- Vikram Solar Brings Together Indore’s Renewable Energy Players at 'PowerConnect 2026'
- विक्रम सोलर का ‘पावरकनेक्ट 2026’ में इंदौर के रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाया
- आकाशवाणी के ‘हेलो डॉक्टर’ में डॉ. ए.के. द्विवेदी ने श्रोताओं के सवालों का वैज्ञानिक तरीके से दिया समाधान
- Movies & Shows that bring the reality of hospital corridors to life
- Sidharth Malhotra On Finding Truth In The Supernatural World Of Vvaan
प्राकृतिक ढंग से होना चाहिए पहला प्रसव
प्राकृतिक प्रसव में प्रशिक्षित मिडवाइव्स का सबसे बड़ा योगदान
इंदौर। 1816 में क्वीन ऑफ इंग्लैंड की 3 दिन तक सामान्य प्रसव के लिए कोशिश करने के बाद उनकी और बच्चे की मृत्यु हो गई जिसका गम खाके उनके डॉ ने भी अपनी जान दे दी. उस समय एक प्रसव में तीन लोगों के जान जाने की बात को गंभीरता से लेते हुए डॉक्टर्स ने प्रसव के बिगड़ते हालातों में सर्जरी करना सही समझा लेकिन आज डॉक्टरों द्वारा प्रसव में सर्जरी करने के कई विभिन्न कारण सामने देखे जा रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ा कारण मेडिको लीगल है।
डॉक्टर्स का मानना है आज के समय में मरीज और घर वालों में धैर्य की बहुत कमी है, थोड़े भी हालात बिगड़ने पर घर वालों की तरफ से दबाव होता है की सर्जरी कर दी जाए हमारे समझाने के बाद भी हमें डराया जाता है कि हमें एक ही बच्चा करना है और उसमें किसी भी तरह की कोई कॉम्प्लिकेशन नहीं होनी चाहिए कानूनी दांवपेच में फसने के डर से ज्यादातर डॉक्टर्स सिजेरियन बर्थ की ओर रुख करते हैं।
यह बात चोइथराम हॉस्पिटल एन्ड रिसर्च सेंटर और इंदौर ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसायटी द्वारा आयोजित ‘एस डब्लूय ए’ सेमिनार में एक्सपर्ट्स ने कहीं। बीते दस सालों में सिजेरियन डिलीवरी के केस बढ़ते जा रहे हैं। देश में 40% से 55% केस में सिजेरियन डिलीवरी हो रही है जिसे 15% तक लाना जरूरी है.
सेमिनार में एक्सपर्ट्स ने कहा महिला की पहली डिलीवरी को प्राकृतिक रूप से कराने पर हमारा जोर होना चाहिए और पहली डिलीवरी के लिए आने वाली महिलाओं को कम से कम हर सप्ताह 3 से 4 बार आधे घंटे की काउंसलिंग देनी चाहिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए की नार्मल डिलीवरी के बच्चे को और स्वयं को कितने फायदे हैं तभी हम सिजेरियन डिलीवरी को कम कर पाएंगे।
सिजेरियन बर्थडे केस को देखते हुये चोइथराम हॉस्पिटल में ‘एस डब्लूय ए’ स्वा की शुरुवात की गई। इसका उद्देश्य नेचुरल प्रसव को बढ़ावा देना है। स्वा में प्रत्येक महिला श्रम और शक्ति के नए आयाम में उभरती है। ये प्रक्रिया माँ को मातृत्व की जटिल भूमिका निभाने में मदद करेगी। महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाएगी।

मानसिक रूप से प्राकृतिक प्रसव के लिए तैयार किया जाता है स्वा में
स्वा को सबसे पहले श्रीमती केरन पागारानी ने शुरू किया। श्रीमती केरन ने बताया अनुभवी ऑब्स्ट्रेशन्स द्वारा प्राकृतिक प्रसव की इस प्रक्रिया के लिए अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के आधार पर दिशा निर्देश तैयार किये गए है। इसमें हमारे यहां सामुहिक रूप से प्रशिक्षित मिडवाइव्स का पूरा सहयोग रहता है।
स्वा को हमारे शहर के ऑब्स्ट्रेशन्स और पेशेंट्स द्वारा सराहा गया है। इस बात पर अटल है कि जन्म देते समय जन्मदायिनी का सम्मान सर्वोपरि है। स्व के बिर्थिंग रूम में प्राइवेसी, हाइड्रोथेरेपी, न्यूट्रिशन, मुएक थैरेपी जैसी सुविधाएं है, जिनके जरिए माँ प्राकृतिक तरीके से अपने शिशु को जन्म दे सकती है। प्रसव के पहले चरण से ही माँ को विभिन्न तरह की गतिविधियों के जरिए आरामदायक प्राकृतिक प्रसव के लिए तैयार किया जाता है।
घरवालों के साथ महिलाओं को काउंसलिंग की जरूरत
चोइथराम हॉस्पिटल के गायनिक विभाग की हेड डॉ नीलू सोनी बताती हैं कई बार महिलाएं स्वयं ही सिजेरियन डिलीवरी कराने पर जोर देती हैं। नॉर्मल डिलीवरी के दर्द से बचकर सिजेरियन करवाना ठीक लगता है लेकिन डॉक्टर स्कोर घरवालों और महिला की अच्छी तरह से काउंसलिंग करनी चाहिए अगर महिला को बीपी डायबिटीज या अन्य किसी तरह की कोई तकलीफ नहीं है तो उसे नॉर्मल डिलीवरी के लिए मानसिक रूप से तैयार करना चाहिए।
ब्राजील में 100% केस सिजेरियन डिलीवरी के
एक केस स्टडी में बताया गया है कि ब्राजील में 100% केस सिजेरियन डिलीवरी के होते हैं जहां महिलाओं में मेंसुरेशन, ओवल चिपकने जैसी कई तकलीफे कम उम्र में देखने को मिल रही है। स्टडी के बाद सिजेरियन डिलीवरी से होने वाले नुकसान गंभीर रूप में सामने आ रहे हैं जिसे कम करने के लिए अब एकजुट होकर पूरी फेटर्निटी को नार्मल डिलीवरी की तरफ बढ़ना होगा।
कई बार मरीज खुद कहीं सुनकर आ जाता है कि पानी कम होने से कंप्लीकेशन होती है इसलिए सीजर कर दीजिए हमें ऐसे समय में भी उन्हें धैर्य रखने के लिए कहना चाहिए। पानी कम होना या नाल फसने जैसे केस में भी नॉर्मल डिलीवरी के लिए रुका जा सकता है। कलर डॉपलर की मदद से हम हर पल की खबर लेते रहते हैं और धड़कन कम होने पर सीजर की तरफ रुख करते हैं।
विदेशों में मिडवाइव्स करवाती है डिलीवरी
विदेशों में डिलीवरी के दौरान मिडवाइफ का बहुत बड़ा योगदान रहता है वह नॉर्मल डिलीवरी के लिए पूरी तरह से ट्रेंड होती हैं। विदेशों में 4 साल के मैडम आई कोर्स भी चलाए जाते हैं हमारे देश में मिडवाइफ की ही बहुत कमी है नर्सिंग एजुकेशन सिस्टम में मिडवाइफ कोर्स को प्राथमिकता मिलनी चाहिए नॉर्मल डिलीवरी में इनका सबसे ज्यादा महत्व है।
प्राकृतिक प्रसव के फायदे
-बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक रहती है
-बच्चों में आयरन की कमी नहीं होती
-बच्चों को अस्थमा नहीं होता
-पहले प्रसव के बाद दूसरे प्रश्न में कॉम्प्लिकेशन नहीं आती
-बच्चादानी चिपकने आदि तरह की कॉम्प्लिकेशन महिलाओं में नहीं होती।
-मां और बच्चे की बॉन्डिंग ज्यादा रहती है
– माहवारी की तकलीफ नहीं होती
क्यों होती है सिजेरियन डिलीवरी ज्यादा
– डॉक्टर मेडिको लीगल केसेस में फंसने से डरते हैं
– पहले की तुलना में आप महिलाओं का सैलेरी एरिया की चौड़ाई कम हो गई है इसलिए कॉम्प्लिकेशन ज्यादा आते हैं
– इंटरनेट पर नॉर्मल डिलीवरी के दर्द को देखकर महिलाएं घबरा जाती हैं
– फैमिली प्लानिंग के कारण एक बच्चे में किसी तरह की कॉम्प्लिकेशन नहीं चाहते
– पहली डिलीवरी सिजेरियन हो चुकी होती है इसलिए दूसरी डिलीवरी सीजर करनी पड़ती है
– मोटापा एक बड़ा कारण है सिजेरियन डिलीवरी बढ़ने का
– ज्यादा उम्र में मां बनने वाली महिलाओं में भी सिजेरियन केस ज्यादा होते हैं


