- Bollywood’s Favourite Jodi - Saifu and Bebo lagayenge Hasi Ke Tyo-Ha-Ha-Har mein chaar chaand only on The great Indian Kapil Show
- Disha Patani leaves fans curious as she drops a series of cryptic stories: There are humans amongst us
- It’s October Season! 7 Bollywood Actors Who Are Your Libra–Scorpio Twins — Rekha, Aditi Rao Hydari to Kunal Kapoor
- मिराया होटल एंड रिज़ॉर्ट्स ने धनंजय श्रीवास्तव को क्लस्टर जनरल मैनेजर नियुक्त किया
- भारत की नंबर 1 EV अब INDULGE के लिए तैयार है!
इंडियन लाइवस्टॉक फीड एंड पोल्ट्री इंडस्ट्री ने सोया मील के बढ़ते दामों में हस्तक्षेप की मांग की
पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग द्वारा सोया मील के ड्यूटी फ्री आयात की सिफारिश
कोलकाता, 19 मई, 2021: इंडियन लाइवस्टॉक सेक्टर वर्तमान में एग्रीकल्चरल जीडीपी के लिए 25.6% का योगदान करता है और नेशनल जीडीपी में इसका मात्र 4.11% योगदान है, जो इस सेक्टर में मौजूद क्षमताओं एवं संभावनाओं से काफी कम है। पोल्ट्री सेक्टर जीडीपी में 1.3 लाख करोड़ रुपए का योगदान करता है। पोल्ट्री इंडस्ट्री को 2020 के मात्र तीन महीनों में ही 26,000 करोड़ रुपए की भारी चपत लग गई थी। इसकी मुख्य वजह वह गलत सूचना थी जिसमें कहा गया कि चिकन खाने से कोविड-19 फैलता है।
आपूर्ति श्रृंखला और लॉजिस्टिक्स में पैदा हुआ एक राष्ट्रव्यापी गतिरोध भी इसकी एक बड़ी वजह बना था। इसका दुष्प्रभाव न सिर्फ पोल्ट्री इंडस्ट्री पर पड़ा, बल्कि लाइवस्टॉक फीड (पशुधन-चारा) उत्पादक जैसे अन्य सहायक उद्योग भी इससे प्रभावित हुए। इसके अतिरिक्त पिछले कुछ महीनों से कच्चे माल की कीमतें बेतहाशा बढ़ गई हैं, मुख्य रूप से सोया मील के दाम आसमान छू रहे हैं। देश को कोविड की दूसरी लहर का आघात लगने के साथ यह सेक्टर नई बाधाओं को झेल रहा है, जिसके चलते मुर्गी पालने वाले किसान और पशुधन-चारा उत्पादक गहरी मुसीबत में पड़ गए हैं।
पशुधन चारे के मुख्य घटक सोया मील, जिसका चारे में 30% हिस्सा होता है, की कीमतों में अचानक उछाल देखा गया है। मार्च 2020 के दौरान इंदौर मार्केट में 46% प्रोटीनयुक्त सोया मील का भाव 30,000 रुपए (इक्स-प्लांट) था। इसकी मौजूदा कीमतें प्रति मीट्रिक टन के आधार पर 54,500 रुपए तक चढ़ चुकी हैं। पिछले साल के मुकाबले सोया मील की कीमतें 82% की भारी छलांग लगा चुकी हैं। कीमतों में इस प्रकार की असाधारण वृद्धि का कोई खास कारण नजर नहीं आता, क्योंकि मार्केट में सोया का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है।
इन हालात के मद्देनजर पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग ने वाणिज्य विभाग के अवर सचिव को एक कार्यालयीन मेमोरंडम जारी किया, जिसमें सेक्टर को आगे चलकर होने वाले और ज्यादा नुकसान से बचाने के लिए 12 लाख मीट्रिक टन सोया मील का ड्यूटी फ्री आयात करने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश इंडस्ट्री द्वारा किए गए उस अनुरोध के जवाब में की गई, जिसमें अप्रैल की शुरुआत में ही यह मुद्दा उठाया गया था। पत्र में कमोडिटी एक्सचेंजों पर होने वाले सोयाबीन कमोडिटी ट्रेड का नियमन करने की गुजारिश भी की गई थी, ताकि अटकलबाजियों की बिना पर सोयाबीन की कीमतों में आने वाली उछाल रोकी जा सके।
पशुपालन और मत्स्यपालन विभाग द्वारा की गई सिफारिश पर टिप्पणी करते हुए अनमोल फीड्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक श्री अमित सरावगी ने कहा, “सोया मील की बढ़ती कीमत का असर तैयार चारे की कीमतों पर पड़ रहा है, जो पिछले एक साल में कुल मिलाकर 25% बढ़ी है। पशुधन-चारा उद्योग ग्राहक आधार घटने और चारे की कम मांग हो जाने के डर से इस सोया मूल्य वृद्धि को अंतिम उपभोक्ता के सर पर नहीं मढ़ना चाहता, परिणामस्वरूप चारा उत्पादकों को घाटा हो रहा है। पशुपालन और मत्स्य विभाग द्वारा सोया मील का आयात ड्यूटी फ्री करने की सिफारिश एक स्वागत योग्य और बहुत जरूरी कदम है।
यह न केवल पोल्ट्री किसानों और बड़े पैमाने पर पोल्ट्री उद्योग को, बल्कि अन्य संबद्ध और सहायक उद्योगों- जैसे कि चारा उत्पादकों तथा अंतिम उपभोक्ताओं को भी राहत प्रदान करेगा। भारत का पोल्ट्री सेक्टर, जिसका मूल्य लगभग ₹90,000 करोड़ आंका गया है, 14 महीनों के अंतराल में तीसरी बार फिर एक मुश्किल दौर से गुजर रहा है। सोया के ड्यूटी फ्री आयात की बदौलत कीमतें मौजूदा बाजार दर से लगभग आधी हो जाएंगी। इससे हमारे पोल्ट्री किसानों को काफी हद तक मदद मिलेगी और वे उचित लाभ प्राप्त करने में सक्षम होंगे। हम भारत सरकार से इस सिफारिश को लागू करने और महामारी के इस कठिन समय में हमारी मदद करने का विनम्र अनुरोध करते हैं।”
पोल्ट्री का सेगमेंट आज भारत में एग्रीकल्चरल सेक्टर के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में गिना जाता है। इंडस्ट्री द्वारा लगाए गए अनुमानों के अनुसार भारत प्रतिवर्ष 2.75 मिलियन टन चिकन मीट और 65.48 मिलियन (2.86 मिलियन टन) मुर्गी के अंडे उत्पादित करता है। इसके अलावा यह सेगमेंट 3 मिलियन लोगों को रोजगार देता है तथा इसका सकल राष्ट्रीय उत्पाद में 45,416 करोड़ रुपए से अधिक का योगदान है। ब्रॉयलर और अंडों से मिल कर बना भारतीय पोल्ट्री बाजार 2020 में 1,988 बिलियन रुपए के मूल्य पर पहुंच गया था। 2021-2026 के दौरान भारतीय पोल्ट्री बाजार 15.2% की सीएजीआर से बढ़ेगा। 2020 में भारतीय पशुधन-चारा बाजार का आकार लगभग 403.5 बिलियन रुपए के मूल्य पर पहुंच गया था। 2021 और 2026 के बीच इस बाजार के 15% की सीएजीआर से बढ़कर 2026 तक लगभग 933.3 बिलियन रुपए के मूल्य तक पहुंचने की उम्मीद है।


