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इंदौर में शुरू हुई चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026, फेफड़ों के इलाज की नई तकनीकों पर शुरू हुआ मंथन
पहले दिन 11 प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप, 4 और 5 जुलाई को होंगे साइंटिफिक सेशन्स
इंदौर। फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ते मामलों और इलाज में तेजी से आ रहे बदलावों के बीच देश और विदेश के विशेषज्ञ इंदौर में एक मंच पर जुट गए हैं। चौथी ब्रोंकोपल्मोनरी वर्ल्ड कांग्रेस 2026 की शुरुआत शुक्रवार को अमलतास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, देवास में प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप के साथ हुई। तीन दिवसीय इस इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के तहत 4 और 5 जुलाई को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर, इंदौर में साइंटिफिक सेशन्स आयोजित होंगे। आयोजन में पल्मोनोलॉजिस्ट, फिजिशियन, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ, थोरासिक सर्जन, रिसर्चर, पोस्टग्रेजुएट डॉक्टर और अन्य हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स भाग ले रहे हैं।
कॉन्फ्रेंस के पहले दिन आयोजित 11 प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप में फेफड़ों की बीमारियों के इलाज से जुड़ी नई तकनीकों, आधुनिक उपकरणों और क्लिनिकल प्रक्रियाओं पर फोकस रहा। मेडिकल थोराकोस्कोपी एंड आईपीसी, रिजिड ब्रोंकोस्कोपी, फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोपी एंड क्रायो एप्लीकेशन, रिसर्च मेथड्स इन पल्मोनोलॉजी, स्लीप, एनआईवी एंड वेंटिलेटर, एनटीईपी-एनसीसीपी टीबी, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन, स्पाइरोमेट्री और पल्मोनरी टेक्नीशियन ट्रेनिंग सहित विभिन्न वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने हैंड्स ऑन ट्रेनिंग, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और केस बेस्ड डिस्कशन के माध्यम से व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। प्रतिभागियों ने आधुनिक उपकरणों पर अभ्यास किया और जटिल क्लिनिकल प्रक्रियाओं से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की।
4 और 5 जुलाई को होने वाले मुख्य कॉन्फ्रेंस 723 से अधिक रजिस्ट्रेशन हुए हैं, कॉन्फ्रेंस में पल्मोनरी मेडिसिन, क्रिटिकल केयर, स्लीप मेडिसिन, थोरासिक सर्जरी, इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी, पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन और रेस्पिरेटरी रिसर्च से जुड़े विषयों पर साइंटिफिक सेशन्स होंगे। इसके अलावा रिसर्च पेपर प्रेजेंटेशन, पोस्टर प्रेजेंटेशन, क्लिनिकल केस डिस्कशन, साइंटिफिक राइटिंग, पब्लिकेशन और पोस्टग्रेजुएट क्विज प्रतियोगिता जैसी शैक्षणिक गतिविधियां भी आयोजित होंगी। आयोजन में 12 से अधिक अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी सदस्य, पद्मश्री सम्मानित विशेषज्ञ और देश के वरिष्ठ चिकित्सक अपने अनुभव साझा करेंगे।
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. रवि डोसी ने बताया, “प्री कॉन्फ्रेंस वर्कशॉप इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पहले दिन आयोजित वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने आधुनिक तकनीकों और उपकरणों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। अनुभवी विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रक्रियाओं का लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया और प्रतिभागियों के साथ अपने क्लिनिकल अनुभव साझा किए। अगले दो दिनों में होने वाले साइंटिफिक सेशन्स में फेफड़ों की बीमारियों के उपचार, नई रिसर्च और आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से चर्चा होगी, जिससे विशेषज्ञों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान होगा।कॉन्फ्रेंस में देश और विदेश के विशेषज्ञों के साथ युवा डॉक्टरों, पोस्टग्रेजुएट विद्यार्थियों, सीनियर रेजिडेंट्स और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को भी अपने शोध प्रस्तुत करने और विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिल रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का उद्देश्य फेफड़ों की बीमारियों के उपचार, रिसर्च और क्लिनिकल प्रैक्टिस से जुड़े नवीनतम अनुभवों और तकनीकों को साझा करना है।”


