मरीजों की देखरेख में नर्स का योगदान 75% से ज्यादा, इसलिए इनकी ट्रेनिंग अनिवार्य

सिम्युलेशन से 50 % तक घट सकती हैं मेडिकल प्रोफेशन गलतियों की आशंका

चोइथराम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Synergy-2K25’ का आगाज

इंदौर। मेडिकल में जब जीवन और मृत्यु का सवाल होता है तब नर्सेज को एआई-वीआर बेस्ड सिम्युलेशन मैनिक्विंस से सीखना ही बेहतर होता है। इससे वे मरीज के साथ बेहतर काम कर सकते हैं। आज के समय एआई बेस्ड इतने अच्छे मैनिक्विंस है, जो बिलकुल असली मरीज की तरह लगते हैं। इन पर बीपी मशीन और आईवी लगाने से लेकर गंभीर दुर्घटना की स्थिति में बैंडेज करने तक की ट्रेनिंग दी जा सकती हैं। अलग-अलग परिस्थितियों के लिए इसमें अलग-अलग टूल्स दिए हैं। इससे गंभीर स्थितियों में गलतियों की आशंका 50% तक कम हो जाती है। भारत में इसका उपयोग कम होता है पर विदेशों में यह काफी प्रचलित है। चोइथराम कॉलेज ऑफ नर्सिंग में दो दिनी राष्ट्रीय सम्मेलन ‘Synergy-2K25’ के पहले दिन यह बात अहमदाबाद से आए नर्सिंग चैंप्स के फाउंडर डॉ अशोक शर्मा ने ‘वर्चुअल सिम्युलेशन से नर्सिंग शिक्षा’ के बारे में कही। कॉन्फ्रेंस का विषय ‘इंटरडिसकीप्लीनरी सिनर्जी: एआई एट द इंटरसेक्शन ऑफ हेल्थ, रिसर्च, एजुकेशन एंड प्रेपरिंग ग्लोबल हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स’ है।

डाइग्नोसिस और ट्रीटमेंट मॉडेलिटी तक में एआई का उपयोग

बंसोला कॉलेज ऑफ़ नर्सिंग, नासिक के प्रिंसिपल डॉ टी शिवबालन ने नर्सिंग रीसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर कहा कि नर्सिंग रीसर्च में क्वालिटेटिव काम ज्यादा होता है, जिसमें मरीजों की भावनाओं, उनके परिजनों की धारणाओं, इलाज को लेकर उनके विचार आदि के बारे में हमें जानना होता है। इसे मेनुअली करने में लंबा समय लगता है जबकि एआई में मशीन लर्निंग, नेचुरल लेंगुएज प्रोसेसिंग और डीप लर्निंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए हम ज्यादा आसानी से और कम समय में इन जानकारियों को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि आज के समय में सिम्युलेशन, एआई लर्निंग, लैब और मेडिकल डाइग्नोसिस और ट्रीटमेंट मॉडेलिटी सहित मेडिकल प्रोफेशन के हर क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है इसलिए हर मेडिकल प्रोफेशनल को इसका इस्तेमाल सीखने की जरूरत है। इस मौके पर मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा विभाग के सचिव आईएएस विनीत जोशी ने भी ऑनलाइन जुड़कर समाज और देश के विकास में नर्सों की विशेष भूमिका पर प्रकाश डाला।

हॉस्पिटल की बैकबोन है नर्सेस

एक्सपर्ट्स ने बताया कि आज देश भर में नर्सिंग प्रोफेशन के महत्व को समझा जा रहा है क्योंकि नर्सेस ही किसी भी हॉस्पिटल की बैक बोन होती है। मरीजों की देखरेख में उनका योगदान 75% से अधिक होता है। देश में डॉक्टर्स ही नहीं बल्कि नर्सेस की संख्या भी जनसंख्या को देखते हुए काफी कम है इसलिए अब देश भर नर्सिंग कॉलेज शुरू किए जा रहे हैं और स्टूडेंट्स को कई प्रकार की स्कॉलर्शिप भी दी जा रही है। एक और बड़ी समस्या यह है कि 10% नर्सेस पढ़ाई करने के बाद नर्सेस अच्छे पैकेज के लिए विदेश चले जाते हैं। इससे भी देश में अच्छी नर्सेस की कमी है।

आज एआई युग में शिक्षा’ पर होगी चर्चा

प्रिंसिपल और ऑर्गेनाइसिंग चेयरपर्सन प्रो. श्रीजा विजयन ने बताया कांफ्रेंस में 15 शहरों के सैकड़ों डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ट्रस्टी सतीश मोतियानी, डीएमएस डॉ. सुनील चांदिवाल और एजुकेशन सर्विस यूनिट के डायरेक्टर राजेश अवस्थी भी उपस्थित रहे। आयोजन सचिव डॉ. प्रो. शीतल सक्सेना ने बताया कि शनिवार को डॉ. माया इंगले (डीएवीवी) ‘एआई युग में शिक्षा’ पर, अधिवक्ता प्रवीण बावसे ‘एआई से जुड़े कानूनी पहलुओं’ पर और आईआईआईटी हैदराबाद के जूडिश राज ‘एथिक्स एंड गवर्नेंस ऑफ एआई’ पर वक्तव्य देंगे। सम्मेलन के अंत में सांस्कृतिक संध्या और पोस्टर/पेपर प्रेजेंटेशन भी होंगे।

Leave a Comment