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सिकल सेल एनीमिया रोग को रोकना है तो विवाह से पहले व गर्भावस्था में जांच जरूरीः डॉ. ए.के. द्विवेदी
एडु सिरमएक्स नर्सिंग कॉलेज में सिकल सेल एनीमिया पर जागरूकता व्याख्यान हुआ
सांसद सेवा प्रकल्प एवं एडवांस्ड होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में चले सात दिवसीय सिकल सेल जागरूकता अभियान का भी हुआ समापन
इंदौर। एडु सिरमएक्स नर्सिंग कॉलेज, इंदौर में शुक्रवार को सिकल सेल एनीमिया को लेकर जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान के वक्ता होमयोपैथिक चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष शरीर क्रिया विज्ञान विभाग और वैज्ञानिक सलाहकार मंडल सदस्य सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन होम्योपैथी आयुष मंत्रालय(सीसीआरएच), भारत सरकार और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के कार्यकारी परिषद के सदस्य) थे। डॉ. द्विवेदी ने नर्सिंग के विद्यार्थियों को सिकल सेल एनीमिया जैसे गंभीर अनुवांशिक रोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कॉलेज में आयोजित यह व्याख्यान विश्व सिकल सेल दिवस के उपलक्ष्य में सांसद सेवा प्रकल्प एवं एडवांस्ड होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय सिकल सेल जागरूकता अभियान का हिस्सा था।
व्याख्यान का उद्देश्य नर्सिंग विद्यार्थियों को सिकल सेल एनीमिया जैसे गंभीर अनुवांशिक रोगों के बारे जानकारी देना था। डॉ. ए.के. द्विवेदी ने नर्सिंग के विद्यार्थियों को सिकल सेल एनीमिया के कारण, लक्षण, संभावित जटिलताएं और रोकथाम के उपायों के बारे में बताया। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवांशिक रक्त विकार है। इसमें लाल रक्त कोशिकाएं सामान्य गोल आकार की बजाय अर्द्धचंद्राकार हो जाती है। इससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है। यह रोग ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न में वंशानुगत रूप से फैलता है और इसके निदान एवं रोकथाम के लिए एचबी इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसे परीक्षणों की अत्यंत आवश्यकता है। विशेषतः विवाह से पूर्व और गर्भावस्था के दौरान।
नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व बताया
व्याख्यान के दौरान डॉ. द्विवेदी ने कॉलेज की उन विद्यार्थियों से भी विशेष संवाद किया जो स्वयं सिकल सेल रोग से पीड़ित है। डॉ. द्विवेदी ने विद्यार्थियों को होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के प्रभावी उपयोग के साथ संतुलित खानपान और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में भी बताया। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि सीसीआरएच द्वारा समर्थित अनुसंधानों में यह प्रमाणित हुआ है कि होम्योपैथिक औषधियां रोग की तीव्रता को कम कर सकती है और रोगियों की जीवन गुणवत्ता में सुधार ला सकती है।
आप सभी भविष्य के स्वास्थ्य प्रहरी हैं
डॉ. द्विवेदी ने नर्सिंग के विद्यार्थियों से सिकल सेल रोग के प्रति जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया। जिन्हें यह बीमारी है उनकी होम्योपैथी चिकित्सा भी करेंगे तथा यह भी कहा कि आप सभी भविष्य के स्वास्थ्य प्रहरी हैं और आपके प्रयास से समाज में इस रोग के विरुद्ध एक प्रभावशाली स्वास्थ्य चेतना विकसित की जा सकती है। डॉ. द्विवेदी ने सामूहिक विवाह से परहेज, जेनेटिक काउंसलिंग को बढ़ावा देने और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिक्षा प्रसार की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में कॉलेज प्रबंधन एवं छात्र-छात्राओं ने डॉ. द्विवेदी का आभार व्यक्त किया। कॉलेज प्रबंधन ने कहा कि यह सत्र अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और जनहितकारी रहा। इससे छात्र-छात्राओं को न केवल रोग की समझ मिली, बल्कि समाज सेवा के प्रति एक नई सोच और दृष्टिकोण भी प्राप्त हुआ। व्याख्यान में कॉलेज के लगभग 150 छात्र-छात्राएं, प्राचार्य एवं निदेशक उपस्थित रहे।
सात दिवसीय अभियान का समापन
विश्व सिकल सेल दिवस के उपलक्ष्य में सांसद सेवा प्रकल्प एवं एडवांस्ड होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च एवं वेलफेयर सोसायटी, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय सिकल सेल जागरूकता अभियान इंदौर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया गया। डॉ. ए.के. द्विवेदी ने बताया कि “स्वस्थ जीवन की ओर एक जागरूक पहल” की थीम के साथ शुरू हुआ यह अभियान 13 जून से 20 जून तक चला। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज को सिकल सेल जैसे घातक अनुवांशिक रोग के प्रति आमजन को सजग करना और इसकी रोकथाम के प्रति समाज में लोगों को जागरूक करना था। लोकसभा सांसद शंकर लालवानी और होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. ए. के. द्विवेदी के नेतृत्व में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में विविध जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अभियान संचालित किया गया। अभियान के आखिरी दिन नर्सिंग कॉलेज में व्याख्यान का आयोजन किया गया था।


