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निःशुल्क चिकित्सा शिविर में चार गांवों के 118 ग्रामीण पहुंचे, 15 में सिकल सेल एनीमिया की पुष्टि
रानी काजल माता वनवासी समिति इंदल धाम मटली के तत्वाधान में आयोजित हुआ सिकल सेल चिकित्सा शिविर
सिकल सेल बीमारी को रोकने और ग्राम को सिकल सेल मुक्त बनाने के लिए ग्रामीणों ने लिया संकल्प
इंदौर। रानी काजल माता वनवासी समिति इंदल धाम मटली के तत्वावधान में 3 अक्टूबर, शुक्रवार को इंदल धाम मटली, ग्राम मटली तहसील राजपुर जिला बड़वानी में निःशुल्क चिकित्सा शिविर संपन्न हुआ। शिविर में मुख्य रूप से सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित मरीजों की जांच कर उन्हें निःशुल्क होम्योपैथिक दवाई प्रदान की गई। वहीं शिविर में उपस्थित ग्रामीणों को सिकल सेल बीमारी को रोकने के लिए संकल्प भी दिलाया गया।
शिविर की शुरुआत सुबह आठ बजे से हुई । बड़ी संख्या में ग्रामीण शिविर लगने की सूचना मिलने पर पहुंचे थे। शिविर में मुख्य रूप से इंदौर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एके द्विवेदी (सदस्य, केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार और कार्यपरिषद सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर तथा संचालक, एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर, इंदौर) उपस्थित रहे। डॉ. द्विवेदी ने शिविर में पहुंचे ग्रामीणों को सिकल सेल रोग की रोकथाम और बचाव संबंधी जानकारी दी। कहा कि सिकल सेल रोग एक आनुवंशिक रक्त विकार है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी फैलता है। लेकिन चिंता की बात नहीं है, क्योंकि सही जानकारी और सावधानी से हम इससे बचाव कर सकते हैं।
ग्रामीणों को बताया कि व्यक्ति के शरीर में सामान्य कोशिकाएं गोल होती हैं, लेकिन सिकल सेल रोग में ये कोशिकाएं हंसिए (सिकल) के आकार की हो जाती हैं, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है और व्यक्ति को थकान, दर्द और अन्य समस्याएं होती हैं। वहीं सिकल सेल बीमारी की रोकथाम के लिए शादी से पहले जांच करवाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और स्वच्छ जीवनशैली अपनाएं। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ लें जोकि सिकल सेल की जांच और उपचार के लिए चलाई जा रही है। डॉ. द्विवेदी ने बताया कि सिकल सेल रोग शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के आकार को प्रभावित करता है
जोड़ों के दर्द, पेट दर्द, बुखार और त्वचा संबंधी रोगों से पीड़ित मरीज भी पहुंचे
शिविर में जोड़ों के दर्द, पेट दर्द, बुखार और त्वचा संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को भी निःशुल्क होम्योपैथी दवाई उपलब्ध कराई गई। शिविर में ग्राम मटली, जोड़ई, संवरदा और एकलबारा से लगभग 118 ग्रामीण पहुंचे। इनमें से 15 लोगों में सिकल सेल एनीमिया बीमारी की पुष्टि हुई। शिविर के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रेवाराम भाई और डॉ.एके द्विवेदी ने उपस्थित ग्रामीणों को सिकल सेल बीमारी की रोकथाम और बचाव संबंधी जानकारी दी। साथ ही मरीजों की खून जांच और परामर्श कर निःशुल्क होम्योपैथिक दवा का वितरण किया। शिविर में किशन लाल जी (आश्रम निर्माण के लिए जमीन के दाता), डॉ. प्रवीण कुमार माटे विशेष रूप से उपस्थित रहे। शिविर में उपस्थित ग्रामीणों ने यह संकल्प भी लिया कि वे अपने गांव को एनीमिया मुक्त ग्राम बनाने का प्रयास करेंगे ताकि अगली पीढ़ी को यह बीमारी विरासत में न मिले। शिविर के आखिरी में आयोजकों व ग्रामीणों ने डॉ. द्विवेदी और उनकी टीम को इस जनहितकारी शिविर के सफल आयोजन हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया।
डॉ. द्विवेदी का अनुभव और उपलब्धियां
• पिछले 27 वर्षों से डॉ. एके द्विवेदी एनीमिया एवं सिकल सेल से संबंधित बीमारियों के उपचार और जागरूकता के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
• प्रतिवर्ष एनीमिया जागरूकता रथ निकालते हैं।
• ग्रामीणों को पौष्टिक आहार (गुड़, चना, खजूर, मुनक्का आदि) वितरित करते हैं।
• सिकल सेल एनीमिया रोगियों को निःशुल्क परामर्श एवं औषधि उपलब्ध कराते हैं।
• इंदौर केंद्रीय जेल में बीते 20 वर्षों से कैदियों को निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहे हैं।
• सिंहस्थ उज्जैन (2016) में हजारों श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा, भोजन व आवास की व्यवस्था की थी।
• साथ ही भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के सदस्य के रूप में होम्योपैथी चिकित्सा से एनीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों में प्रभावी उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।


