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‘मुसाफिर हूं यारों’ से ‘कोई कहे कहता रहे’ तक, डॉक्टरों ने बिखेरे संगीत के रंग
स्पंदन डॉक्टर्स ग्रुप की 150वीं संगीतमय प्रस्तुति ‘सुर जी कल स्ट्राइक’ में गूंजे सदाबहार नगमे
इंदौर, 28 जून 2026। पिछले 35 वर्षों से चली आ रही परंपरा को कायम रखते हुए स्पंदन डॉक्टर्स ग्रुप ने इस वर्ष भी डॉक्टर्स डे और वर्ल्ड म्यूजिक डे का संयुक्त उत्सव संगीतमय संध्या ‘सुर जी कल स्ट्राइक’ के रूप में मनाया। यह स्पंदन ग्रुप की 150वीं प्रस्तुति रही। लाभ मंडपम खेलप्रशाल में आयोजित कार्यक्रम में खराब मौसम के बावजूद संगीत प्रेमियों का उत्साह देखने लायक था। कार्यक्रम शुरू होने से करीब एक घंटे पहले ही सभागार श्रोताओं से खचाखच भर गया और पूरी शाम तालियों की गड़गड़ाहट के बीच सदाबहार गीतों की स्वर लहरियां गूंजती रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. संजय लौंढे ने गीत ‘नदिया चले चले रे धारा’ से की। इस अवसर पर महान संगीतकार मदन मोहन की जयंती, सुप्रसिद्ध गायिका सुमन कल्याणपुर को श्रद्धांजलि तथा संगीतकार आर.डी. बर्मन को उनकी जयंती पर याद करते हुए उन्हें संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस वर्ष स्पंदन परिवार में प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन डॉ. दीपक कुलकर्णी का भी स्वागत किया गया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुके डॉ. कुलकर्णी की सहभागिता कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।
करीब 25 गीतों से सजी इस संगीतमय शाम में विभिन्न रंग देखने को मिले। डॉ. अतुल भट्ट और बड़ोदरा से आईं डॉ. रुचि शाह ने शास्त्रीय रंग से सजे ‘छम छम बाजे रे पायलिया’ और ‘जिया ले गयो रे मोरा सांवरिया’ प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। डॉ. हेमंत मंडोवरा ने ‘नफरत करने वालों के सीने में’, डॉ. प्रमोद नीमा ने ‘एक हसीना थी’, डॉ. मून जैन ने ‘हो जा रंगीला रे’, डॉ. अमित वर्मा ने ‘हम्मा हम्मा’, डॉ. दीपक कुलकर्णी ने ‘किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार’, डॉ. निकिता भटनागर ने ‘चढ़ती जवानी मेरी चाल मस्तानी’ तथा डॉ. मनोज भटनागर और डॉ. पिनाक भटनागर ने ‘ना ना करते प्यार’ सहित कई युगल गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम की एक बड़ी विशेषता विविधता रही। जहां ‘हैं अगर दुश्मन’ जैसी शानदार कव्वाली ने समां बांधा, वहीं ‘लड़की बड़ी अंजानी है’, ‘बाजीगर ओ बाजीगर’, ‘मुसाफिर हूं यारों’, ‘कोई कहे कहता रहे’ जैसे जोशीले गीतों ने माहौल को ऊर्जा से भर दिया। गीतों की प्रस्तुति इतनी जीवंत रही कि युवा, वरिष्ठ नागरिक और महिलाएं भी स्वयं को थिरकने से नहीं रोक सके। कार्यक्रम की एक खास बात यह भी रही कि अन्य संगीत आयोजनों की तरह कोरस के लिए बाहरी कलाकार नहीं बुलाए गए, बल्कि कोरस गायन भी डॉक्टरों की टीम ने ही किया।
स्पंदन डॉक्टर्स ग्रुप के संयोजक डॉ. मनोज भटनागर ने कहा, “डॉक्टरों का जीवन सेवा, जिम्मेदारी और व्यस्त दिनचर्या से भरा होता है। संगीत हमें मानसिक ऊर्जा, सकारात्मकता और संतुलन देता है। पिछले 35 वर्षों से स्पंदन का उद्देश्य यही रहा है कि डॉक्टर अपने भीतर के कलाकार को भी मंच दें और संगीत के माध्यम से समाज के साथ आत्मीय जुड़ाव कायम रखें। हमारी 150वीं प्रस्तुति इस निरंतर यात्रा का एक यादगार पड़ाव है।”
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय लौंढे ने किया। संगीत संयोजन कपिल राठौर और अभिजीत गौड़ ने संभाला, जबकि संगत कलाकारों में ढोलक पर राज बिजोरे, तबले पर ऋषि शर्मा, बांसुरी पर चिन्मय गौड़ और गिटार पर विकास जैन ने अपनी प्रस्तुति से कार्यक्रम को यादगार बना दिया।


