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माधुरी दीक्षित ने जे.बी. नगर के दिनों को याद किया, कहा खुशी सब कुछ होने पर निर्भर नहीं करती
मुंबई: सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न पर आने वाला इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5, जो इंडिया वाला डांस का जश्न मना रहा है, दर्शकों को एक भावुक और नॉस्टैल्जिक पल देगा। इस एपिसोड में माधुरी दीक्षित, जो फ़िल्म माँ बहन में अपना किरदार निभाती नज़र आएंगी, अपने बचपन, पारिवारिक मूल्यों और स्टारडम तक की यात्रा को याद करती हैं। उन्हें उनकी ज़िंदगी और करियर का जश्न मनाने वाला एक विशेष वीडियो दिखाया गया, जिसके बाद माधुरी ने मुंबई के जे.बी. नगर में बिताए अपने बचपन की दिल छू लेने वाली यादें साझा कीं। उन्होंने वहाँ की अपनापन भरी कम्युनिटी, छोटी-छोटी खुशियाँ और वे सबक याद किए जो आज भी उनकी ज़िंदगी को देखने का नज़रिया तय करते हैं।
होस्ट हर्ष लिम्बाचिया के अनुरोध पर अपनी यात्रा को याद करते हुए माधुरी ने सबसे पहले अपने बचपन के मोहल्ले की गर्मजोशी और अपनापन को याद किया।
माधुरी दीक्षित ने कहा, “इतनी सारी यादें हैं। मैं बड़ी हो रही थी, जो पड़ोसी थे वो भी परिवार के सदस्य हुआ करते थे। किसी के घर में खाना खाना है तो हमारे घर में आ जाते थे। हम बच्चे किसी के घर में चले जाते थे, ‘आंटी, आप पकौड़े बनाइए, हमें आपके बहुत पसंद हैं।’ वो जो रिश्ते थे, कमाल के थे। क्योंकि अब तो ऐसे घरों में रहते हैं जहाँ पता भी नहीं होता कि आपके पड़ोसी कौन हैं। जे.बी. नगर में एक परिवार जैसा माहौल था, वो बहुत शानदार था। बच्चे साथ खेलते भी थे, साथ में पिटते भी थे। यह अद्भुत था।”
अपने बचपन के बेफ़िक्र दिनों को याद करते हुए माधुरी ने बताया कि कैसे छोटी-छोटी चीज़ों में खुशी मिलती थी और कैसे मज़बूत समुदाय का जुड़ाव उनके बड़े होने के दौरान हमेशा उनके आसपास रहा।
उन्होंने आगे कहा, “कुछ था नहीं ज़्यादा हमारे पास, लेकिन ख़ुशी बहुत थी तब भी और हम हमेशा बहुत खुश रहते थे। एक बिल्डिंग में बारह-तेरह बच्चे थे, साथ में दूसरी बिल्डिंग से सब मिलाकर तीस बच्चे एक साथ खेलते थे। मम्मी को पता भी नहीं था हम लोग सब कहाँ हैं। घर आकर डाँट पड़ती थी, ‘कहाँ चले जाते हो, बताते भी नहीं हो।”
अभिनेत्री माधुरी ने अपने डांस सफ़र की शुरुआत और उसके बाद आए जीवन बदल देने वाले सालों को भी याद किया, जब उनका करियर आगे बढ़ा।
माधुरी ने साझा किया, “डांस मैंने वहाँ शुरू किया था पहले। मैं जब तीन साल की थी, वहीं जे.बी. नगर में डांस स्कूल था। डांस करना शुरू किया। वहाँ की इतनी सारी यादें हैं। मेरी पहली फिल्म जब रिलीज़ हुई, ‘अबोध’, तब भी हम वहीं थे। ‘तेज़ाब’ के बाद फिर हम लोग वहाँ से निकले क्योंकि वहाँ सिक्योरिटी नहीं थी, तो बाद में मुश्किल होने लगी। ‘तेज़ाब’ के बाद कोई भी आ जाता था घर पे। ‘मैडम ने बुलाया हमको,’ सूटकेस सारा लेके आ गए थे।”
एक बेहद व्यक्तिगत नोट पर समाप्त करते हुए माधुरी ने समझाया कि उनका पालन-पोषण आज भी इस बात को प्रभावित करता है कि वह सफलता, खुशी और ज़िंदगी को किस तरह देखती हैं।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा, “लेकिन आज भी मैं जे.बी. नगर के बारे में सोचती हूँ, ख़ुशी का एक अहसास आता है, एक मुस्कान आती है। मैं बहुत ही लोअर मिडल क्लास परिवार से हूँ, लेकिन फिर भी हम बहुत खुश थे। लोग पूछते हैं, ‘सक्सेस है आपका इतना, आप इतने डाउन टू अर्थ क्यों हैं?’ क्योंकि मैंने कहा कि मुझे पता है कि कुछ नहीं हो तो भी आप खुश रह सकते हैं। और आज सब कुछ है तो खुश हैं, तो ख़ुशी है, लेकिन नहीं है भी तो क्या है उसमें? ख़ुशी तो अपने ऊपर होती है। हमें हमेशा खुश रहना चाहिए, हमेशा सम्मानजनक रहना चाहिए और हमेशा ज़िंदगी का आनंद लेना चाहिए। और कुछ भी बदलना नहीं चाहिए।”
माधुरी दीक्षित की दिल छू लेने वाली बातों ने सभी को भावुक कर दिया। यह याद दिलाता है कि सच्ची खुशी भौतिक सफलता से नहीं, बल्कि उन रिश्तों, मूल्यों और यादों से आती है, जो ज़िंदगी भर हमारे साथ रहती हैं।
इंडियाज़ बेस्ट डांसर सीज़न 5 देखना न भूलें, हर शनिवार और रविवार रात 9:30 बजे, सिर्फ़ सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविज़न और सोनी लिव पर।


