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- विधात्री बंदी ने ‘फ्रेंड्स’ स्टार जेनिफर एनिस्टन के सामने परफॉर्म करने का अनुभव किया याद, अपनी बैच की एकमात्र भारतीय छात्रा थीं
विधात्री बंदी ने ‘फ्रेंड्स’ स्टार जेनिफर एनिस्टन के सामने परफॉर्म करने का अनुभव किया याद, अपनी बैच की एकमात्र भारतीय छात्रा थीं
विधात्री बंदी ने अपने अभिनय सफर का एक ऐसा खास किस्सा साझा किया, जो आज भी उनके लिए बेहद यादगार है। यह मौका तब आया, जब ‘फ्रेंड्स’ की मशहूर अभिनेत्री जेनिफर एनिस्टन एक मास्टरक्लास के लिए विशेष अतिथि के तौर पर पहुंची थीं। 45 छात्रों की इस क्लास में विधात्री को जेनिफर एनिस्टन के सामने एक सीन परफॉर्म करने के लिए चुना गया था। खास बात यह थी कि वह अपनी बैच की सबसे कम उम्र की और इकलौती भारतीय छात्रा थीं।
विधात्री बताती हैं, “मेरे प्रोफेसर एंड्रिया बैंडवॉल्ड और निक्की डेलोच ने 45 लोगों में से मुझे उनके सामने एक सीन परफॉर्म करने के लिए चुना था।”
इस अनुभव को याद करते हुए वह कहती हैं, “मुझे याद है कि मैं काफी नर्वस थी, क्योंकि मुझे सबसे पहले परफॉर्म करना था। जब आपको शुरुआत करनी होती है, तो दबाव थोड़ा ज्यादा होता है। आपको भरे हुए कमरे के सामने जाकर पहला कदम उठाना होता है। फिर मैंने ऊपर देखा और जेनिफर एनिस्टन को सामने बैठे देखा। जिस अभिनेत्री को मैंने बचपन से ‘रेचल ग्रीन’ के रूप में देखा था, वह अब मुझे परफॉर्म करते हुए देख रही थीं। कुछ सेकंड के लिए मुझे समझ ही नहीं आया कि यह सच में हो रहा है। लेकिन मैंने गहरी सांस ली, खुद को याद दिलाया कि मैं वहां क्यों थी और परफॉर्म करना शुरू कर दिया। जैसे ही मैंने अपनी पहली लाइन बोली, बाकी सब कुछ भूल गई। वह पूरा अनुभव मेरे लिए अविश्वसनीय था।”
विधात्री को जेनिफर एनिस्टन से उनके परफॉर्मेंस पर प्रतिक्रिया भी मिली। एनिस्टन ने उन्हें कुछ नोट्स दिए, उनके काम की तारीफ की और उन्हें गले भी लगाया। लेकिन विधात्री के लिए यह अनुभव सिर्फ अपनी पसंदीदा अभिनेत्री के सामने परफॉर्म करने तक सीमित नहीं था। उनके लिए यह उस समय आया एक ऐसा जवाब था, जिसकी उन्हें शायद खुद भी तलाश थी।
वह बताती हैं, “सिर्फ चार महीने पहले मैं अपने फैसले को लेकर बहुत सारे सवाल कर रही थी। क्या अभिनय वाकई मेरे लिए है? क्या मैं इस इंडस्ट्री में अपनी जगह बना पाऊंगी? क्या मैं अच्छी हूं? क्या मैं खूबसूरत हूं? क्या मेरे अंदर वह सब है, जो इस सफर के लिए जरूरी है? बाकी कई कलाकारों की तरह मेरे मन में भी बहुत सारी असुरक्षाएं और सवाल थे। लेकिन सिर्फ चार महीने बाद मैं लॉस एंजिल्स में यूसीएलए में थी और 45 छात्रों में से मुझे जेनिफर एनिस्टन के सामने सीन परफॉर्म करने के लिए चुना गया था।”
विधात्री के लिए वह पल किसी उपलब्धि से कम नहीं था। वह कहती हैं, “उस अनुभव ने मुझे एहसास कराया कि कई बार जिंदगी आपको उस सवाल का जवाब दे देती है, जिसका जवाब आप खुद तलाश रहे होते हैं। सच कहूं तो मुझे नहीं लगता कि कोई पुरस्कार, सम्मान या बाहरी तारीफ उस पल की जगह ले सकती है। उस अनुभव ने मुझे इससे भी ज्यादा जरूरी चीज दी—यह भरोसा कि मैं यहां अपनी जगह बना सकती हूं और आगे बढ़ने का हौसला।”
शायद यही वह पल था, जब विधात्री ने खुद से यह पूछना छोड़ दिया कि ‘क्या मैं यह कर सकती हूं?’ और पहली बार पूरे विश्वास के साथ खुद से कहा—‘हां, मैं यह कर सकती हूं।’


