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प्रवचन सुनने के बाद भी सुधार न आए तो हमारी कामनाएं दोषी: स्वामी परमानंद
इंदौर. गुरू वही है, जिसके अंदर कोई कमी न हो. आजकल बहुत से गुरू ऐसे भी हैं, जो कुंभ मेले में केवल अपनी दुकान चलाने आते हैं. हम बाजार में कोई सौदा तभी करते हैं जब बेचने वाले और हमारे बीच भाव तय हो जाए. कुछ ऐसा ही भाव हमारे और तुम्हारे बीच होना चाहिए. भारतीय कथाएं मनोरंजक नहीं, मनोमंथक हैं, जिनमें ज्ञान की कोई कमी नहीं लेकिन हमारी कामनाएं ही हमें परेशान करती हैं। इतने प्रवचन और कथा भागवत सुनने के बाद भी यदि कोई सुधार नहीं आया तो इसका मतलब यह है कि कामनाएं ही सारी गड़बड़ कर रही हैं.
युगपुरूष स्वामी परमानंद गिरि महाराज ने आज पंजाब अरोड़वंशीय धर्मशाला भवन पर अखंड परमधाम सेवा समिति के तत्वावधान में गत 6 अगस्त से चल रहे ध्यान योग शिविर के समापन एवं गुरू पूजन समारोह में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए.
प्रारंभ में अखंड परमधाम प्रबंध समिति के अध्यक्ष सीए. विजय गोयनका, विजय शादीजा, राजेश अग्रवाल, श्यामलाल मक्कड़, किशनलाल पाहवा, अरूण गोयल, विष्णु कटारिया, रघुनाथ गनेरीवाल आदि ने पादुका पूजन कर महोत्सव का श्रीगणेश किया. देश-विदेश से आए भक्तों ने कतारबद्ध हो कर सुसज्जित पादुकाओं का पूजन कर अपने सदगुरू से शुभाशीष प्राप्त किये. सत्संग सभा में साध्वी चैतन्य सिंधु, स्वामी ज्योतिर्मयानंद, स्वामी चेतनानंद आदि ने भी गुरू की महिमा का भाव पूर्ण चित्रण किया। संचालन साध्वी चैतन्य सिंधु एवं विजय शादीजा ने किया। अंत में आभार माना अध्यक्ष विजय गोयनका ने.
मनुष्य गलतियों का पुतला
महामंडलेश्वरजी ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ओंकारेश्वर में शंकराचार्यजी के विचारों का आध्यात्मिक साधना केंद्र बनाने का संकल्प लेकर अच्छा काम किया है. वे भले ही दस गलतियां कर रहे हों, पर उन्होंने मध्यप्रदेश को बहुत कुछ देने का संकल्प कर रखा है. हम तो चाहते हैं कि वे तब तक गद्दी पर रहें, जब तक यह काम पूरा नहीं हो. कमियां सबमें रहती है और मनुष्य गलतियों का पुतला होता है इसके बाद भी यदि कोई अच्छा काम हो रहा है तो वे बधाई के पात्र हैं.


