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नवरात्र पर दूर करें अपने घर से अस्त-व्यस्तता
डॉ श्रद्धा सोनी
नवरात्रों का समय ऐसा होता है, जब न केवल मौसम सुहाना होने लगता है वरन् हर तरफ खुशहाली का माहौल रहता है। लोग अपने घर को साफ-सुथरा करते हैं, जिससे घर में खुशियों का आगमन होता है। नवरात्रों में जितना महत्व पूजा करने की विधि और दिशा का है, उतना ही महत्व घर के साफ-सुथरा होने और चीजों के सही जगह पर रखे होने का भी।
नवरात्रों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इस समय हम सच्चे मन से मां की आराधना करते हैं, ताकि हमारे घर में प्रेम का साम्राज्य रहे और जीवन में सुख-समृद्धि का वास हो। साफ-सुथरा घर न केवल हमारे मन को सुकून देता है वरन् मां की आराधना करते समय हमारा ध्यान उनकी ओर केंद्रित करता है।
कहा भी गया है कि साफ-सुथरे व्यवस्थित घर में ही देवी-देवताओं का वास होता है और जहां देवी-देवता वास करें, यकीनन वहां सुख-समृद्धि और खुशियों का वास होता है।
साफ-सुथरे घर में आती है समृद्धि
वास्तु शास्त्र में साफ-सुथरे व्यवस्थित घर को सुख-समृद्धि का वाहक माना गया है। किसी भी काम और गतिविधि का एक खास मकसद होता है। उसी के आधार पर जब हम उस काम को करने या वस्तु को रखने की दिशा का निर्धारण करते हैं तो हमें उसका सकारात्मक परिणाम मिलता है।
उदाहरण के लिए बेडरूम ऐसी जगह है जहां पर दिनभर की थकान के बाद आराम किया जाता है, इसलिए यदि उसका निर्माण आराम के वास्तु क्षेत्र अर्थात् दक्षिण में बनाने पर आप न केवल अच्छी नींद ले पाएंगे।
इसी तरह से कूड़ेदान का प्रयोजन घर की बेकार वस्तुओं को फेंकने का है। इस आधार पर ही उसको रखने की दिशा का निर्धारण करना ठीक रहता है।
अव्यवस्थित घर से बिखरते हैं संबंध
पिछले बीस सालों में वास्तुशास्त्र पर किए गए वैज्ञानिक रिसर्च से यह साबित हुआ है कि आपके घर में रखी गई प्रत्येक वस्तु का आपके मन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। घर में सकरात्मक उर्जा के लिए यह बेहद जरूरी है कि आप अपने घर से ना इस्तेमाल होने वाली चीजों को बाहर कर दें क्योंकि इसकी वजह से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
ऐसा भी माना गया है कि जिस घर में साफ-सफाई नहीं होती है, वहां दरिद्रता का वास होता है। महावास्तु के अनुसार अगर आपने घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा क्षेत्र में बेकार एवं अनुपयोगी सामान को बिखेर कर रखने पर आपको अपने परिवार जनों का अनादर सहना पड़ता है।
जुड़ाव की दिशा है दक्षिण-पश्चिम
वास्तुशास्त्र में दिशाओं की अलेकमी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिशा में वह शक्ति है, जो आपके परिवार में जुड़ाव एवं एकजुटता की भावना पैदा करती है। अतः यहां पर बेकार एवं अनुपयोगी सामान रखने पर पारिवारिक संबंधों में बिखराव आता है।
अगर आपके घर का दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र यानी स्टडी जोन अव्यवस्थित हो, तो फिर आपके बच्चे का पढ़ने में मन नहीं लगेगा। इसी प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा की बेतरतीब फैलावट रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम करती है, जिसकी वजह से हम और परिवार के बाकी सदस्य अकसर बीमार होते रहते हैं। दक्षिण दिशा की अव्यवस्था अनचाहे ही हमारे मन का सुकून छीन लेती है और हमारा मन हमेशा बेचैनी से भरा रहता है।
नवरात्रों में घर की सफाई का महत्व
नवरात्रों का समय बेहद पवित्र होता है इस समय मां दुर्गा की आराधना की जाती है, ऐसे में यह बेहद जरूरी हो जाता है कि घर साफ-सुथरा और व्यवस्थित हो। सच तो यह है कि साफ-सुथरे और व्यवस्थित घर में ही मां भगवती की पूजा के समय उनका सही तरीके से ध्यान लगा सकते हैं।


