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कथा, सत्संग से मिले संस्कार करते हैं जीवन कल्याण
इंदौर. नरसी की दादी उन्हें श्रीकृष्ण जी के सत्संग, कथा, मंदिर ले जाती थी, ताकि बो बोल सुनकरअच्छे संस्कार ले सकें. लेकिन आज हम लोग भी बच्चों को मंदिर, सत्संग नही ले जाते. बच्चों को नए मॉल और मूवी दिखाने ले जाते है। बच्चों को जैसा सिखाओ, बताओ वो वैसा करेंगे. बच्चों को उनकी मन पसंद चीज नहीं देने से कुछ देर रोयगा, लेकिन संस्कार नहीं दिए तो बच्चा जीवनभर रोयगा । कथा, सत्संग, संस्कार ही जीवन का कल्याण करते है.
यह बात सुश्री जया किशोरी ने नानीबाई रो मायरो कथा के पहले दिन कहीं. कथा का आयोजन दलाल बाग में हो रहा है. आयोजनकर्ता विधायक संजय शुक्ला है. सुश्री जया किशोरी ने कहा कि घर मे एक बोले तो दूसरे को चुप रहना चाहिए, इससे हर घर का झगड़ा खत्म हो जाएगा. नानी बाई रो मायरो की कथा अटूट श्रद्धा, भगवान पर विश्वास पर आधारित प्रेरणादायी कथा है. यदि सच्चे मन से भगवान को याद किया जाए तो वे अपने भक्तों की रक्षा करने स्वयं आते हैं.
नरसी जी के भाई-भाभी भी थे. भाभी का स्वभाव कड़क था. भाभी नरसी को ताने मारती रहती थी। दादी चुपचाप सहन करती रहती थी. एक बार शिव रात्रि पर नरसी की दादी भोलेनाथ पर जल चढ़ाने मंदिर जाती है. वहां एक संत मिलते है. दादी संत को नरसी की परेशानी बताती है. संत नरसी को गोद में बैठकर सिर पर हाथ फेरते है और कान में इससे नरसी की बोलने व सुनने की शक्ति आ जाती है. इसके बाद नरसी भगत भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो जाते है. भाभी के तानों के कारण नरसी घर छोड़कर चले जाते है. जंगल में महादेव को तपस्या से मनाते है. शिवजी नरसी से वर मांगने को कहते है. नरसी श्रीकृष्ण की रासलीला देखने को कहते है तो शिवजी को नरसी की भक्ति पर आश्चर्य होता है. नरसी श्रीकृष्ण के अटूट भक्त थे और नानीबाई रो मायरो भक्त की कथा है.
गूंजा राधे-राधे का अभिवादन
दलाल बाग प्रांगण राधे राधे अभिवादन से गूंजता रहा. सुश्री जया किशोरी को कथा प्रांगण से कथा मंच तक विशेष रथ पर लाया गया. कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दलाल बाग प्रांगण में पहुंचे. कथा सुनने भाजपा नेता विष्णु प्रसाद शुक्ला, शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल, राजेश चौकसे , पंडित कृपा शंकर शुक्ला, प्रेम खडायता, राजेंद्र शुक्ला, दीपू यादव, पिंटू जोशी, जीतू शर्मा, सर्वेश तिवारी, अनूप शुक्ला, वार्ड एक व तीन के कार्यकर्ताओं ने आशीर्वाद लिया.


