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ओरल केयर को फिटनेस की तरह ‘रीसेट’ क्यों नहीं मिलता
प्रमुख स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. सोनिया दत्ता ने बताया कि कैसे हम सेहत के अन्य कामों की तुलना में दांतों की सफाई को कम महत्व देते हैं और इसमें आयुर्वेद की भूमिका कितनी ज़रूरी है
नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026: अक्सर लोग जिम ज्वाइन करके या खान-पान बदलकर अपनी फिटनेस पर तो दोबारा ध्यान देते हैं, लेकिन दांतों की देखभाल (ओरल केयर) को लेकर वैसी गंभीरता नहीं दिखाते। डॉ सोनिया दत्ता, एमडीएस, पीएचडी, प्रोफेसर, पब्लिक हेल्थ डेन्टिस्ट्री, इस अंतर की ओर इशारा करती हैं। उनके अनुसार, बचपन में सीखी गई ब्रश करने की आदतें सालों-साल चलती रहती हैं, जबकि समय के साथ हमारी ज़रूरतें बदल जाती हैं। साथ ही उन्होंने रोज़ाना की ओरल हाइजीन को बेहतर बनाने के लिए डाबर रेड पेस्ट जैसे भरोसेमंद समाधानों के इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया हैं, जो आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का एक बेहतरीन मेल है।
व्यक्तिगत स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में असंतुलन – जब शारीरिक फिटनेस की बात आती है, तो अधिकांश लोग लापरवाही के बाद स्वस्थ आदतों को अपनाने के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। हालांकि, ओरल हेल्थ (दांतों और मसूड़ों का स्वास्थ्य)—जो दुनिया भर में सबसे आम समस्याओं में से एक है—अक्सर पुरानी आदतों के भरोसे ही छोड़ दी जाती है। यह लापरवाही न केवल हमारे मुंह, बल्कि हमारे समग्र स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। फिर भी, यह हमें अपनी आदतों पर ‘दोबारा विचार’ करने के लिए प्रेरित नहीं करती, जैसा कि अक्सर फिटनेस के मामले में होता है।
ओरल केयर को अक्सर हल्के में क्यों लिया जाता है? – “फिटनेस या वजन में होने वाले बदलावों के विपरीत, दांतों की शुरुआती समस्याएं हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देतीं। दांतों में गंदगी का जमा होना (प्लाक), इनेमल का घिसना और मसूड़ों की शुरुआती सूजन अक्सर बिना किसी दर्द के बढ़ती रहती है। इस कारण से, यह मान लेना आसान हो जाता है कि हमारी वर्तमान दिनचर्या ‘काफी अच्छी’ है। हम इस पर दोबारा विचार नहीं करते कि हम कैसे ब्रश कर रहे हैं, कितनी देर कर रहे हैं, या किन उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं। समय के साथ, यही लापरवाही कैविटी, मसूड़ों की बीमारी और झनझनाहट (सेंसिटिविटी) के जोखिम को बढ़ा सकती है, यहाँ तक कि उन लोगों में भी जो अपनी सेहत के प्रति काफी जागरूक रहते हैं।”
आयुर्वेदिक लाभ: परंपरा और विज्ञान का संगम – इन जोखिमों से निपटने के लिए, डॉ. दत्ता एक निरंतर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण पर ज़ोर देती हैं। आयुर्वेद लौंग और शुंठी (सोंठ) जैसे तत्वों के माध्यम से समय-सिद्ध समाधान प्रदान करता है, जो अपने एंटी-बैक्टीरियल और सूजन कम करने वाले गुणों के लिए जाने जाते हैं।
डाबर रेड पेस्ट आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर इस कमी को दूर करता है। रोज़ाना इस्तेमाल के लिए यह एक विश्वसनीय समाधान है जिसे ‘इंडियन डेंटल एसोसिएशन’ ने भी मान्यता दी है। इससे उन लोगों का भरोसा और बढ़ जाता है जो अपने दांतों की सफाई और देखभाल के तरीकों को सुधारना चाहते हैं।
ओरल केयर सुधारने के व्यावहारिक कदम
मुंह की सफाई की आदतों पर दोबारा गौर करना उतना ही असरदार हो सकता है, जितना कि फिटनेस रूटीन को नए सिरे से शुरू करना।
• दिन में दो बार ब्रश: डेंटिस्ट दिन में दो बार ब्रश करने की सलाह देते हैं।
• सही तकनीक: मसूड़ों की रेखा (गम लाइन) के पास सही तरीके से ब्रश करना अच्छी सफाई के लिए बहुत ज़रूरी है।
• फ्लॉसिंग और चेक-अप: रोज़ाना फ्लॉस करने से उन जगहों की सफाई होती है जहाँ टूथब्रश नहीं पहुँच पाता। साथ ही, नियमित डेंटिस्ट चेक-अप से बीमारियों का समय पर पता चल सकता है।
निष्कर्ष: ओरल केयर को एक अनिवार्य आदत बनाएं – सेहत की अन्य प्राथमिकताओं की तरह ही ओरल हेल्थ भी लगातार ध्यान देने की हकदार है। प्राकृतिक और प्रभावी तत्वों की मदद से किए गए छोटे और स्थायी बदलाव लंबे समय तक दांतों और मसूड़ों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं।


