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शिवपुराण पापमुक्ति की कथा, विवेक को जागृत बनाएगी: पं. दुबे
इंदौर. थोड़ी सी सफलता मिलते ही हमें अहंकार घेर लेता है. चिंतन करें कि भगवान भी कर्ता हैं, वे सृष्टि का पालन-पोषण और निर्धारण करने जैसे महत्वपूर्ण काम करते हैं, उन्हें तो कभी अहंकार नहीं होता, लेकिन हम छोटी सी उपलब्धि के श्रेय का सेहरा अपने माथे पर बांधने में देर नहीं करते. यह अहंकार ही हमारे पतन का मुख्य कारण बन जाता है. शिव पुराण पाप से निवृत्त होने की कथा है। जिस दिन हम पापमुक्त हो जाएंगे, हमारा विवेक भी जागृत हो उठेगा। सत्संग और भगवान की कथा हमारे विवेक को सही दिशा में ले जाते हैं.
ये प्रेरक विचार हैं प्रख्यात भागवताचार्य पं. सुखेन्द्र कुमार दुबे के, जो उन्होंने हवा बंगला मेन रोड़ स्थित शिर्डी धाम सांई मंदिर परिसर में श्रावण मास के उपलक्ष्य में आयोजित शिवपुराण कथा महोत्सव में नारद मोह एवं सती चरित्र प्रसंग पर व्यक्त किये. प्रारंभ में शिर्डीधाम सांई मंदिर के ओमप्रकाश अग्रवाल, हरि अग्रवाल, श्रीमती कमला अग्रवाल आदि ने पं. दुबे का स्वागत कर ग्रंथ का पूजन किया.
उत्सव के दौरान 5 अगस्त को पार्वती जन्म एवं शिव विवाहोत्सव महिमा बताएंगे. इस नौ दिवसीय शिव पुराण कथा में प्रतिदिन पूजन के बाद आरती एवं कथा के तुरंत बाद शिव महाआरती होगी जिसमें प्रतिदिन साधु-संत एवं अन्य भक्तजन भी शामिल होंगे.
मोह हमारे विकारों को जन्म देता है
विद्वान वक्ता ने कहा कि मोह हमारे विकारों को जन्म देता है. कर्तापन का अहंकार हमेशा हमारे आसपास रहता है। हमने शरीर को आत्मा मान लिया है. हमारे सारे कर्म सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण से पूरे होते हैं. मोह के वशीभूत होकर ही हम तमोगुण की ओर प्रवृत्त होते हैं. प्रशंसा से अभिमान और अभिमान से पतन निश्चित होता है लेकिन जिन्होंने अपने मन और बुद्धि के बीच समन्वय बना लिया, वे अवश्य इससे बच जाते हैं.
जब तक हमारी बुद्धि निर्मल और पवित्र नहीं होगी तब तक तमोगुण और रजोगुण हमें घेरे रहेेंगे। शिव पुराण की कथा हमें अपने कर्मो के लिए सही दिशा की ओर ले जाने वाली है, यह हमारे विवेक की जागृति का मार्ग भी बताती है.


