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जितने अवतार भारत भूमि पर हुए, उतने कहीं नहीं: जगदीश पुरी
इंदौर. भारत अवतारों की भूमि हैं. जितने अवतार इस पुण्यधरा पर हुए हैं, उतने दुनिया में किसी अन्य देष में नहीं हुए. मानव से माधव, नर से नारायण और आदमी से इंसान बनने का पुरूषार्थ ही हमें अपनी मंजिल की ओर ले जाएगा. यदि अब भी हमने अपने लोभ, मोह और काम-क्रोध जैसे विकारों को नियंत्रित नही किया तो प्रकृति और परमात्मा हमें माफ नहीं करेंगें। आने वाली पीढी भी इसके दुष्परिणाम भुगतने पर बाध्य होगी.
शक्करगढ़, भीलवाड़ा स्थित अमरज्ञान निरंजनी आश्रम के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी जगदीशपुरी महाराज ने मनोरमागंज स्थित गीता भवन पर चातुर्मास अनुष्ठान के अंतर्गत भागवत कथासार एवं प्रवचन के दौरान उक्त दिव्य विचार व्यक्त किये.
गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपालदास मित्तल, मंत्री राम ऐरन एवं सत्संग समिति के संयोजक रामविलास राठी, जेपी फडिय़ा आदि ने प्रारंभ में महामंडलेश्वरजी का स्वागत किया। इसके पूर्व सुबह महामंडलेश्वरजी के सान्निध्य में विष्णु सहस्त्रनाम से आराधना में भी सैकड़ों भक्त शामिल हुए.
गीता भवन में स्वामी जगदीशपुरी महाराज के सान्निध्य में प्रतिदिन प्रात: 8.30 से 9 बजे तक विष्णु सहस्त्रनाम से आराधना, 9 से 10.30 एवं सांय 5 से 6.30 बजे तक भागवत कथासार एवं प्रवचनों की अमृत वर्षा जारी रहेगी.
प्रकृति का परोपकार हम कैसे चुका रहे हैं
महामंडलेश्वरजी ने कहा कि चिंतन करें कि जो प्रकृति हमें शुद्ध हवा, पानी, और पर्यावरण देती है, जिसकी बदौलत हम जीवित और स्वस्थ है, उस परोपकार का बदला हम किस शक्ल में चुका रहें है. सूर्य, चन्द्रमा, आकाष, पृथ्वी और अग्नि के माध्यम से परमात्मा ने हमें जो उपहार दिये हैं, उनसे खिलवाड़ करने की प्रवृत्ति बढ रही है. यदि समय रहते हमने प्रकृति का संरक्षण नहीं किया तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। भागवत जैसे धर्मग्रंथ बहुत पहले ही हमें सजग और सतर्क करने के संदेश देते आ रहे हैं.


