प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जल संरक्षण संबंधी सुझाव पर त्वरित संज्ञान, डॉ. ए.के. द्विवेदी ने जताया आभार

इंदौर, 23 जून 2026. देश में बढ़ते जल संकट, जल संरक्षण एवं “जल ही जीवन है” विषय पर राष्ट्रीय जन-जागरूकता अभियान चलाने संबंधी सुझाव पर प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा त्वरित संज्ञान लिए जाने पर वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. ए.के. द्विवेदी ने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है।

डॉ. द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने दिनांक 25 मई 2026 को प्रधानमंत्री जी को पत्र प्रेषित कर आगामी “मन की बात” कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं जल बचाने के सरल उपायों पर विशेष जन-जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय ने उक्त पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए उसे आवश्यक कार्यवाही हेतु जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय को अग्रेषित किया तथा इसकी सूचना आधिकारिक पत्र के माध्यम से उन्हें उपलब्ध कराई।

डॉ. द्विवेदी ने कहा कि किसी सामान्य नागरिक द्वारा राष्ट्रहित में दिए गए सुझाव को गंभीरता से स्वीकार कर उस पर त्वरित कार्यवाही करना लोकतंत्र की सशक्त भावना तथा जन-केंद्रित शासन व्यवस्था का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह न केवल उनके लिए सम्मान का विषय है, बल्कि उन सभी नागरिकों के लिए भी प्रेरणा है जो देश और समाज के हित में सकारात्मक सुझाव देने का प्रयास करते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण केवल पर्यावरण का विषय नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य, कृषि, जल संरक्षण तथा सतत विकास से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। यदि जनभागीदारी के माध्यम से “जल ही जीवन है” अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जाए तो देश में जल संकट की चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है।

डॉ. द्विवेदी ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जल संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। सब्जियां एवं फल धोने के बाद बचे हुए पानी का उपयोग पौधों की सिंचाई में करें। एयर कंडीशनर (एसी.) से निकलने वाले पानी को भी संग्रहित कर वृक्षों एवं पौधों में उपयोग किया जा सकता है। पौधों को सीधे पाइप से पानी देने के बजाय स्प्रिंकलर अथवा फव्वारा पद्धति अपनाने से जल की बचत होती है, पौधों की वृद्धि बेहतर होती है तथा भूमि की उर्वरता भी बनी रहती है।

उन्होंने वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने, पानी के अनावश्यक उपयोग को रोकने तथा अधिकाधिक वृक्षारोपण करने का भी आह्वान किया। साथ ही कहा कि बच्चों और युवाओं को जल के महत्व के प्रति जागरूक करना समय की आवश्यकता है।

डॉ. द्विवेदी ने कहा, “हमने नदियों, तालाबों और झरनों में प्रचुर मात्रा में जल बहते हुए देखा है, जबकि आज की पीढ़ी जल को बोतलों में सीमित होते हुए देख रही है। हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए अभी से गंभीर प्रयास करने होंगे, ताकि उन्हें जल संकट का सामना न करना पड़े।”

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्व के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

डॉ. द्विवेदी ने माननीय प्रधानमंत्री जी एवं प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके द्वारा भेजे गए पत्र को अभी एक माह भी पूर्ण नहीं हुआ था, उससे पूर्व ही प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा उस पर संज्ञान लेते हुए संबंधित मंत्रालय को अग्रेषित कर दिया गया तथा इसकी सूचना भी उन्हें आधिकारिक पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराई गई। यह तथ्य दर्शाता है कि देश का सर्वोच्च जनसेवा संस्थान प्रधानमंत्री कार्यालय नागरिकों के सुझावों, जनहित के विषयों एवं रचनात्मक विचारों को कितनी गंभीरता और संवेदनशीलता से ग्रहण करता है। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक सहभागिता के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होता है।

अंत में डॉ. द्विवेदी ने सभी नागरिकों से आह्वान करते हुए कहा—

“आइए, हम सभी मिलकर जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं — हर बूंद बचाएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं। आज ही संकल्प लें कि हम जल बचाएंगे, वर्षा जल का संचयन करेंगे, अधिकाधिक वृक्ष लगाएंगे तथा आने वाली पीढ़ियों को जल का महत्व अवश्य बताएंगे।”

— डॉ. ए.के. द्विवेदी
वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक, शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता
इंदौर (मध्य प्रदेश

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