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सही रक्त मात्रा से ही सशक्त शरीर और राष्ट्र का निर्माण : डॉ. ए. के. द्विवेदी
हर चुनौती का सामना करना है, बीमार नहीं, मजबूत बनना है, शरीर को विषमुक्त कर स्वस्थ भविष्य गढ़ना है। — डॉ. नारायण राव
इंदौर। नववर्ष के अवसर पर तिलक नगर कम्युनिटी हॉल में आयोजित विशेष स्वास्थ्य सेमिनार में जीवनशैली सुधार, शरीर शुद्धिकरण (डिटॉक्स), रोग निवारण, समय से पहले होने वाली वृद्धावस्था (प्रीमेच्योर एजिंग), ऊर्जा संचयन (एनर्जी हार्वेस्टिंग) तथा पोषण संबंधी वैज्ञानिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि आज की अधिकांश बीमारियों की जड़ असंतुलित खानपान, कमजोर पाचन तंत्र और शरीर में बढ़ते विषैले तत्व हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. ए. के. द्विवेदी, कार्य समिति सदस्य, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने कहा कि स्वस्थ रक्त ही कार्यक्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता और दीर्घायु जीवन का मूल आधार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हड्डियाँ और अस्थि मज्जा (बोन मैरो) मजबूत होती हैं, तभी अच्छे एवं गुणवत्तापूर्ण रक्त का निर्माण संभव होता है। यही स्वस्थ रक्त शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सशक्त बनाता है।
डॉ. द्विवेदी ने कहा, “यदि अगली पीढ़ी स्वस्थ होगी, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा। इसके लिए रक्त स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देना आवश्यक है।”
उन्होंने यह भी कहा कि मानव शरीर में स्वयं-सुधार, नवीनीकरण और पुनर्जीवन की अद्भुत क्षमता है। यदि हम दवाइयों पर निर्भर होने के बजाय जीवनशैली सुधारें, तो न केवल रोगों से बचा जा सकता है बल्कि समय से पहले होने वाले बुढ़ापे को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
मुख्य वक्ता डॉ. नारायण राव (मुंबई) ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल कम खाना नहीं, बल्कि सही पाचन और ऊर्जा का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि शरीर में जमा वसा (फ़ैट) कोई शत्रु नहीं, बल्कि ऊर्जा का भंडार है। यदि पाचन सही हो और शरीर को प्रशिक्षित किया जाए, तो फ़ैट रिसाइकल होकर ऊर्जा में परिवर्तित हो सकता है, जिससे कमजोरी और थकान कम होती है।
डॉ. राव ने कहा कि आज की गलत खानपान आदतों से डाइजेस्टिव जूस (पाचन रस) अनावश्यक रूप से नष्ट हो जाते हैं। बार-बार खाना, देर रात भोजन और भारी आहार पाचन रस को कमजोर करता है, जिससे गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याएँ जन्म लेती हैं। डाइजेस्टिव जूस को बचाना ही स्वास्थ्य को बचाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि अनेक लोगों के लिए ग्लूटेन-फ्री जीवनशैली अपनाना स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध हो सकता है। ग्लूटेन-फ्री जीवन केवल एक डाइट ट्रेंड नहीं, बल्कि पाचन सुधार, सूजन कम करने और ऊर्जा स्तर बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हल्का, सरल और संस्कारित भोजन ही शरीर को वास्तविक शक्ति देता है।
कार्यक्रम में पार्षद एवं MIC सदस्य श्री राजेश उदावत ने कहा कि ऐसे स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम समाज को सही दिशा देते हैं और नागरिकों को स्वयं के स्वास्थ्य के प्रति सजग बनाते हैं।
श्री रमेश जैन ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि स्वस्थ समाज ही सशक्त नगर और सशक्त राष्ट्र की नींव है।
विशेष अतिथि डॉ. प्रवीण सुराना, नाक–कान–गला रोग विशेषज्ञ ने संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम को दैनिक जीवन का अनिवार्य अंग बताया।
कार्यक्रम का सफल आयोजन एवं संचालन श्री होलासजी सोनी एवं आसीश जैन तथा अन्य सहयोगी आयोजकों द्वारा किया गया। सेमिनार के अंत में उपस्थित नागरिकों ने ऊर्जा संचयन, फ़ैट रिसाइकल, पाचन संरक्षण, भोजन को संस्कारित कर ग्रहण करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
संचालन कुसुम पंड्या जी ने किया. मंगलचरण सविता जैन, सुनीति जैन, कुसुम पांड्या, दीपा पांड्या जी ने किया.


