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एप्लास्टिक एनिमिया कैंसर से भी भयावह बीमारी है: डॉ. ए. के. द्विवेदी
एक दिवसीय नि:शुल्क एप्लास्टिक एनिमिया अवेयरनेस सेमिनार संपन्न
इंदौर। एप्लास्टिक एनिमिया एक ऐसा रोग है जो जन्म के बाद होता है और यही वजह है कि यदि समय पर ध्यान दिया जाए और सही तरह से उपचार करा लिया जाए तो इसे होने से भी रोका जा सकता है और इसके होने पर उपचार भी सही ढंग से किया जा सकता है। एप्लास्टिक एनिमिया कैंसर से भी भयावह बीमारी है क्योंकि इसमें रोगी को बार-बार रक्तादान की आवश्यकता होती है। बार-बार रक्तादान कराना भी जटिल है और यदि बोनमैरो ट्रांस्प्लांट के जरिए इसे ठीक किया जाता है तो वह बहुत महंगा उपचार साबित होता है, जो कि हर किसी के लिए संभव नहीं है। इसलिए वक्त रहते सही जांच और सही उपचार से इस समस्या से बचा जा सकता है।
यह बात प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. ए. के. द्विवेदी ने आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा 3 मार्च 2020 को एक दिवसीय नि:शुल्क एप्लास्टिक एनिमिया अवेयरनेस सेमिनार में कही। इस सेमिनार का उद्घाटन कलेक्टर श्री लोकेश जाटव ने दीप प्रज्वलित करके किया। कार्यक्रम का संचालन कोमल द्विवेदी एवं अनुपम श्रीवास्तव ने किया, अतिथि स्वागत श्रीमती सरोज द्विवेदी ने किया, आभार डा भूपेन्द्र गौतम जी ने किया l सेमिनार में शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर्स डॉ ए.के. द्विवेदी, डॉ. संगीता पानेरी और डॉ. रिषभ जैन ने एनिमिया के बारे में जागरुक किया। इन्होंने एनिमिया के कारण, बचाव और उपचार की जानकारियाँ दी।
बर्फानीधाम के सामने स्थित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया में मेडिकल और हेल्थ मैग्जीन सेहत एवं सूरत और एडवांस्ड होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेसर सोसायटी के सहयोग से आयोजित हुए इस सेमिनार में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि आमतौर पर एनिमिया को लोग छोटी बीमारी समझते हुए इसे गंभीरता से नहीं लेते। इसके लिए जागरुकता फैलाने वाले सेमिनार भी आयोजित नहीं किए जाते।
यह एक ऐसी बीमारी है, जो कई अन्य बीमारीयों को जन्म देती है। एप्लास्टिक एनिमिया किसी एक तय कारण से नहीं होता। दांतो या मसूड़ों से लगातार खून निकलना, लंबे समय तक मासिक धर्म की समस्या से ग्रस्त रहना और पाइल्स की वजह से मल में खून आना, इनमें से किसी भी कारण से व्यक्ति को एप्लास्टिक एनिमिया हो सकता है। कई लोग बुखार, जोड़ों में दर्द या स्कीन की समस्या की दवाई खुद ही लंबे समय तक लेते रहते हैं ऐसे में उन्हें भी एप्लास्टिक एनिमिया होने की आशंका अधिक रहती है।
डॉक्टर की सलाह बगैर लंबे समय तक किसी भी दवाई को लेना एनिमिया को आमंत्रित करता है। इसके अलावा किमौथैरेपी के कारण भी एनिमिया होने का खतरा भी रहता है। हम ऐसी गंभीर बीमारी के बारे में लोगों को जागरुक करना चाहते हैं। यदि लोग शरीर में हिमोग्लोबीन की मात्रा बनाएं रखें और नियमित हिमोग्लोबीन की जांच करवाते रहें तो एनिमिया सहित कई बीमारियों से बचा जा सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि आज का युवा फैशन और तनाव या परेशानी कम करने के लिए ड्रग्स, शराब या धूम्रपान करता है जबकि इससे उसकी परेशानी कम नहीं होती बल्कि और भी बढ़ जाती है। इससे उन्हें ऊर्जा तो नहीं मिलती बल्कि एनिमिया होने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए युवाओं को इससे दूर रहना चाहिए।
एम.जी.एम मेडिकल कॉलेज की बायोकैमेस्ट्री डिपार्टमेंट की प्रोफेसर डॉ. संगीता पानेरी ने कहा कि एनिमिया से बचने के लिए हमें उचित खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। भोजन में प्रोटीन, विटामिन, आयरन की भरपूर मात्रा होना चाहिए। गुड़, अनार आदि से आयरन की पूर्ति होती है तो मूंगफली, दालें, बादाम, मछली से प्रोटीन मिलता है।
आयरन और प्रोटीन के साथ विटामिन सी का लेना भी जरूरी है जो कि आंवला और नींबू से मिलता है। अक्सर लोग सेहतमंद खाना खाने के तुरंत बाद चाय या कॉफी पीते हैं इससे भोजन में लिए गए सारे पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। यदि हमारे शरीर में हिमोग्लोबीन 4 ग्राम से कम है तो वह सीवियर एनिमिया है।
श्री लोकेश जाटव ने कहा कि जब हम शरीर और मन से स्वस्थ होते हैं तो कई बार यह अहसास नहीं कर पाते की हम पर यह ईश्वर का आशीष है। जो व्यक्त किन्हीं कारणों से स्वस्थ नहीं होते हम उन्हें समझ नहीं पाते और उनके प्रति हमारा स्वभाव रूखा होता है। मैं इस आयोजन में इसलिए आया हूं क्योंकि डॉ. द्विवेदी ने जिस अच्छे प्रयास की शुरुआत की है उसमें सहभागी बनूं। इस आयोजन से युवा यह संदेश लेकर जाएंगे कि जब वे सक्षम बनें तो असहाय लोगों की कैसे सहायता करें। इस अभियान को जन अभियान बनाने के लिए प्रशासनिक तौर पर जो भी सहयोग की आवश्यकता होगी हम वह प्रदान करेंगे। हम कोशिश करें कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकें।
समाज के हित में होगी यह सोसायटी सेमिनार में एक सोसायटी बनाने की घोषणा भी की गई। “एप्लास्टिक एनिमिया अवेयरनेस सोसायटी” नाम से बनने वाली इस संस्था का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो इस रोग का उपचार नहीं करा पाते। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि उनके पास आने वाले कई मरीज ऐसे होते हैं जिनके पास उपचार तो दूर भोजन करने या यात्रा का खर्च वहन करने तक की पर्याप्त राशि नहीं होती।
ऐसे मरीजों को हम न केवल नि:शुल्क उपचार बल्कि रहने, भोजन और यात्रा का खर्च देने की सुविधा भी देते हैं। इन्हें देख हमें महसूस हुआ कि इनकी मदद के लिए सोसायटी बनाई जा सके। इसके लिए हम डोनेशन के जरिए फंड एकत्रित करेंगे जिसमें 100 रूपए से लेकर उसकी इच्छानुसार आर्थिक सहायता दे सकता है। इस सोसायटी और आय-व्यय की जानकारी ऑनलाइन रहेगी जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति यह जान सकेगा कि राशि का किस तरह इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा एप्लास्टिक एनिमिया के कारण, बचाव और निदान की जागरूकता वाला फोल्डर का लोकार्पण भी किया गया।


