मध्य प्रदेश में चार साल में 1,054 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी, इंदौर में ‘सेफ क्लिक 2.0’ अभियान के जरिए लोगों को सिखाए जा रहे डिजिटल सुरक्षा के गुर

इसी दिशा में एयरटेल ने हाल ही में ओटीपी फ्रॉड अलर्ट फीचर शुरू किया है

इंदौर। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और डिजिटल पेमेंट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने भी ठगी के नए-नए तरीके अपना लिए हैं। फर्जी कॉल, स्पैम मैसेज, ओटीपी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक, फर्जी निवेश योजनाएं और सोशल मीडिया हैकिंग जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर भी इस खतरे से अछूती नहीं है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार मई 2021 से जुलाई 2025 के बीच मध्य प्रदेश के नागरिक साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में 1,054 करोड़ रुपये से अधिक गंवा चुके हैं। अकेले वर्ष 2025 में प्रदेश में 55 हजार से ज्यादा साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें करीब 581 करोड़ रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई। इनमें बड़ी संख्या ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई और ओटीपी फ्रॉड से जुड़ी रही।

इंदौर में बढ़ रही शिकायतें

इंदौर में लगभग हर दिन साइबर हेल्पलाइन और पुलिस के पास ऑनलाइन ठगी, बैंकिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी निवेश और कस्टमर केयर स्कैम जैसी शिकायतें पहुंच रही हैं। साइबर अपराधी फोन कॉल, व्हाट्सएप, एसएमएस, ईमेल और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं।

सड़क पर उतरकर जागरूक कर रही इंदौर पुलिस

बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए इंदौर पुलिस ने जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। मध्य प्रदेश पुलिस के “सेफ क्लिक 2.0” अभियान के तहत पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह के निर्देशन में शहरभर में लगातार साइबर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

इसी अभियान के तहत पलासिया चौराहे पर एसीपी संयोगितागंज तुषार सिंह, थाना प्रभारी पलासिया एवं पुलिस टीम ने वाहन चालकों को यातायात नियमों के पालन के साथ-साथ साइबर सुरक्षा के बारे में भी जागरूक किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि जिस तरह सड़क पर सुरक्षा के लिए हेलमेट और सीट बेल्ट जरूरी हैं, उसी तरह डिजिटल दुनिया में सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है।

लोगों को बताया गया कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी, बैंकिंग पिन या निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन, cybercrime.gov.in तथा इंदौर पुलिस की साइबर हेल्पलाइन 70491-24445 पर शिकायत दर्ज कराएं।

ओटीपी फ्रॉड सबसे बड़ा हथियार

साइबर अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, बीमा एजेंट, कस्टमर केयर प्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी बताकर लोगों का भरोसा जीतते हैं। वे केवाईसी अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने का झांसा देकर ओटीपी हासिल करते हैं और कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से रकम साफ कर देते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार वरिष्ठ नागरिक, छात्र और पहली बार डिजिटल बैंकिंग का उपयोग करने वाले लोग सबसे आसान निशाना बन रहे हैं।

तकनीक भी कर रही मदद

बढ़ते साइबर अपराधों के बीच सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), दूरसंचार विभाग और टेलीकॉम कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रही हैं। दूरसंचार विभाग का ‘संचार साथी’ पोर्टल संदिग्ध कॉल और संदेशों की शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है।

इसी दिशा में एयरटेल ने हाल ही में ओटीपी फ्रॉड अलर्ट फीचर शुरू किया है। यह फीचर संदिग्ध कॉल के दौरान प्राप्त होने वाले बैंकिंग ओटीपी पर ग्राहकों को रियल-टाइम चेतावनी देता है। कंपनी एआई आधारित स्पैम डिटेक्शन और संदिग्ध वेबसाइटों को ब्लॉक करने जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रही है।

HDFC बैंक ने ‘विजिल आंटी’ (Vigil Aunty) अभियान शुरू किया है, जो लोगों को डिजिटल अरेस्ट, OTP फ्रॉड, सिम स्वैपिंग और फर्जी कॉल जैसी ठगी से बचने के तरीके बताता है।

वहीं, Paytm ने दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग से Financial Fraud Risk Indicator फीचर शुरू किया है। यदि कोई व्यक्ति फोन कॉल पर बात करते हुए Paytm के जरिए भुगतान करने की कोशिश करता है, तो ऐप उसे संभावित धोखाधड़ी का अलर्ट देता है।

पुलिस का संदेश

“सोचें… समझें… फिर क्लिक करें।”

इंदौर पुलिस का कहना है कि डिजिटल दुनिया में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकती है। सरकार, बैंक और टेलीकॉम कंपनियां अपनी सुरक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत कर रही हैं, लेकिन सबसे प्रभावी सुरक्षा आम नागरिक की जागरूकता और सतर्कता ही है।

साइबर सुरक्षा के 6 जरूरी नियम

  • किसी के साथ OTP, PIN या Password साझा न करें।
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • बैंक या कस्टमर केयर का नंबर हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही लें।
  • सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें।
  • साइबर ठगी होते ही तुरंत 1930 पर कॉल करें।

डिजिटल लेनदेन के दौरान जल्दबाजी या दबाव में कोई फैसला न लें।

“सतर्क रहें, सुरक्षित रहें… SAFE CLICK अपनाएं और साइबर अपराध से स्वयं को तथा अपने परिवार को सुरक्षित रखें।”

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