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जो स्टार्टअप रिस्क लेने को तैयार नहीं है वह कभी बड़ा नहीं बन सकता
आई बिलीव – बेलीविंग इन माय बीलिफ्स हुआ आयोजित
इंदौर. आउटकम डिलिवर्ड ने स्टार्टअप्स और महत्वाकांक्षी छात्रों के लिए आज आई बिलीव – बीलीविंग इन माय बीलिफ्स नामक एक इवेंट आयोजित किया.
इस इवेंट का उद्देश्य स्टार्टअप्स और स्टूडेंट्स को एक मंच प्रदान करना था. यह इवेंट एनआईपीसीडी इंस्टिट्यूट में स्टूडेंट्स और स्टार्टअप्स की जरूरतों के मद्देनजऱ किया गया था. जहां वह अपनी स्टार्टअप जर्नी शेयर कर सके व एक दुसरे को मेंटरिंग प्रदान कर सके. ताकि स्टार्टअप को और आगे ले जाये जा सकेय
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईआईएम् प्रो. डी.एल. सुन्दर मौजूद थे. इसके अलावा वहां पर प्रेस्टीज इंस्पायर सेंटर के डॉ. पुनीत द्विवेदी, लूटेल के फाउंडर यशवंत सुथर, एम्वाइव की फाउंडर कृति लुनावत, सोशल लड्डू के फाउंडर प्रतीक श्रीवास, विनिंग स्त्री की फाउंडर मेघा पाटनी, रिसर्च एन्ड इंजीनियरिंग ऑफ़ फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी के फाउंडर प्रथमनेश धारकर तथा आउटकम्स डिलिवर्ड की को – फाउंडर मूमल सिसोदिया भी उवस्थित थे.
आईआईएम् प्रो. डी.एल. सुन्दर ने स्टार्टअप्स को शुरू करने के तरीकों व रिस्क लेने की क्षमता के बारे में बताया कि जो स्टार्टअप हर दिन रिस्क लेने के लिए तैयार नहीं है वह कभी भी बड़ा स्टार्टअप नहीं बन सकता. आपको हर दिन आने वाले चैलेंज के लिए तैयार रहना पड़ेगा. यदि आप अपना स्टार्टअप छोटे से स्टार्ट करते है तो लॉस होने के चान्सेस काम होंगे व धीरे धीरे आप उसे आगे भी ले जा पाएंगे.
विजन होना जरूरी
आउटकम्स डिलिवर्ड की को-फाउंडर मूमल सिसोदिया ने लर्निंग और शेयरिंग की इम्पोर्टेंस के बारे में बताया. उनका मानना है की लोगों का सीखना और आपस में बढऩा जरुरी हैं. प्रेस्टीज इंस्पायर सेंटर के डॉ. पुनीत द्विवेदी ने बताया कि स्टार्टअप हमारे डीएनए में भगवन राम के समय से ही चला आ रहा है ति किस तरह से उन्होंने पुल का निर्माण करवा कर लंका पर जाने का रास्ता बनवाया था.
लूटेल के फाउंडर यशवंत सुथर ने बताया कि किसी भी बिजऩेस को शुरू करने से पहले विजऩ होना जरुरी है. उनकी कंपनी लुटेल टोटल जैसे टॉयलेट्स प्रोवाइड करती है जो हाइजीन को ध्यान रखते हुए बनाई गई है. विनिंग स्त्री की फाउंडर मेघा पाटनी ने बताया की वह पहले कॉर्पोरेट जॉब कर चुकी हैं। उन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए अपना स्टार्टअप शुरू किया.


