- 4 Standout Moments of Birthday Girl Karisma Kapoor on India’s Best Dancer Season 5
- Dinesh Vijan and Maddock Films unveil the Teaser of PRAHAAR – The Ujjwal Nikam Story; Rajkummar Rao delivers a Striking First Impression
- दिनेश विजान और मैडॉक फिल्म्स लेकर आए प्रहार – द उज्ज्वल निकम स्टोरी का टीज़र; राजकुमार राव का पहला इम्प्रेशन ही सीधा दिल-दिमाग हिला देने वाला!
- IIT Kharagpur Study Finds Scientific Speed Management Can Significantly Reduce Fatal Crash Risk on Indian Highways
- हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता, मस्तिष्क के संकेतों को समझना है जरूरी -डॉ. रजनीश कछारा
एट्रोसिटी एक्ट को लेकर मुख्यमंत्री का बयान आम लोगों को गुमराह करने वाला
सपाक्स समाज की जिला इकाई द्वारा आयोजित बैठक में वक्ताओं ने जताया गहरा आक्रोश
इंदौर। सपाक्स समाज की इंदौर जिला इकाई ने राज्य के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के एट्रोसिटी एक्ट के संदर्भ में दिए गए बयान को आम नागरिकों को गुमराह करने वाला, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय करार दिया है। सपाक्स ने कहा है कि मुख्यमंत्री संसद एवं सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्था को चुनौती देकर चुनावी हथकंडे के रूप में इस तरह के बयान दे रहे हैं जो एक संवैधानिक शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति के लिए उचित नहीं है।
सपाक्स समाज इंदौर इकाई के अध्यक्ष जगदीश जोशी ने बताया कि होटल साऊथ एवेन्यू में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री के इस बयान की कड़ी भर्त्सना की गई जिसमें उन्होंने एट्रोसिटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तार नहीं किए जाने की बात कही है। मुख्यमंत्री संसद और सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर नहीं हो सकते। क्या यह संभव है कि राज्य की पुलिस और अन्य एजेंसियां उनके इस बयान के अनुरूप कार्यवाही करेगी, जबकि एक्ट में ही बिना जांच के गिरफ्तारी का प्रावधान है।
बैठक में वक्ताओं ने मुख्यमंत्री के बयान पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से इस काले कानून को तत्काल खत्म करने के लिए तुरंत अध्यादेश लाकर देश की 78 प्रतिशत जनता में व्याप्त भय को दूर करने की मांग भी की। बैठक में सपाक्स के जिला अध्यक्ष जगदीश जोशी अभिभाषक, परशुराम सेना के अनूप शुक्ला, करणी सेना के ऋषिराज सिंह सिसौदिया, क्षत्रिय समाज के धर्मेन्द्र गौतम, सपाक्स के सतीश शर्मा, अभय अग्रवाल, मुकेश द्विवेदी सहित अनेक प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित थे। निवृत्तमान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती सुमित्रा दुबे भी बैठक में उपस्थित थीं और उन्होंने भी इस काले कानून को वापस लेने की पुरजोर मांग की।


