- इंदौर पिंक पैंथर्स मध्य प्रदेश लीग (MPL) T20-2026 में चैंपियन बनने के लक्ष्य के साथ उतरने को तैयार; टीम ने अपनी सोच और तैयारियों का रोडमैप साझा किया
- द क्रश कॉफी पर अब होगा खास संडे ब्रन्च
- जल, जीवन और जमीन के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण आवश्यक : डॉ. ए.के. द्विवेदी
- Triptii Dimri Dives into Comedy with Maa Behen! A Full-Blown Comedy Caper Coming Up Next?
- The Rise of Ram Charan as Indian Cinema’s Complete Hero
फरार इनामी भूमाफिया गिरफ्तार, दाढ़ी बढ़ाकर काट रहा था फरारी
एसआईटी ने पकड़ा
इंदौर. 6 महीने से फरार भू-माफिया मद्दा का भाई को आखिरकार एसआईटी ने पकड़ लिया. पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए 20 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था. फरारी के दौरान वह अलग-अलग स्थान पर दाढ़ी बढ़ाकर छिपता रहा. इस दौरान उसने काफी समय चित्तौड़गढ़ में किले के पास स्थिति एक धर्मशाला में बिताया. आरोपी ने मजदूर गृह निर्माण संस्था के उपाध्यक्ष के पद पर रहकर फर्जीवाड़ा किया था.
पुलिस के अनुसार आरोपी कमलेश कुमार पिता स्व. आंनदीलाल जैन निवासी गिरधर नगर न्यू महेश नगर है. मुखबिर ने सूचना दी थी कि वह रंगवासा इलाके में एक घर में छिपा है जिसके बाद टीम ने उसे घेरांबदी कर दबोच लिया. वह मजदूर पंचायत गृह निर्माण संस्था से जुड़ा था. एसआईटी की टीम के मुताबिक आरोपी करीब 6 महीने से फरार चल रहा था. उस पर 20 हजार रुपए इनाम घोषित था.
आरोपी चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) भाग गया था. यहां पर उसने किले के पास स्थित जैन धर्मशाला में छिपकर फरारी काटी. कुछ समय बाद उसने अपना ठिकाना बदल दिया था. इसके बाद वह अलग अलग कई शहरों में दाढ़ी बढ़ाकर घूमता रहा.फरारी के दौरान कमलेश ने अपनी दाढ़ी बढ़ाकर पहचान छिपाई थी. जिसके चलते पुलिस को तलाशने में बहुत परेशानी आई।
कमलेश को दबोचने के लिए अलग-अलग टीमों ने राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, यूपी और हरियाणा में भी दबिश दी थी। अभी वह रंगवासा में सौरभ जैन के किराये के मकान में छिपा हुआ था. पुलिस ने घर में इंटरनेट वाला बनकर चेक किया और फिर उसके बाद पकडड़ा उसके पास से टीम को 5 मोबाइल और 8 सिम मिली है.’
आरोपी कमलेश से दीपक मद्दा उर्फ दिलीप सिसोदिया के बारे में टीम पूछताछ कर रही है. मद्दा कमलेश का बड़ा भाई है. मद्दा ने उसे 2005-06 में मजदूर पंचायत गृह निर्माण सहकारी संस्था में उपाध्यक्ष बनाया था. इतना ही नहीं उसने संस्था का बैंक खाता नंदा नगर सहकारी साख मर्यादित बैंक में खुलवाकर उसे अकाउंट होल्डर बनाया था। उस दौरान खाते से लाखों का वित्तीय लेने-देन किया गया था. संस्था के प्लाट धारकों की जमीन को फर्जी तरीके से सौदा कर दूसरे के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई थी. इस कारण सैकड़ों प्लाट धारक प्लाट के लिए भटकने को मजबूर हो गए.


