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मैनेजमेंट एजुकेशन किताबी न होकर व्यवहारिक हो
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैनेजमेंट स्कूल्स् की गोल-मेज बैठक
इंदौॅर. आई.पी. एस. ऐकेडमी के प्रबंध संस्थान इस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मेनेजमेंट एण्ड रिसर्च, में एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेनेजमेंट स्कूल्स् (ऐम्स) की गोल-मेज बैठक का आयोजन किया गया. ‘फ्यूचर ऑफ मेनेजमेंट एजूकेशन इन इंडिया: चैलेन्जेस एण्ड ऑपोर्च्युनिटीजÓ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में नामी शिक्षाविदों ने आने वाले कल को देखते हुए एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की सिफारिश की है. वेस्टर्न रिजन मे पहली बार इस राउंड टेबल मीटिंग का आयोजन किया गया है.
कार्यक्रम मे स्वागत भाषण देते हुए आईबीएमआर., आईपीएस एकेडमी के निदेशक डॉ. विवेक सिंह कुशवाह ने बताया कि ऐम्स् एसोसिएशन मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं मानवीय उच्चतम न्यायालय से मान्यता प्राप्त है तथा प्रबंधन षिक्षा एवं देष के प्रंबधन संस्थानों के उन्नयन एवं उत्तरोत्तर प्रगति की दिशा में कार्य करता है। कार्यक्रम का उद्धेश्य देश में प्रबंधन शिक्षा की दिशा में नई चुनौतियों, अवसरों एवं प्रबंधन शिक्षा में नई तकनीकों के उपयोग के विषय में चर्चा करना था। ऐम्स के साथ देशभर में 740 से ज्यादा बिजनेस स्कूल जुड़े हुए हैं और इसकी सिफारिशें ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्नीकल एज्युकेशन के पास भेजी जाती है. इसके पश्चात डॉ. उपेन्दर धर, कुलपति श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय ने देश में प्रबंध शिक्षा एवं प्रबंधन संस्थानों की स्थिति के बारे में उद्बोधन दिया. उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मैनेजमेंट के तरीको में तेजी से बदलाव हो रहा है ऐसे में मैनेजमेंट एजुकेशन किताबी न होकर पे्रक्टिकल होना चाहिए. वस्र्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक सन 2020 तक एक तिहाई स्कील खत्म हो जाएगी ऐसे में मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स को एडवांस स्कील्स के साथ तैयार करने की जरुरत है.
नेशनल स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम भी हो
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैनेजमेंट स्कूल्स के आंचलिक उपाध्यक्ष डॉ. पराग कालकर ने कहा कि इंटरनेशनल स्टूडेट्स एक्सचेंज प्रोग्राम की तरह नेशनल स्टूडेंट्स एक्सचेंज प्रोग्राम होना चाहिए. इस मौके एवं एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेनेजमेंट स्कूल्स की राष्ट्रीय समन्वयक रूपीन्दर कौर ने विचार व्यक्त किये. कार्यंक्रम में प्रदेश के पश्चिम अचंल के प्रबंध संस्थानों के निदेशक एव विभागाध्यक्षों ने बैठक में भाग लिया. चर्चा के अंत में डॉ. एस.एल काले ने अतिथियों का आभार प्रकट एवं एकेडमी के निदेषक वास्तुविद् अचल चौधरी ने अतिथिओं को स्मृति चिन्ह भेंट किये। कार्यक्रम में एकेडमी के सभी विभागों के निदेषक व विभागाध्यक्ष एवं प्राध्यापकगण उपस्थित थे.
शहर में पहली बार लगेंगे 3 डी स्पीड ब्रेकर, आईआईएसटी के प्रोफेसर की अनूठी पहल
इंदौर. इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा प्रारम्भ किए जा रहे सामाजिक दायित्व निर्वाहन कार्यक्रम के तहत सड़क सुरक्षा व्यवस्थामें एक आधुनिक एवं प्रभावी तकनीक ‘3 डी स्पीड ब्रेकरÓ लगाए जांएगे. ये स्टीकर इस तरह से बनाए गए है कि देखने पर ये उभरे हुए दिखाई देते है और वाहन चालक खुद की अपनी गति को नियंत्रित कर दुर्घटना से बच सकते है.
इस तकनीक का प्रदर्शन षहर के व्यस्ततम चौराहे गिटार चैराहे पर 15 मई को प्रात: 10 बजे किया जाएगा. ये स्पीड ब्रेकर कॉलेज के अनुभवी, प्रशिक्षित एवं विख्यात प्रो. दीपक यादव ने तैयार किये है और वे देश के कई शहरो में इनका प्रदर्शन भी कर चुके है. इस नई पहल का शुभारंभ आईआईएसटी के डायरेक्टर जनरल अरुण एस भटनागर करेंगे जो 83 बैच के आईआरएस होकर प्रधान आयकर आयुक्त दिल्ली से सेवानिवृत्त है. इसके साथ ही कॉलेज द्वारा 15 मई की षाम पांच बजे रिगल तिराहे पर हेलमेट अभियान भी चलाया जाएगा जिसमें कॉलेज के स्टूडेंट्स दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित किया जाएग.


