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जन्म के तुरंत बाद हियरिंग स्क्रीनिंग जरूरी: सुनने की क्षमता ही तय करती है बच्चे का बोलना, सीखना और भविष्य
इंदौर, 09 फरवरी 2026। नवजात शिशु का पहला रोना परिवार के लिए खुशी की सबसे मधुर आवाज होता है, लेकिन अगर वही बच्चा सुन न पाए तो उसका पूरा विकास प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के बाद पहले कुछ महीने बच्चे के दिमाग, भाषा और संवाद कौशल के विकास के लिए सबसे अहम होते हैं। ऐसे में यदि सुनने की क्षमता में जरा-सी भी कमी रह जाए तो बच्चा बोलने, समझने और पढ़ाई में पीछे रह सकता है। यही वजह है कि अब डॉक्टर नवजात हियरिंग स्क्रीनिंग को हर बच्चे के लिए अनिवार्य जांच मान रहे हैं।
केयर सीएचएल हॉस्पिटल के वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक मालवीय, कंसल्टेंट, बताते हैं कि कई बार जन्मजात सुनने की समस्या बाहर से दिखाई नहीं देती। बच्चा सामान्य लगता है, लेकिन वह आवाजों पर प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। माता-पिता को इसका पता तब चलता है जब बच्चा 2–3 साल की उम्र तक बोलना शुरू नहीं करता। तब तक काफी समय निकल चुका होता है और स्पीच डेवलपमेंट में देरी हो जाती है।
डॉ. मालवीय के अनुसार, “हियरिंग स्क्रीनिंग एक बिल्कुल सरल, सुरक्षित और दर्दरहित प्रक्रिया है। इसमें बच्चे के कान में एक छोटा सा प्रोब लगाकर मशीन के जरिए ध्वनि प्रतिक्रिया जांची जाती है। यह जांच 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है और बच्चा आराम से सोता रहता है। लेकिन यही छोटा टेस्ट जीवनभर का फर्क पैदा कर सकता है।”
चिकित्सकीय अध्ययनों के मुताबिक हर 1000 में 2 से 3 बच्चों में जन्म से सुनने की कमी पाई जाती है। प्रीमैच्योर डिलीवरी, कम वजन, एनआईसीयू में भर्ती, गर्भावस्था के दौरान संक्रमण या परिवार में पहले से हियरिंग लॉस का इतिहास होने पर जोखिम और बढ़ जाता है। ऐसे बच्चों में समय पर जांच और इलाज न हो तो भाषा सीखने में कठिनाई, स्कूल में कमजोर प्रदर्शन, आत्मविश्वास की कमी और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
डॉ मालवीय आगे कहते हैं, “अगर सुनने की समस्या 6 महीने की उम्र से पहले पकड़ में आ जाए तो हियरिंग एड, कॉक्लियर इम्प्लांट या स्पीच थेरेपी के जरिए बच्चा लगभग सामान्य बच्चों की तरह बोलना और सीखना शुरू कर सकता है। देरी होने पर सुधार मुश्किल हो जाता है। इसलिए ‘अर्ली डिटेक्शन और अर्ली इंटरवेंशन’ बहुत जरूरी है। जैसे जन्म के बाद टीकाकरण जरूरी है, वैसे ही हियरिंग स्क्रीनिंग भी उतनी ही आवश्यक जांच होनी चाहिए। अब कई अस्पतालों में डिस्चार्ज से पहले यह सुविधा उपलब्ध है, ताकि कोई भी बच्चा अनजाने में इस महत्वपूर्ण जांच से वंचित न रह जाए। हमारी अपील है कि माता-पिता जागरूक बनें और अस्पताल से घर लौटने से पहले पूछें “क्या मेरे बच्चे की हियरिंग स्क्रीनिंग हो गई है?” क्योंकि एक छोटी-सी सावधानी बच्चे के पूरे भविष्य को सुरक्षित बना सकती है।”


