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मणिपाल हॉस्पिटल्स मुकुंदपुर क्लस्टर में थैलेसीमिया क्लिनिक और डे केयर वार्ड का शुभारंभ
कोलकाता, 8 मई 2026: थैलेसीमिया से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए, जिनका जीवन बार-बार अस्पताल आने और नियमित रक्त चढ़ाने पर निर्भर है, शहर में उम्मीद की एक नई किरण सामने आई है। मणिपाल हॉस्पिटल्स मुकुंदपुर ने आज अपने मुकुंदपुर यूनिट में एक विशेष ‘थैलेसीमिया प्रिविलेज क्लिनिक’ और ‘डे केयर वार्ड’ का उद्घाटन किया। इस पहल का नेतृत्व प्रो. (डॉ.) राजीब डे, हेड – क्लिनिकल हीमैटोलॉजी, हीमैटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट, मणिपाल हॉस्पिटल्स मुकुंदपुर क्लस्टर ने किया।
इस अवसर पर डॉ. सौमेन मेउर, एचओडी एवं सीनियर कंसल्टेंट – पीडियाट्रिक्स, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर; डॉ. अतनु कुमार जना, एचओडी – नियोनेटल यूनिट, पीडियाट्रिशियन एवं नियोनेटोलॉजिस्ट, मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर; श्रीमती जयंती चटर्जी, हॉस्पिटल डायरेक्टर – मणिपाल हॉस्पिटल मुकुंदपुर तथा श्री कोमल दशोरा, क्लस्टर डायरेक्टर – मणिपाल हॉस्पिटल्स (मुकुंदपुर क्लस्टर) उपस्थित रहे। यह पहल थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए समग्र एवं रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नव उद्घाटित यह क्लिनिक एक ही छत के नीचे थैलेसीमिया से संबंधित समग्र उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मुख्य रूप से 18 वर्ष तक के बच्चों और किशोर मरीजों के लिए विशेष सेवाएं प्रदान करेगा, जिससे युवा मरीजों को केंद्रित एवं विशेषज्ञ देखभाल मिल सके। इस सुविधा में थैलेसीमिया और कैरियर डिटेक्शन की डायग्नोस्टिक सेवाएं, क्लिनिकल मूल्यांकन, समर्पित थैलेसीमिया डे केयर वार्ड के माध्यम से ट्रांसफ्यूजन सपोर्ट, प्रीनेटल डायग्नोसिस, जेनेटिक काउंसलिंग, मनोवैज्ञानिक सहायता, मल्टीडिसिप्लिनरी केयर और बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों को समग्र उपचार मिल सकेगा। प्रो. (डॉ.) राजीब डे सप्ताह में एक दिन इस क्लिनिक में मरीजों को देखेंगे, जिससे उन्हें नियमित विशेषज्ञ परामर्श मिल सके। मरीजों को ‘थैलेसीमिया प्रिविलेज कार्ड’ भी प्रदान किया जाएगा, जिसके माध्यम से वे किफायती दरों पर उपचार सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) राजीब डे ने कहा, “भारत में थैलेसीमिया आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है। अनुमानित रूप से देश में 1 लाख से 1.5 लाख लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं और हर वर्ष लगभग 10,000 से 12,000 बच्चे थैलेसीमिया मेजर के साथ जन्म लेते हैं। भारत में प्रति 1000 जीवित जन्मों में लगभग 1.2 बच्चे थैलेसीमिया से प्रभावित होते हैं। पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में स्थिति और भी चिंताजनक है। यहां 10 प्रतिशत से अधिक लोग थैलेसीमिया के कैरियर हैं तथा 20,000 से अधिक मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है, जो राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी बोझ डालता है। वर्तमान में आजीवन रक्त चढ़ाना और आयरन किलेशन ही इसका प्रमुख उपचार है। थैलेसीमिया का एकमात्र स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है। उल्लेखनीय है कि मुकुंदपुर क्लस्टर में एक समर्पित बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट भी उपलब्ध है, जिससे पात्र मरीजों को उन्नत उपचार आसानी से मिल सकेगा।”
क्लिनिक के शुभारंभ के बारे में मणिपाल हॉस्पिटल्स ईस्ट के रीजनल डायरेक्टर डॉ. अयनाभ देबगुप्ता ने कहा, “पूर्वी भारत में थैलेसीमिया का बोझ अब भी काफी अधिक है। पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में थैलेसीमिया कैरियर रेट 8–10 प्रतिशत तक है, जबकि राष्ट्रीय औसत 3–4 प्रतिशत है। मणिपाल हॉस्पिटल्स में शुरू किया गया यह थैलेसीमिया प्रिविलेज क्लिनिक क्षेत्र के मरीजों तक किफायती और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रारंभिक कैरियर डिटेक्शन और जेनेटिक काउंसलिंग के माध्यम से थैलेसीमिया से प्रभावित जन्मों को रोकने से लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसे उन्नत उपचार उपलब्ध कराने तक, हमारा लक्ष्य धीरे-धीरे एक थैलेसीमिया-मुक्त समाज की दिशा में आगे बढ़ना है।”
यह पहल मणिपाल हॉस्पिटल्स की सुलभ, समग्र और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत मरीज सहायता प्रणाली को एक साथ लाकर अस्पताल का उद्देश्य क्षेत्र में थैलेसीमिया मरीजों के उपचार प्रबंधन और उनके समग्र स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण सुधार लाना है।


