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AIFI के दूसरे वार्षिक सम्मेलन में भारत के लिए ‘चाइना प्लस वन’ अवसर और अधिक स्मार्ट तथा मजबूत फोर्जिंग उद्योग की आवश्यकता पर दिया गया जोर
पुणे, 15 सितंबर: भारतीय फोर्जिंग क्षेत्र की शीर्ष संस्था, एसोसिएशन ऑफ इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री (AIFI) ने “न्यू डेवलपमेंट ट्रेंड्स – इम्पैक्ट ऑन फोर्जिंग इंडस्ट्री” विषय पर अपने दूसरे वार्षिक सम्मेलन का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस सम्मेलन में उद्योग के प्रमुख हितधारकों ने बदलते कारोबारी माहौल और भारतीय फोर्जिंग उद्योग के भविष्य को आकार देने वाले अवसरों तथा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में बदलती वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, उभरते ‘चाइना प्लस वन’ अवसर, प्रौद्योगिकी और ऑटोमेशन, उत्पादकता, जनशक्ति, बढ़ती इनपुट लागत तथा पूरे क्षेत्र में अधिक मजबूती और प्रतिस्पर्धात्मकता की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया।
सम्मेलन की चर्चाओं में इस बात को रेखांकित किया गया कि भारतीय फोर्जिंग उद्योग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। चूंकि वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने पर विचार कर रही हैं, ऐसे में भारतीय कंपनियों के पास वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी स्थिति मजबूत करने का बड़ा अवसर है। हालांकि, उद्योग को प्रौद्योगिकी, ऑटोमेशन, इंजीनियरिंग और आरएंडडी (R&D) क्षमताओं, कुशल जनशक्ति, उत्पादकता और स्थिरता में निवेश करके पारंपरिक विनिर्माण और आपूर्तिकर्ता मॉडल से आगे बढ़ना होगा। सम्मेलन का सामूहिक संदेश स्पष्ट था कि भारत के पास पसंदीदा वैश्विक साझेदार बनने के लिए विनिर्माण आधार, इंजीनियरिंग प्रतिभा और बाजार के अवसर मौजूद हैं, लेकिन कंपनियों को विकास के अगले चरण का लाभ उठाने के लिए अधिक जिम्मेदारी लेने, अनिश्चितता से निपटने, ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरा करने और उच्च-मूल्य समाधान देने की क्षमता विकसित करनी होगी।
सभा को संबोधित करते हुए AIFI के अध्यक्ष और वर्षा फोर्जिंग्स प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ, श्री यश मुनोट ने कहा, “भारतीय फोर्जिंग उद्योग एक अहम मोड़ पर है, जहां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन से भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा हो रहे हैं। इसके साथ ही, हमें भू-राजनीतिक अनिश्चितता, बढ़ती इनपुट लागत, तकनीकी बदलावों और ग्राहकों की बदलती आवश्यकताओं से निपटने के लिए तैयार रहना होगा। हमारा ध्यान उत्पादकता बढ़ाने, तकनीक को तेजी से अपनाने, कर्मचारियों के कौशल विकास और नवाचार तथा स्थिरता को सुदृढ़ करने पर होना चाहिए। भारतीय फोर्जिंग उद्योग के सामने बड़ा अवसर है, लेकिन वैश्विक ग्राहकों के लिए अधिक मजबूत और मूल्यवान साझेदार बनने हेतु हमें आवश्यक क्षमताओं और प्रतिस्पर्धात्मकता का निर्माण करना होगा।”
सम्मेलन के मुख्य अतिथि, बीएमडब्ल्यू ग्रुप प्लांट चेन्नई के प्रबंध निदेशक, श्री थॉमस डोज़ ने ‘चाइना प्लस वन’ रणनीति के संदर्भ में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता पर बात की। उन्होंने रेखांकित किया कि भू-राजनीतिक उथल-पुथल और एकल आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता से जुड़े जोखिमों के कारण वैश्विक कंपनियां अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता ला रही हैं। अपनी इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़े घरेलू बाजार और सक्षम फोर्जिंग इकोसिस्टम के साथ, भारत के पास पसंदीदा ‘प्लस वन’ गंतव्य के रूप में उभरने का मजबूत अवसर है। श्री डोज़ ने जोर देकर कहा कि यह अवसर केवल विनिर्माण और सोर्सिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ग्राहक अब ऐसे आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं जो इंजीनियरिंग और विकास क्षमताओं में अधिक योगदान दे सकें और शुरू से अंत तक पूरी जिम्मेदारी ले सकें।
श्री थॉमस डोज़ ने कहा, “हमारा मानना है कि भारत को ‘प्लस वन’ होना चाहिए। भारत के पास इंजीनियरिंग प्रतिभा, बड़ा बाजार और अत्यंत सक्षम फोर्जिंग उद्योग है। लेकिन ‘चाइना प्लस वन’ का मतलब सिर्फ आपूर्ति नहीं है; हम भारत से और अधिक साझेदारी देखना चाहते हैं। ग्राहक ऐसे सक्षम साझेदारों की तलाश में हैं जो जिम्मेदारी ले सकें, इंजीनियरिंग और विकास में योगदान दें और विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनें। भारत अब सिर्फ आपूर्ति श्रृंखला नहीं रहा, बल्कि भारतीय कंपनियों को हमारे विकास का हिस्सा बनने की आवश्यकता है। चुनौती मौजूदा क्षमताओं को परस्पर जोड़ने की है, और इसमें AIFI की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।”
सम्मेलन में AIFI पश्चिमी क्षेत्र के चेयरमैन और एस. बी. फोर्जटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ, श्री सुनील जावलेकर ने स्वागत भाषण दिया। पीडब्ल्यूसी (PwC) के कार्यकारी निदेशक, श्री योगेश ठाकर ने “इंडियन फोर्जिंग इंडस्ट्री – नेक्स्ट ग्लोबल एज” विषय पर प्रस्तुति दी, जिसमें भारतीय फोर्जिंग कंपनियों के लिए वैश्विक विनिर्माण इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में AIFI प्रबंध समिति के सदस्य, उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधि और प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। स्मृति चिन्ह भेंट करने और धन्यवाद ज्ञापन का कार्य AIFI के उपाध्यक्ष और सुपर ऑटो फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, श्री एस. रविशंकर द्वारा किया गया।
सम्मेलन में “मैनेजिंग अनसर्टेनिटी / चैलेंजेस टू कैपिटलाइज ऑन डिमांड सर्ज” विषय पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का भी आयोजन किया गया। इसका संचालन AIFI के उपाध्यक्ष और सुपर ऑटो फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री एस. रविशंकर ने किया। पैनलिस्ट के रूप में एम.एम. फोर्जिंग्स लिमिटेड के सीएमडी श्री विद्याशंकर कृष्णन, बजाज मोटर्स लिमिटेड के एमडी श्री विकास बजाज और हिर्शवोगेल कंपोनेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ श्री साहिल जैन शामिल थे। चर्चा में मांग में अपेक्षित वृद्धि और उसका लाभ उठाने के लिए उद्योग की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें जीएसटी, जनशक्ति की उपलब्धता, ऑटोमेशन, तकनीकी अपग्रेड, निवेश, प्रशिक्षण, आकस्मिक योजना (कंटींजेंसी प्लानिंग), आरएंडडी, उत्पादकता, मांग प्रबंधन और बढ़ती इनपुट लागत जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
पैनलिस्टों ने अनिश्चितता से निपटने और उभरती मांग को स्थायी विकास में बदलने के लिए तकनीक, ऑटोमेशन, कौशल और आरएंडडी में सक्रिय निवेश के साथ-साथ बेहतर उत्पादकता और मजबूत आकस्मिक योजना की आवश्यकता पर जोर दिया।
सम्मेलन की चर्चाओं ने इस बात को और पुख्ता किया कि जैसे-जैसे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बदल रही हैं और कंपनियां अपने सोर्सिंग और विनिर्माण आधार में विविधता ला रही हैं, भारतीय फोर्जिंग उद्योग के पास व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उद्योग को अपनी मौजूदा विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाते हुए तकनीक, इंजीनियरिंग, कौशल और नवाचार में निवेश करना होगा, ताकि वैश्विक मूल्य श्रृंखला में उच्च स्तर पर पहुंचा जा सके और वैश्विक ग्राहकों के साथ मजबूत, दीर्घकालिक साझेदारी बनाई जा सके।
सम्मेलन का समापन भारतीय फोर्जिंग उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने और घरेलू तथा वैश्विक दोनों बाजारों में भारतीय फोर्जिंग कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा करने के नए संकल्प के साथ हुआ। AIFI उद्योग के हितधारकों को एक मंच पर लाने, ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने और फोर्जिंग बिरादरी के हितों का प्रतिनिधित्व करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।


