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करनी और वैचारिकता में अंतर तो सब व्यर्थ: जया किशोरी
इंदौर. हम घर परिवार में बेटियों को सम्मान के साथ स्थान दे रहे है या नही यह एक चिंतनीय प्रश्न खडा हो रहा है. आज के दौर में विकृति बढ रही है धर्म और आस्था के नाम पर हजारों लाखों की संख्या में एकत्रित तो हो रहे है पर क्या वास्तवितकता में मन व कर्म से नारी सम्मान हो रहा है यह देखना होगा अगर किंचित मात्र भी करनी और वैचारिकता में अंतर है तो फिर सब व्यर्थ हो जाएगा.
यह विचार बाणेश्वर कुण्ड पर आयोजित विराट श्रीमद भागवत कथा के द्वारान् स्वर कोकिला सुश्री जयाकिशोरीजी ने शनिवार को व्यक्त की. कथा में ऐसा समा भजन और बाल लिलाओं को बधा की हर कोई मोहित मुग्ध नजर आ रहा है. भजनों के साथ बाल लिलाओं की प्रस्तुति, तबला, हारमोनियम बासुरी की सुमधुर धून हर किसी को थिरकने के साथ श्रीकृष्ण भक्ति में लीन कर रही है. 15-15 मिनट की बाल लीलाओं का नाटिका के माध्यम से चित्रण इतना अदभूत था कि देखने वाले मोह में बधे रह जाते है. आयोजक संजय अंजलि शुक्ला ने बताया कि शनिवार को पूरे समय महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी,महामडलेश्वर लक्ष्मणदास महाराज, बालक दास महाराज,मप्र गृहनिर्माण मण्डल अध्यक्ष कृष्णमुरारी मोघे, विधायक रमेश मैंदोला,गोलू शुक्ला ,अभय वर्मा, अर्चना जायसवाल, दीपू यादव,दीलीप कौशल, अरविंद बागडी, सच सलूजाआदि ने व्यासपिठ का पूजन किया. शनिवार को कथा के बीच में राजवाडा के पास नन्ही बालिका के साथ हुए अशोभनीय घटना क्रम पर दो मिनट का मौन रखकर श्रृद्धांजली दी गई लाखो बदं आखों ने पल में पिंट आफॅ सायलेन्ट के माहोल में नन्ही बालीका की मृत आत्मा की शांति की प्रार्थना की ओर मोक्ष की कामना परमपिता श्रीचरणों में अर्पित की. सुश्री जयाकिशोरीजी नेकहा कि आज के दौर में सब चेहरे को चमकाना चाहते है हम अच्छा दिखे यह देखने पर जोर दिया जाता है लेकिन चेहरा नही चरित्र को ठीक करने की आवश्यकता है चरित्र ठीक रहेगा तो घर,परिवार, रिश्ते-नाते सब ठीक रहेगे वरना काल किसी को नही छोडेगा; पतन हमारे हाथ है हम चाहे तो ईश्वर की शरण में जाए या अंधकार मय जीवन की ओर बढ़े.


