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किताब में 200 और बोलचाल में तीन तरह का होता है गठिया
दिल्ली से आए ख्यात ह्यूमेटोलॉजिस्ट ने दूर की गठिया से जुडी भ्रांतियां
इंदौर। अगर मेडिकल किताबों की बात की जाए तो गठिया 200 प्रकार का होता है पर बोलचाल की भाषा में हम सिर्फ तीन तरह के गठिया को जानते हैं, हरी झंडी का गठिया, लाल झंडी का गठिया और सोराइटिक ऑर्थराइटिस। इन तीनों के लक्षण और उपचार भिन्न है। बस जरुरत है सही समय पर लक्षणों को पहचान कर विशेषज्ञ से परामर्श लेने की।
गठिया के साथ जीवन विषय पर चर्चा करते हुए दिल्ली से ख्यात ह्यूमेटोलॉजिस्ट डॉ प्रो ए.एन.मालवीय ने गठिया के यह प्रकार बताए। वर्ल्ड ऑर्थराइटिस डे के उपलक्ष्य में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और लायंस क्लब द्वारा आनंद मोहन माथुर सभागार में पेशेंट्स अवेर्नेस कैम्पेन के तहत कराए गए विशेष आयोजन में वे गठिया के मरीजों और उनके परिजनों से मुखातिब थे।
रोचक अंदाज में उन्होंने कहा कि जिस तरह मशीन के पुर्जो का तेल-पानी समय-समय पर करते रहने से मशीन सालों-साल चलती रहती है वैसी ही स्थिति हमारे शरीर की भी है। यदि हम अपने शरीर के सभी पुर्जों का ध्यान रखेंगे और उनका संभलकर इस्तेमाल करेंगे तो हम भी आजीवन रोग मुक्त रह सकते हैं।
यह है तीनों तरह के गठिया के लक्षण

डॉ मालवीय ने बताया कि उकडू बैठना, पालती लगाकर बैठना, ज्यादा खड़े रहना और हाथों की अँगुलियों का गलत इस्तेमाल करना यह कुछ प्रमुख कारण है ऑस्टियो ऑर्थराइटिस या हरी झंडी के गठिया के। इसमें दवाई की जरुरत नहीं होती बस मरीज को एक्टिव रहे तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। यही कारण है कि इस हरी झंडी का गठिया कहते हैं, ये आपको चलते रहने का संकेत देता है। जोड़ों के दर्द की शिकायत लेकर आने वाले 90 प्रतिशत मरीजों को ऑस्टियो ऑर्थराइटिस ही होता है। इसमें आमतौर पर मरीज कमर, कंधे, हाथ तथा पैरों के जोड़ों में दर्द की शिकायत करता है।
हर रोज महिला और पुरुष क्रमशः हफ्ते में 5 से 6 दिन रोज 5 से 6 किलोमीटर चलकर इससे बच सकते हैं। लाल झंडी के गठिया की शिकायत 45 से 55 वर्ष की उम्र में होती है। इसमें कंधे और कलाई में असहनीय दर्द होता है। सोकर उठने के तुरंत बाद शरीर में जकड़न महसूस होती है। ये लक्षण दिखाई देने पर 6 हफ्ते से लेकर 3 महीने के बीच अनिवार्य रूप से ह्यूमेटोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। समय रहते सही उपचार मिलने पर रोग से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। तीसरा प्रकार है सोराइटिक ऑथोराइटिस। इसका प्रमुख लक्षण है पैर की किसी एक अंगुली का लाल होकर सूज जाना। यह एक अनुवांशिक बीमारी है। डॉ मालवीय ने साफ शब्दों में कहा कि सात्विक आहार लेकर और अपना वजन संतुलित रख कर ही गठिया से बचा जा सकता है।
पुरुषों में कमर और महिलाओं में कलाई से होती है गठिया की शुरुआत

सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए ले. मेजर जनरल डॉ वेद चतुर्वेदी ने अपने कार्यकाल में 10 हजार से अधिक स्पाइनल ऑर्थराइटिस के मरीज देखे हैं। उन्होंने कहा कि जैसे महिलाओं में ऑर्थराइटिस की शुरुआत कलाई से होती है वैसे ही पुरुष कमर के विभिन्न हिस्सों में दर्द की शिकायत लेकर हमारे पास आते हैं, तब उन्हें पता भी नहीं होता कि वे रीढ़ की हड्डी के गठिया से पीड़ित है। इसमें व्यक्ति को सुबह बेहद दर्द और जकड़न का एहसास होता है जो रोजमर्रा की गतिविधिया शुरू होने के साथ ही कम होता जाता है।
परहेज नहीं संतुलित भोजन है जरुरी
आमतौर पर गठिया के साथ कई भोजन से जुडी भ्रांतियां जुडी है। इस बारे में डॉ बीडी पांडेय ने कहा कि गठिया में परहेज नहीं बल्कि संतुलित भोजन जरुरी है ताकि शरीर का वजन भी कम रहे और सभी पोषक तत्व भी सही मात्रा में मिलते रहें। इन बातों को याद रखें
– दूध, दही, संतरा, निम्बू और मौसम्बी से मिलने वाले विटामिन गठिया के दर्द को कम करते हैं।
– टमाटर और बैगन से मिलने वाला आइरन और विटामिन डी गठिया में जरुरी है।
– राजमा और सोयाबीन जैसा प्रोटीन का अच्छा स्त्रोत गठिया के मरीजों के लिए दूसरा कोई नहीं है।
– बिना तड़के और क्रीम वाली दालें गठिया रोगियों के लिए पोषण का अच्छा स्त्रोत है।
– सूखे मेवे लेना अच्छा है बस इनकी मात्रा कम होनी चाहिए।
– हल्दी और लहसुन युक्त खाद्य पदार्थ गठिया के दर्द को कम करते हैं।
– लाल, पीली और हरी सब्जियां जरूर खाएं।
– मैदे के बजाए होल ग्रेन आटे का इस्तेमाल करें।
– नॉन वेजीटेरियंस के लिए मछली अच्छी डाइट है।
– रोज गुनगुने पानी से नहाए, 40 मिनिट कसरत करें, 8 घंटे की नींद लें और अपने किसी शौक के जरिए खुद को रिफ्रेश और रिलेक्स करते रहिए। यह गठिया से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है।
पहले से बेहतर हुआ इलाज
आयोजक ह्यूमेटोलॉजिस्ट डॉ सौरभ मालवीय ने कहा कि गठिया एक क्रोनिक डिसीस है यानी ब्लड प्रेशर और शुगर की तरह इसकी दवाइयां भी जीवन भर खाना जरुरी होता है। गठिया का इलाज अब पहले से बेहतर हो गया है। पहले जहाँ मरीज को सिर्फ दर्द निवारक दवाएं दी जाती थी वही अब बायोलॉजिकल ट्रीटमेंट ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है।
इस मौके पर डॉ भारत रावत ने लाइफ बियोंड मेडिसिन विषय पर प्रेरक उद्बोधन दिया। डॉ शैलेश गुप्ता ने बताया कि अब एडवांस्ड गठिया के कारण खराब हुए हर जोड़ का प्रत्यारोपण संभव है इसलिए मरीज को तकलीफ उठाने के बजाए इस बारे में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
साइकेट्रिस्ट डॉ रमन ने बताया कि गठिया के मरीजों में अवसाद की आशंका आम लोगों की तुलना में 2.5% अधिक होती है, वही दुनिया भर में होने वाले 8 लाख सुसाइड में से 17% भारत में होते हैं इसलिए गठिया रोगियों को अवसाद से बचते हुए जीवन में नई संभावनाएं तलाशनी चाहिए। आयोजन में आईएमए प्रमुख डॉ अनिल विजयवर्गीय और लायंस क्लब के पूर्व गवर्नर परविंदर सिंह भाटिया भी उपस्थित थे।


