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इंदौर में राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च, 400+ लोगों की भागीदारी से तीसरे दिन हुआ समापन
एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस का समापन राष्ट्रीय मार्च के साथ, कानूनी सुधार की उठी आवाज़
इंदौर, 11 जनवरी 2026: इंदौर में तीन दिनों तक चले एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026 का समापन रविवार को आयोजित राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च, इंदौर 2026 के साथ हुआ। इस मार्च में देशभर के पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों, वीगन कम्युनिटी, युवाओं और आम नागरिकों सहित 400 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
मार्च पालासिया से विजय नगर तक निकाला गया। प्रतिभागियों ने पोस्टर, बैनर और जागरूकता संदेशों के माध्यम से पशुओं पर हो रही क्रूरता, कानूनी कमियों और संवेदनशील मुद्दों को सामने रखा। इस दौरान प्रतिभागियों ने “एनिमल्स आर नॉट ऑब्जेक्ट्स”, “जस्टिस फॉर एनिमल्स”, “स्टॉप क्रुएल्टी”, “एनिमल्स नीड राइट्स टू” जैसे संदेशों के साथ शांतिपूर्ण और संवेदनशील तरीके से जागरूकता बढ़ाई।
इस वर्ष का मार्च एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से उपेक्षित विषय पर केंद्रित रहा — जानवरों के साथ होने वाले यौन शोषण को कानून की श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग। पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 के अंतर्गत यह अपराध स्पष्ट रूप से दंडनीय था, लेकिन भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद इस विषय पर कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं बचा है। इसी वजह से इस वर्ष की थीम का केंद्र बिंदु रहा कि जानवरों को भी यौन हिंसा से सुरक्षा का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए।
मार्च के बाद समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि पशु अधिकारों से जुड़े मुद्दे अभी भी भारत में चर्चा से ज़्यादा मैदान में काम की मांग करते हैं। प्रतिभागियों ने यह भी माना कि मौजूदा कानूनी संरचना, प्रशासनिक उदासीनता और सामाजिक जागरूकता की कमी, तीन ऐसे बड़े कारण हैं जिनसे पशु अधिकार आंदोलन को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
इंदौर एनिमल लिबरेशन की को-फाउंडर दुर्गा बलानी ने कहा कि यह सम्मेलन सिर्फ संवाद का मंच नहीं, बल्कि एक सक्रिय नेटवर्क बनाने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि “जब अलग-अलग शहरों से लोग, संगठन और एक्टिविस्ट एक साथ आते हैं, तब आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहता, बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रभाव पैदा करता है।”
तीन दिनों तक चले इस सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित हुए, जिनमें पशुओं पर अत्याचार की जांच और दस्तावेज़ीकरण, कानूनी प्रक्रिया, वकालत, वीगन जीवनशैली, ग्रासरूट एक्टिविज़्म, जनजागरूकता रणनीति, और समुदाय निर्माण जैसे विषय शामिल थे। सम्मेलन में अनेक शहरों से आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और अपने-अपने शहरों में संगठित रूप से कार्य करने की दिशा तय की।
सम्मेलन के आयोजकों ने घोषणा की कि आने वाले महीनों में पशु अधिकारों से जुड़े प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और कानूनी सहायता तंत्र को और मज़बूत बनाया जाएगा, ताकि पशु अधिकार आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर एक संगठित गति मिल सके।


