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नमकीन, आलू-प्याज, रेडिमेड और दवा के निर्यात की व्यापक संभावनाएंः कलेक्टर
जिला निर्यात समिति की बैठक सम्पन्न
इंदौर. कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आज कलेक्टर मनीष सिंह की अध्यक्षता में जिला निर्यात समिति की बैठक सम्पन्न हुई. बैठक में उद्योग विभाग के जीएम ए.के. चौहान, एकेवीएन, लघु उद्योग निगम, खादी ग्रामोद्योग, उद्यानिकी विभाग, आजीविका परियोजना के प्रतिनिधि मौजूद थे.
बैठक में कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि देश-विदेश में जिले से निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं. इस काम में उद्योग विभाग, एकेवीएन और केन्द्रीय एजेंसियों से अधिकाधिक सहयोग लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि जिले से आलू, प्याज, आलू चिप्स, रेडिमेट गारमेंट्स, पैकेजिंग मटेरियल, चमड़े के खिलौने और दवाओं का निर्यात किया जा रहा है. इसे और अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है.
निर्यात से जुड़े सभी विभागों में आपसी समन्वय और सहयोग जरूरी है. इन विभागों की आपस में हर महीने बैठक भी होना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि निर्यात के लिये व्यापारियों को प्रेरित और प्रोत्साहित करने की जरूरत है. समय-समय पर इंदौर में बायर्स-सेलर्स सम्मेलन होना जरूरी है। इंदौर के व्यापारियों को अन्तर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने का मौका मिलना चाहिए.
जिले में हस्तशिल्प से निर्मित वस्तुओं के निर्यात की व्यापक संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि निर्यात में बहुत अधिक औपचारिकताएं हैं, इसलिये निर्यातक इस काम में दखल नहीं देना चाहिए. निर्यात में सबसे बड़ी बाधा है- गुणवत्ता की. एशियाई देशों में दूसरे दर्जे का माल भी बिक सकता है. निर्यात के लिये जिले के उद्योगपतियों को सघन प्रशिक्षण की जरूरत है.
मालवी आलू और मप्र के गेहूं की विदेशों में मांग
उन्होंने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की मलिटी ही निर्यात होती है. सब्जी-भाजी बहुत ही संवेदनशील सामग्री है, मगर खाड़ी के देशों में इसका व्यापक निर्यात संभव है. इंदौर जिले में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग की व्यापक संभावनाएं हैं. इंदौर से आलू चिप्स, सेव, नमकीन भी निर्यात किये जा सकते हैं. अभी यह निर्यात परोक्ष रूप से मुंबई और गुजरात से हो रहा है. मालवा क्षेत्र से करीब सौ देशों को काबुली चना निर्यात किया जा रहा है. टमाटर की सॉस का भी निर्यात किया जा सकता है. मैदा और मालवी आलू तथा मध्यप्रदेश में उत्पादित गेहूं की विदेशों में बहुत माँग है.


