शीना चौहान ने मुंबई इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल में इंडस्ट्री की अहम बातचीत का नेतृत्व किया

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) 2026 में अभिनेत्री शीना चौहान ने कहानी कहने की कला, सिनेमा के भविष्य और सांस्कृतिक संवाद से जुड़ी दो महत्वपूर्ण चर्चाओं का संचालन कर अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई। फेस्टिवल के दौरान शीना ने महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री अशिष शेलार से भी मुलाकात की। इस अवसर पर दुनिया भर से फिल्म निर्माता, कलाकार, फेस्टिवल निदेशक और सांस्कृतिक प्रतिनिधि मुंबई में एकत्रित हुए थे।

16 जून को शीना ने “Are Micro-Dramas the Fast Fashion of Cinema?” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन किया। इस चर्चा में निर्माता समीर मोदी, अभिनेत्री अर्चना कवी, अभिनेता उज्ज्वल चोपड़ा और माइक्रो-ड्रामा शैली के लिए प्रसिद्ध जर्मन निर्देशक राफेल शामिल थे।
चर्चा का केंद्र बिंदु था शॉर्ट-फॉर्म स्टोरीटेलिंग का बढ़ता प्रभाव और कम होते दर्शकीय ध्यान के दौर में कलात्मक गहराई को बनाए रखने की चुनौती। अपने अभिनय अनुभवों का हवाला देते हुए शीना ने कहा कि भले ही कहानी कहने के माध्यम और प्रारूप बदल जाएं, लेकिन मजबूत पटकथा, प्रभावशाली किरदार और भावनात्मक सच्चाई हमेशा सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे।

18 जून को उन्होंने “Many Forms, One Vision: Celebrating Diversity in Film Festivals” शीर्षक से आयोजित राउंडटेबल चर्चा का नेतृत्व किया। इस विशेष सत्र में वरिष्ठ क्यूरेटर और फेस्टिवल निदेशक आनंद वरदराज, दीपक भेश्रा, प्रेमेंद्र मजूमदार, नीलोत्पल मजूमदार, शेख खाजा वाली, पैट्रिशिया सांचेज मोरा तथा राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम शामिल हुए।

46 देशों की भागीदारी वाले MIFF के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए शीना ने कहा कि फिल्म फेस्टिवल विभिन्न संस्कृतियों और विचारों को जोड़ने का एक अनूठा माध्यम हैं।

चर्चा के दौरान शीना ने कहा, “जब हम फिल्म फेस्टिवलों में विविधता का उत्सव मनाते हैं, तब हम कहानी कहने की उस शक्ति का सम्मान करते हैं जो संस्कृतियों, भाषाओं और दृष्टिकोणों की सीमाओं को पार कर लोगों को जोड़ती है। कहानियां भले अलग हों, लेकिन उनका उद्देश्य एक ही होता है—दुनिया को देखने का हमारा नजरिया व्यापक बनाना। फिल्म फेस्टिवल हमें दुनिया को कई अलग-अलग नजरियों से देखने का अवसर देते हैं, ताकि हमारी सोच का दायरा विस्तृत हो सके।”

अपने सफर को याद करते हुए शीना ने बताया कि उनकी फिल्म फेस्टिवल यात्रा की शुरुआत शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के नामांकन से हुई थी। इसके बाद उन्होंने कई भाषाओं की स्वतंत्र फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाईं और उनका काम दुनिया भर के विभिन्न फिल्म महोत्सवों तक पहुंचा। उन्होंने बुसान, दुबई, शंघाई और कोलकाता जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवलों में अपनी फिल्मों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया।

चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि स्वतंत्र और विविध विषयों पर आधारित फिल्मों को आज भी पर्याप्त दृश्यता और वितरण हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सभी प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति जताई कि फिल्म फेस्टिवल नई प्रतिभाओं को मंच देने, सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट सिनेमा का सम्मान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दोनों सत्रों के दौरान शीना ने इस बात पर जोर दिया कि सिनेमा का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि प्रेरित करना, दृष्टिकोणों का विस्तार करना और सांस्कृतिक संवाद को मजबूत बनाना भी है। अपने विचारों और संचालन के माध्यम से शीना चौहान ने एक बार फिर यह साबित किया कि कहानी कहने की कला में लोगों को सीमाओं और संस्कृतियों से परे जोड़ने की अद्भुत शक्ति होती है।

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