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डॉ. भरत साबू ‘Early Career Abstract Award 2025’ से सम्मानित
भारत के पहले चिकित्सक बने जिन्हें यह वैश्विक सम्मान मिला
“भारत के बेटे ने रचा इतिहास – अमेरिका से मिला डायबिटीज़ रिसर्च में सर्वोच्च सम्मान”
इंदौर/नईदिल्ली, 10 जून 2025 : भारत के लिए यह गर्व का क्षण है, जब विज्ञान, संवेदना और तकनीक के संगम से निकले एक विचार ने अमेरिका में भारत का नाम रोशन किया है। प्रयास डायबिटीज़ सेंटर के निदेशक और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. भरत साबू को American Diabetes Association (ADA) द्वारा ‘Early Career Abstract Award 2025’ से सम्मानित किया गया है।
यह पुरस्कार उन्हें उनके अभिनव शोध कार्य “Mitraa – एक GPT आधारित संवादात्मक AI मॉडल जो डायबिटीज़ रोगियों को आत्म-प्रबंधन और शिक्षा में सहायता करता है” पर प्रदान किया गया। इस उपलब्धि के साथ डॉ. भरत साबू भारत के पहले चिकित्सक बन गए हैं, जिन्हें इस श्रेणी में यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है।
Mitraa – 15 भाषाओं में मरीजों का सच्चा साथी:
‘Mitraa’ कोई आम ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसा GPT आधारित संवादात्मक मॉडल है, जो दुनिया की 15 भाषाओं में मरीजों से संवाद कर सकता है। यह रोगियों को उनकी अपनी मातृभाषा में सलाह, शिक्षा और मानसिक समर्थन देता है – जिससे हर वर्ग, हर क्षेत्र, और हर संस्कृति का मरीज खुद को जुड़ा हुआ महसूस करता है।
यह तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जिन्हें अंग्रेज़ी या तकनीकी भाषा की वजह से स्वास्थ्य जानकारी तक पहुँचने में कठिनाई होती थी। अब भाषा नहीं बनेगी इलाज में बाधा – Mitraa ने यह साबित कर दिया है।
डॉ. भरत साबू का कहना है – “मेरे लिए यह सम्मान एक तकनीकी उपलब्धि से कहीं अधिक है। यह मेरी उस भावना का सम्मान है, जहाँ मैं चाहता हूँ कि कोई भी मरीज खुद को अकेला न महसूस करे। अगर तकनीक को हम मानवता से जोड़ दें, तो वह चमत्कार कर सकती है – और Mitraa उसी का उदाहरण है।”
शिकागो में बजा भारत का डंका:
यह पुरस्कार उन्हें शिकागो, अमेरिका में 20 से 23 जून, 2025 तक आयोजित 85वीं साइंटिफिकसेशंस के दौरान प्रदान किया जाएगा। यह वही मंच है, जहाँ दुनिया भर के चिकित्सक, वैज्ञानिक और नीति निर्माता एकत्र होते हैं और जहां भारत की यह आवाज, तकनीक के माध्यम से विश्व पटल पर गूंजेगी।
एक प्रेरणा युवा चिकित्सकों के लिए:
डॉ. साबू की यह सफलता देश के उन तमाम युवा डॉक्टरों और रिसर्चरों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में भी वैश्विक सोच रखते हैं। यह पुरस्कार दिखाता है कि भारत में मौजूद प्रतिभा, नवाचार और मानवीय दृष्टिकोण को दुनिया अब गंभीरता से सुन रही है।


