- This independence day, india is celebrating the heroes of operation safed sagar
- डी बीयर्स साइटहोल्डर अंकित जेम्स ने ‘Eyora Jewels’ के साथ रिटेल सेक्टर में किया प्रवेश
- Back to Class! Prime Video Announces Seasons 2 and 3 of Fan-Favorite Adarsh Baal Vidyalaya
- इस स्वतंत्रता दिवस पर केनस्टार लेकर आया ‘नो फोन ऑवर 2.0’, पिछले साल से 3 गुना अधिक भागीदारी का लक्ष्य
- ऑपरेशन सफेद सागर की सफलता के बीच दीया मिर्ज़ा ने बताया, उनके लिए देशभक्ति के क्या मायने हैं
खराब जीवनशैली का असर, 50 की उम्र की बीमारियां अब 18 में ही दस्तक देने लगीं
इंटरनेशनल कांफ्रेंस वर्ल्डकॉन 2026 के दूसरे दिन हुई 22 सर्जरी
इंदौर। पहले तकनीक के अभाव के कारण सर्जरी के बाद पाईल्स के दोबारा होने की आशंका 30% तक होती थी पर अब स्टेपलर से लेकर लेजर तक इतनी आधुनिक तकनीकें आ गई है कि सिर्फ 2% केसेस में देखभाल के अभाव में दोबारा पाईल्स होने की आशंका होती है। हालांकि बदलती हुई जीवनशैली के कारण पहले जो बीमारियां 50 की उम्र में होती थी वह 18 वर्ष के बाद ही होने लगी है। यह बात इंटरनेशनल कांफ्रेंस वर्ल्डकॉन 2026 के दूसरे दिन ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ ईशान चौरसिया ने बताई। इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कोलोप्रॉक्टोलॉजी द्वारा कराई जा रही इस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि ठीक होने के बाद हरी-पत्तेदार सब्जियां, तीखा और ऐसी कोई भी चीज नहीं खानी चाहिए जो कब्जियत करें, अन्यथा यह समस्या दोबारा हो सकती है।
ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ मयंक गुप्ता ने बताया कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन 3 बजे तक लाइव सर्जरी के सेशन हुए वहीं शाम को 10 मिनट के लाइव वीडियो डेमो के माध्यम से सर्जरी के विभिन्न तकनीकों को बताया गया। सर्जन डॉ अक्षय शर्मा ने बताया कि एमिनेंस हॉस्पिटल में आज 22 सर्जरियां की गई। ये सारे मरीज अगले दिन डिस्चार्ज भी कर दिए जाएंगे। स्टूडेंट्स ने इन सर्जरी के दौरान टिश्यू हैंडलिंग, लेजर के सही उपयोग जैसी कई टेक्निकल चीजे सीखी। डॉ सुदेश शारडा ने बताया आजकल हम इस कॉन्फ्रेंस को हर साल एक नए और आधुनिक तरीके से आयोजित करते हैं और इस वर्ष इसका पूरा फोकस वीडियो-आधारित ट्रेनिंग पर रखा गया है। इसमें विभिन्न जटिलताओं को विस्तार से समझाया जाएगा । डॉ अचल अग्रवाल ने बताया पाइल्स, फिशर, फिस्टुला, पाइलोनाइडल साइनस और एब्सेस (फोड़ा)। खासतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले एब्सेस के मैनेजमेंट पर भी चर्चा होगी, ताकि इलाज ऐसा हो जिससे न मां पर असर पड़े और न ही बच्चे पर, और मरीज को कम से कम दर्द का सामना करना पड़े। कांफ्रेंस में डॉ महक भंडारी, डॉ देवेंद्र चौहान, डॉ प्रियंक चेलावत और डॉ योगेश गुप्ता ने विशेष सहयोग दिया।
बिना झिझक विशेषज्ञ को दिखाएं
वरिष्ठ सर्जन डॉ राकेश शिवहरे ने बताया किसी भी लक्षण जैसे दर्द, मस्से महसूस होना, मवाद आना, अंडरवियर में गीलापन, खुजली या खासकर ब्लीडिंग को नजरअंदाज न किया जाए। ब्लीडिंग सिर्फ पाइल्स का लक्षण नहीं है, यह किसी गंभीर बीमारी जैसे कैंसर का संकेत भी हो सकता है। इसलिए बिना झिझक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। अगर शुरुआती अवस्था में बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवाइयों से ही इलाज संभव है और सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन वास्तविकता यह है कि लगभग 70–80% मरीज इलाज के लिए देर से आते हैं, जब बीमारी एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी होती है।
जीवनशैली के कारण पाइल्स, फिशर एवं फिस्टुला बढ़ रही
डॉ. विपुल गुर्जर, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, जनरल सर्जरी, सुमनदीप गुजरात ने बताया कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली के कारण पाइल्स, फिशर एवं फिस्टुला जैसी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शारीरिक एक्टिविटी में कमी , लंबे समय तक बैठने वाले जॉब, कम पानी पीना और असंतुलित खान-पान इन समस्याओं के प्रमुख कारण हैं। डॉ. गुर्जर के अनुसार केवल सर्जरी इसका स्थायी समाधान नहीं है, बल्कि जीवनशैली में सुधार जैसे नियमित व्यायाम, पर्याप्त पानी का सेवन, हाई-फाइबर एवं संतुलित आहार अपनाना अत्यंत आवश्यक है। ऐसा नहीं करने पर बीमारी के दोबारा होने की संभावना बनी रहती है। उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि लोग समय रहते इन समस्याओं से बचाव कर सकें।
महिलाएं इन लक्षणों को छुपाती हैं
यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की वरिष्ठ मिनिमल एक्सेस रोबोटिक बैरियाट्रिक एवं जीआई सर्जन डॉ. कोना लक्ष्मी ने कहा महिलाओं में पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसी एनोरेक्टल समस्याओं को लेकर आज भी झिझक और संकोच बना हुआ है, जिसके कारण वे समय पर डॉक्टर से परामर्श नहीं ले पातीं। अक्सर महिलाएं इन लक्षणों को छुपाती रहती हैं या घरेलू उपायों एवं बिना सलाह के दवाइयों का सहारा लेती हैं, जिससे बीमारी गंभीर अवस्था तक पहुंच जाती है। कई मामलों में लंबे समय तक खून की कमी जैसी जटिलताएं भी देखने को मिलती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कम फाइबर वाला आहार, बैठकर रहने वाली जीवनशैली, गर्भावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक बदलाव और बार-बार जोर लगाकर मल त्याग करना इन समस्याओं के प्रमुख कारण हैं। महिलाओं को चाहिए कि वे कब्ज, मल त्याग में दर्द, खून आना या किसी भी प्रकार की असामान्यता को नजरअंदाज न करें और तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें, क्योंकि हर ब्लीडिंग पाइल्स नहीं होती। यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। आज के समय में महिला सर्जन्स भी उपलब्ध हैं, इसलिए संकोच छोड़कर समय पर जांच और उपचार कराना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार, पर्याप्त फाइबर, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
कुछ ध्यान देने वाली बातें
- समय पर डॉक्टर से सलाह लें, समस्या को नजरअंदाज न करें।
- बिना सलाह के कोई भी दवा या घरेलू उपचार लंबे समय तक न करें।
- कब्ज से बचाव के लिए पर्याप्त पानी (8–10 गिलास) और फाइबर युक्त आहार लें।
- शौच के दौरान ज्यादा जोर (straining) न लगाएं और देर तक टॉयलेट में न बैठें।
- रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या हल्का व्यायाम जरूर करें।
- लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचें, बीच-बीच में उठकर चलें।
- साफ-सफाई (हाइजीन) का विशेष ध्यान रखें, खासकर एनल एरिया की।
- दर्द, खून आना या सूजन जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं।
- सर्जरी के बाद डॉक्टर द्वारा बताए गए लाइफस्टाइल बदलाव को जरूर अपनाएं, ताकि बीमारी दोबारा न हो।


