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गालियों को बदल दिया ख़ूबसूरत चित्रकारी में
इंदौर. आज अटल खेल परिसर में बच्चों द्वारा बनाई गई ख़ूबसूरत पेंटिंग पर कुछ असामाजिक और भावहीन तत्वों ने गालियाँ लिख दी थी. गालियाँ लिखने की वजह जो भी रही हो लिखते वक्त उन तत्वों
को ये तक ध्यान में नहीं आया कि जिस-जिस बच्चें ने वो पेंटिंग बनाई होगी वो उसे देखकर और अपने दोस्तों माता पिता को दिखाकर गर्व महसूस करता होगा. उनके मासूम दिलों पर क्या गुजऱेगी जब वो निष्पक्ष भाव से सौंदर्य बड़ाने के लिए दीवारों पर की गई अपनी ड्रॉइंग पर गालियाँ लिखता देखेगा. उन असामाजिक और दकिय़ानूसी सोच वाले तत्वों को ये तक ध्यान नहीं आया कि उनकी माँ बेटी बहन भी वहां आया-जाया करती होंगी? गालियाँ लिखकर उन्होंने जो नकारत्मकता फैलाने की नाकाम कोशिश की थी. उसे सकारात्मकता में बदल दिया वहीं के कुछ होनहार बच्चों ने हुनरफॉक्स एकेडमी के फ़ाउंडर संकल्प श्रीवास्तव के साथ मिल कर.इन्होंने वो कर दिखाया जिसकी समाज में आज ज़रूरत है. गालियों को भी ख़ूबसूरत पेंटिंग्स में बदल डाला जिससे ना सिफऱ् सकारात्मकता फैली बल्कि वहाँ उपस्थित सभी को संदेश भी गया कि गालियों को भी अपने हुनर से सार्थक ओर ख़ूबसूरत रूप दिया जा सकता है.
को ये तक ध्यान में नहीं आया कि जिस-जिस बच्चें ने वो पेंटिंग बनाई होगी वो उसे देखकर और अपने दोस्तों माता पिता को दिखाकर गर्व महसूस करता होगा. उनके मासूम दिलों पर क्या गुजऱेगी जब वो निष्पक्ष भाव से सौंदर्य बड़ाने के लिए दीवारों पर की गई अपनी ड्रॉइंग पर गालियाँ लिखता देखेगा. उन असामाजिक और दकिय़ानूसी सोच वाले तत्वों को ये तक ध्यान नहीं आया कि उनकी माँ बेटी बहन भी वहां आया-जाया करती होंगी? गालियाँ लिखकर उन्होंने जो नकारत्मकता फैलाने की नाकाम कोशिश की थी. उसे सकारात्मकता में बदल दिया वहीं के कुछ होनहार बच्चों ने हुनरफॉक्स एकेडमी के फ़ाउंडर संकल्प श्रीवास्तव के साथ मिल कर.इन्होंने वो कर दिखाया जिसकी समाज में आज ज़रूरत है. गालियों को भी ख़ूबसूरत पेंटिंग्स में बदल डाला जिससे ना सिफऱ् सकारात्मकता फैली बल्कि वहाँ उपस्थित सभी को संदेश भी गया कि गालियों को भी अपने हुनर से सार्थक ओर ख़ूबसूरत रूप दिया जा सकता है.

