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“महिलाओं की सुरक्षा के लिए भारतीय सिनेमा में सम्मान बेहद ज़रूरी है,” — IFFK में बोलीं शिना चोहान
IFFK में महिलाओं की कहानियों और बिना गॉडफादर के संघर्ष पर खुलकर बोलीं शिना चोहान
भारतीय सिनेमा में बिना किसी इंडस्ट्री बैकिंग के अपनी पहचान बनाने वाली अभिनेत्री शिना चोहान ने हाल ही में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरल (IFFK) में एक सशक्त और प्रभावशाली बयान दिया। उन्हें महिलाओं की कहानियों पर केंद्रित एक मास्टरक्लास के लिए पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया था।
इस दौरान शिना ने भारतीय फिल्मों में महिलाओं के प्रति सम्मान और समानता की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि सिनेमा में महिलाओं का चित्रण सीधे तौर पर समाज के व्यवहार और महिलाओं की सुरक्षा को प्रभावित करता है।
महिलाओं के ऑब्जेक्टिफिकेशन पर बात करते हुए शिना ने कहा,
“जब फिल्मों में महिलाओं के साथ भेदभाव या उन्हें वस्तु की तरह दिखाया जाता है, तो यह व्यवहार समाज में सामान्य हो जाता है और यही महिलाओं को सड़कों पर असुरक्षित बनाता है। स्क्रीन पर जो दिखाया जाता है, वही आम ज़िंदगी में दोहराया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि समाज पर सकारात्मक असर डालने के लिए महिलाओं को मज़बूत और सम्मानजनक किरदारों में दिखाया जाना बेहद ज़रूरी है।
शिना ने सिनेमा में फीमेल गेज़ (महिला दृष्टिकोण) की अहमियत पर भी बात की, खासकर ऐसे दौर में जब पुरुष-प्रधान कहानियाँ बड़े स्तर पर सफल हो रही हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा,
“अगर भारत में महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है, तो उसका समाधान महिलाओं के प्रति सम्मान है। हमें ज़्यादा महिला लेखक, निर्देशक, सिनेमैटोग्राफर और निर्माता चाहिए। यह बदलाव हो रहा है और हमें एक-दूसरे का साथ देते हुए इसे आगे बढ़ाना होगा।”
इस चर्चा के दौरान शिना ने इंडस्ट्री में एक आउटसाइडर के रूप में अपने सफ़र के बारे में भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा,
“बिना किसी गॉडफादर के इस इंडस्ट्री में टिके रहना बेहद मुश्किल है। लेकिन मैंने थिएटर में पाँच साल की ट्रेनिंग ली, जिसने मुझे किरदारों को रिसर्च करने, उन्हें समझने और हर रोल को निर्देशक के लिए एक खाली पन्ने की तरह लेने की सीख दी।”
शिना चोहान को फ़िल्म ‘संत तुकाराम’ में अवली जीजाबाई के किरदार के लिए खूब सराहना मिली, जहाँ उन्होंने सुबोध भावे के साथ अभिनय किया और उनकी भूमिका को फिल्म की आत्मा बताया गया। उनकी नेटफ्लिक्स फिल्म ‘Ant Story’ का प्रीमियर भी IFFK में हुआ। इसके अलावा उन्होंने साउथ इंडियन सिनेमा में मम्मूट्टी के साथ अपना डेब्यू किया।
कई स्वतंत्र फिल्मों और आने वाली एक पैन-इंडिया रिलीज़ के साथ, शिना चोहान आज न सिर्फ़ एक दमदार कलाकार हैं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण और अर्थपूर्ण सिनेमा की मज़बूत आवाज़ भी बन चुकी हैं।


