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नेफ्र्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप सालगिया को मिला द्रोणाचार्य अवार्ड
इंदौर. वर्ष 2000 में इंदौर और मध्यभारत में पहला कैडेबर ट्रांस्प्लांट करने और इस क्षेत्र में लगातार श्रेष्ठ कार्य करने वाले शहर के सीनियर नेफ्र्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप सालगिया को एसोसिएशन ऑफ वेस्क्युलर एक्सेस एंड इंटरवेंशनल रीनल फीजिशियन (अवतार) ने गुरू द्रोणाचार्य अवार्ड से नवाजा है.
यह पहली बार है जब सेंट्रल इंडिया में यह अवार्ड किसी नेफ्रोलॉजिस्ट को दिया गया है। डॉ.सालगिया को यह सम्मान दिल्ली में हुए एक समारोह में दिया गया है यह अवार्ड उनके द्वारा इस क्षेत्र में किए गए सराहनीय और सफल योगदान के लिए दिया गया है. उल्लेखनीय है कि डॉ. सालगिया 34 वार्षों से किडनी की बीमारियों का ईलाज कर रहे है, वर्ष 1984 में उन्होंने शहर में पहला किडनी ट्रांस्प्लांट किया था, जो सेंट्रल इंडिया का का भी पहला किडनी ट्रांस्प्लांट था.
नेफ्रोलॉजिस्ट को एक मंच पर लाने के लिए डॉ. सालगिया ने मप्र किडनी फाउंडेशन की स्थापना की, और अब प्रेक्टिस से बचा हुआ समय वे किडनी संबंधी बीमारियों के कारण-बचाव और ईलाज की नई तकनीकों को लेकर जागरूकता अभियान चलाते हैं। वे स्टूडेंट्स के लिए भी गाइड के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं, साथ ही ट्रांस्प्लांट सम्बंधित काउंसलिंग के लिए भी डॉ सालगिया के पास कई लोग आते हैं.


