- Vikram Solar Brings Together Indore’s Renewable Energy Players at 'PowerConnect 2026'
- विक्रम सोलर का ‘पावरकनेक्ट 2026’ में इंदौर के रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाया
- आकाशवाणी के ‘हेलो डॉक्टर’ में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने श्रोताओं के सवालों का वैज्ञानिक तरीके से दिया समाधान
- Movies & Shows that bring the reality of hospital corridors to life
- Sidharth Malhotra On Finding Truth In The Supernatural World Of Vvaan
14 मई से शुरु होगा कोरोना महामारी का पतन, अंत 13 सितम्बर को गुरु के मार्गी होने के बाद ही हो सकेगा
वैश्विक महामारी कोरोना- एक ज्योतिषीय विश्लेषण
अतिचारी गुरु व वक्री शनि ने मचाया हाहाकार, शनि, केतु ने बढ़ाया भय, 4 मई से कुछ राहत मिल सकती है, 14 मई से इस वैश्विक महामारी के पतन की होगी शुरुआत, 13 सितम्बर को गुरु के मार्गी होने के बाद होगा महामारी कोरोना का अंत। – विश्लेषक आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक, शोध निदेशक भारद्वाज ज्योतिष व आध्यात्मिक शोध संस्थान

ग्रहा धीनम् जगत् सर्वम्… ग्रहों की माया निराली है, सारा संसार ग्रहों (देवता) के अधीन है, आज कोरोना वायरस गुप्त शत्रु की भांति वैश्विक रूप से संसार मे दस्तक दे रहा है। इसके होने, फैलने आदि के कारण आज भी अज्ञात है। ऐसी कौनसी ग्रह स्थिति बनी जिससे पूरी दुनिया इसकी चपेट में है। कब तक रहेगी ग्रहों की मार देखते है ज्योतिष के झरोखें से।
आचार्य पण्डित रामचन्द्र शर्मा वैदिक,शोध निदेशक, भारद्वाज ज्योतिष व आध्यात्मिक शोध संस्थान ने बताया कि संहिता ग्रन्थों में देश-विदेश के भविष्य को नव-वर्ष प्रवेश कुंडली के जरिये टटोला जाता है। हमारा भारतीय नववर्ष गुड़ीपड़वा से तो पाश्चात्य नव-वर्ष 1 जनवरी से प्रारम्भ होता है।
अगर हम पाश्चात्य नववर्ष की कुंडली पर विचार करे तो चतुर्थ स्थान में पञ्चग्रही युति निर्मित हो रही है, धनु राशि में सूर्य,गुरु,शनि,केतु और बुध यह पंचग्रही युति निर्मित कर रहे है। शनि-केतु का धनु राशि में सूर्य, गुरु और बुध के साथ युति किसी संक्रामक बिमारी की और इशारा करता है। छाया ग्रह केतु के साथ शनि सूर्य की युति भय व नकारात्मकता बढाती है।
संहिता ग्रंथो के अनुसार गुरु अतिचारी व शनि वक्री हो तो संसार मे हाहाकार मचता है। शनि,मंगल व गुरु की मकर राशि मे युति ने लोगों के कष्टों को बढ़ाया। 24 जनवरी को शनि ने मकर, मंगल ने 22 मार्च व गुरु ने 29-30 मार्च की दरमियानी रात को मकर में प्रवेश किया।
गुरु एक राशि मे सामान्यतः 13 माह तक गोचर करता है। किंतु यहां यह तथ्य उल्लेखनीय है कि गुरु ने अपनी चाल में अतिचारी होकर 13 माह का सफर मात्र 5 माह में पूर्ण कर लिया। संहिता ग्रन्थों में उल्लेख है कि यदि देवराज गुरु एक वर्ष में तीन राशियों को स्पर्श कर ले तो वह वैश्विक महामारी के साथ गम्भीर आर्थिक समस्या निर्मित करता है और वही हुआ भी।
वर्तमान में 4 मई तक शनि-गुरु-मंगल का मकर राशि सम्बन्ध वैश्विक महामारी कोरोना का भय और बढ़ाएगा। 4 मई से कुछ राहत अवश्य मिल सकती है जब यह युति, मंगल के कुम्भ राशि प्रवेश कर भंग होगी । 11 मई को शनि व 14 मई को गुरु मकर में होंगे वक्री। मकर में गुरु का वक्री होना आरोग्यता का संकेत देता है।
14 मई से इस महामारी के पतन की होगी शुरुआत। 14मई से 22 जून के मध्य कोरोना वायरस के अस्तित्व को समाप्त करने पर वैष्विक स्तर पर बड़ा शोध हो सकता है। 30 जून को गुरु वक्री होकर करेंगे स्वयं की धनु राशि मे प्रवेश। धनु राशि प्रवेश के साथ ही गुरु की नकारात्मकता समाप्त होगी।
धनु का गुरु देगा सकारात्मक परिणाम, कोरोना महामारी का अंत भी होगा। गुरु वायु का कारक है।यह हवा के साथ स्वशन प्रणाली का भी प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अतिचारी गुरु का नीच मकर राशि की और आकर्षण अति भयंकर संक्रामक रोग कोरोना के जन्म का हेतु बना।
धनु में भी देवराज गुरु वक्री ही रहेंगे जो 13 सितम्बर को मार्गी होंगे। इस प्रकार ज्योतिषीय विश्लेषण से यह कहा जा सकता है कि इस वैश्विक महामारी का अंत 13 सितम्बरको गुरु के मार्गी होने के बाद ही हो सकेगा।


