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केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स, इंदौर में 6 माह के मासूम की बचाई जान, गले में फंसा 1.5 इंच का स्टील ढक्कन (डोर नॉब) सफलतापूर्वक निकाला
इंदौर। केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स इंदौर के डॉक्टरों ने अपनी तत्परता, अनुभव और कुशलता का परिचय देते हुए एक 6 माह के मासूम शिशु की जान बचाई। यह मामला बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि बच्चे के गले में लगभग 1.5 इंच व्यास का स्टील का ढक्कन (डोर नॉब) फंस गया था, जिससे उसकी स्थिति गंभीर होने लगी थी। समय पर केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स, इंदौर पहुंचने पर और विशेषज्ञ उपचार मिलने से बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया।

शिशु तनिष्क अहिरवार, पिता राजकुमार अहिरवार, घर पर खेल रहा था। इसी दौरान खेलते-खेलते उसने स्टील का ढक्कन मुंह में डाल लिया, जो अचानक गले में जाकर फंस गया। ढक्कन फंसते ही बच्चा बेचैन हो गया और उसे सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई। मासूम की हालत देखकर परिवारजन घबरा गए और तुरंत उसे केयर सीएचएल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।
हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टरों ने बच्चे की स्थिति का तत्काल आकलन किया। जांच में पता चला कि ढक्कन गले के भीतर फंसा हुआ है और श्वास मार्ग को प्रभावित कर रहा है। यदि थोड़ी भी देरी होती, तो यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए आपातकालीन प्रक्रिया शुरू की।
इस जटिल प्रक्रिया का सफल नेतृत्व एनेस्थेटिस्ट डॉ. यश मेहता और मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. सर्वप्रिया शर्मा ने किया। उनके साथ डॉ. राजेश वाधवानी तथा प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की टीम लगातार सक्रिय रही। पूरी टीम ने समन्वित प्रयास करते हुए अत्यंत सावधानी और तकनीकी दक्षता के साथ गले में फंसे स्टील के ढक्कन को सुरक्षित बाहर निकाला और शिशु को नया जीवनदान दिया.
सफल प्रक्रिया के बाद बच्चे को निगरानी में रखा गया। कुछ समय बाद उसकी सांस सामान्य होने लगी और स्वास्थ्य में तेजी से सुधार देखा गया। डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल बच्चा सुरक्षित है और उसकी स्थिति स्थिर है।
बच्चे के परिवार ने शिशु के तुरंत नोर्मल होते ही भावुक होकर केयर सीएचएल हॉस्पिटल की टीम का आभार व्यक्त किया। परिजनों ने कहा कि डॉक्टरों ने समय रहते जो प्रयास किए, उससे उनके घर की खुशियां लौट आईं। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल की पूरी टीम ने परिवार को हर पल हिम्मत दी और बच्चे का बेहतरीन इलाज किया।
डॉक्टरों ने कहा कि 6 माह से 3 वर्ष की उम्र के बच्चों में ऐसी घटनाएं सबसे अधिक होती हैं, क्योंकि यह उनकी “माउथिंग स्टेज” होती है, जिसमें वे हर चीज मुंह में डालने की कोशिश करते हैं। हर वर्ष 5 वर्ष से कम आयु के 50 हजार से अधिक मामले सामने आते हैं, जिनमें सिक्के, बटन बैटरी, छोटे खिलौने, मैग्नेट, गहने और खाद्य पदार्थ के टुकड़े सबसे सामान्य वस्तुएं हैं। अधिकतर घटनाएं घर के भीतर होती हैं। कई मामलों में वस्तु सामान्य रूप से बाहर निकल जाती है, लेकिन कुछ स्थितियों में एंडोस्कोपी या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। बटन बैटरी और मैग्नेट विशेष रूप से खतरनाक होते हैं, जो कुछ घंटों में गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि छोटे सामान बच्चों की पहुंच से दूर रखें, ढीले पार्ट्स वाले खिलौनों से बचें, बैटरी उपकरण सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत अस्पताल पहुंचें।
केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स इंदौर के एचसीओओ श्री मनीष गुप्ता ने इस सफलता पर पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह घटना हॉस्पिटल की दक्षता, आपसी समन्वय और मरीजों के प्रति समर्पण का शानदार उदाहरण है। उन्होंने कहा कि केयर सीएचएल हॉस्पिटल्स इंदौर हर आपातकालीन परिस्थिति में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह सफलता हमारी विशेषज्ञ टीमवर्क और समर्पण का उदाहरण है। अस्पताल में फुल टाइम कंसल्टेंट्स, कॉम्प्रिहेंसिव रेडियोलॉजी तथा क्रिटिकल केयर टीम की 24×7 उपलब्धता के कारण सबसे जटिल मरीजों को भी समय पर बेहतर उपचार मिल पाता है। उन्होंने कहा कि मरीज की जान बचाना ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।


