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सस्पेंड आईएएस अधिकारी मामले में लगाई जनहित याचिका, एसआईटी से जांच कराने की मांग
इंदौर. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के समक्ष एक जनहित याचिका दायर करके मांग की गई है कि इंदौर पुलिस द्वारा गिरफ्तार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी संतोष वर्मा के मामले का अनुसंधान न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर कराया जाये.
इंदौर के एक अधिवक्ता के माध्यम से दायर इस याचिका की सुनवाई आगामी सोमवार को उच्च न्यायालय की युगलपीठ द्वारा किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि श्री वर्मा की गिरफ़्तारी के बाद कई हाईप्रोफाइल प्रशासनिक अधिकारी तथा न्यायालय में कार्यरत आधिकारी, कर्मचारी भी संदेह के घेरे में दिखाई दे रहे है। चार बिंदुओं पर याचिका में सवाल उठाते हुए अन्य भी कई आरोप लगाए गए है. आधिकारिक जानकारी के अनुसार बीती 11 जुलाई को श्री वर्मा को इंदौर पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किया गया है।
गिरफ्तार करने के बाद यहां कि महात्मा गांधी रोड़ थाना पुलिस श्री वर्मा से रिमांड लेकर पूछताछ कर रही है, इंदौर जिले के सत्र न्यायलय के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी बृजेन्द्र सिंह रावत की बीती 26 जून को की गई शिकायत पर पुलिस ने 27 जून को अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
जाली न्यायालयीन आदेश तैयार करने समेत अन्य आरोपो में पुलिस ने श्री वर्मा को गिरफ्तार किया है. उधर श्री वर्मा की पुलिस रिमांड अवधि कल 17 जुलाई को पूरी होने के चलते उन्हें यहां निचली अदालत (ट्रॉयल कोर्ट) में पेश किया जा सकता है. मामले की जांच कर रही पुलिस इस मामले में श्री वर्मा के अलावा अब तक आधिकारिक रूप से इंदौर जिले के लोक अभियोजन अधिकारी अकरम शेख को भी तलब कर उनसे 15 घंटे से ज्यादा समय की पूछताछ कर चुकी है. मामले में पुलिस की जांच जारी है.


