the World of Drishyam to a Believable Conclusion: “Abhishek Has Cracked It Brilliantly”
देवी अहिल्या विश्व विद्यालय के स्थापना दिवस पर ज्ञान, सेवा और वैश्विक उत्कृष्टता का संकल्प
इंदौर। देवी अहिल्या विश्व विद्यालय, इंदौर में स्थापना दिवस के अवसर पर विविध गरिमामय कार्यक्रमों का आयोजन उत्साह, गरिमा और सकारात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। नालंदा परिसर में प्रातः 10:30 बजे आयोजित मुख्य समारोह में विश्वविद्यालय परिवार ने शिक्षा, सेवा और उत्कृष्टता के नए संकल्पों के साथ भविष्य की दिशा तय की।
कार्यक्रम का शुभारंभ नालंदा एवं तक्षशिला परिसरों में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ औपचारिक कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।
कुलगुरु राकेश सिंघई ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय ने इंदौर, मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान स्थापित किया है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार एवं अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित बनाने के लिए सभी के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने पूर्व कुलपतियों, कुलसचिवों और कार्यपरिषद सदस्यों के योगदान की सराहना की।
कुलसचिव प्रज्वल खरे ने स्थापना दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए विश्वविद्यालय की प्रशासनिक उपलब्धियों और सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहयोग और समर्पण से विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

कार्यपरिषद सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने अपने प्रेरक संदेश में कहा कि यह विश्वविद्यालय “ज्ञान का पवित्र केंद्र” है, जहाँ सपनों को साकार कर उज्ज्वल भविष्य गढ़ा जाता है। उन्होंने शिक्षा में अनुशासन, सेवा और नवाचार के महत्व को रेखांकित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि लोकमाता देवी अहिल्या जी का आशीर्वाद इस संस्थान पर सदैव बना रहेगा। उन्होंने परिसर में भीषण गर्मी के बीच खिले फूलों को सकारात्मकता और सतत विकास का प्रतीक बताते हुए कुलगुरु एवं कुलसचिव के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रोफेसर, विभागाध्यक्ष, डायरेक्टर, उपकुलसचिव, सहायक कुलसचिव एवं कर्मचारी संघ के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं, जिसमें विद्यार्थियों द्वारा गीत एवं ग़ज़लों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। प्रख्यात संगीत प्रशिक्षक श्री राजेंद्र नांगले की प्रस्तुति ने भी सभी को मंत्रमुग्ध किया।
अंत में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। विश्वविद्यालय परिवार ने अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उत्कृष्टता, संस्कार और वैश्विक पहचान की दिशा में निरंतर अग्रसर रहने का संकल्प लिया।
यह स्थापना दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रगति, समर्पण और विश्वस्तरीय पहचान की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त प्रतीक बना।


