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अलौकिक मध्यप्रदेश” पुस्तक का भव्य विमोचन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया लोकार्पण
इंदौर। *मध्यप्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधारित प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक और सीसीआरएच, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी द्वारा लिखित पुस्तक “अलौकिक मध्यप्रदेश” का लोकार्पण मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कर-कमलों द्वारा भव्य समारोह में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, “आज के दौर में ‘अलौकिक मध्यप्रदेश’ जैसी पुस्तकों की अत्यंत आवश्यकता है। धार्मिक पर्यटन के बढ़ते महत्व को देखते हुए यह पुस्तक न केवल श्रद्धालुओं बल्कि प्रदेश आने वाले हर पर्यटक के लिए पथ-प्रदर्शक सिद्ध होगी।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद और प्रयागराज में हाल ही में आयोजित महाकुंभ में जिस ऐतिहासिक संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, वह इस बात का प्रमाण है कि देश में धार्मिक पर्यटन का स्वरूप बहुत व्यापक हो चुका है। ऐसे समय में मध्यप्रदेश के उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर जैसे अनगिनत धार्मिक स्थलों के बारे में रोचक व तथ्यपूर्ण जानकारी देने वाली यह पुस्तक अपने आप में एक अद्भुत प्रयास है।
डॉ. मोहन यादव ने कहा, “वर्ष 2028 में उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान जब देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे, तब उनके लिए यह पुस्तक एक अमूल्य मार्गदर्शिका होगी। धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा के इच्छुक लोगों को यह पुस्तक सुनियोजित और सुव्यवस्थित यात्रा की दिशा देगी। यही कारण है कि यह पुस्तक न केवल सराहनीय है, बल्कि हर घर में संग्रहणीय भी है।”
लेखक डॉ. ए.के. द्विवेदी ने पुस्तक के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास की दिशा में किए जा रहे महत्वपूर्ण कार्यों से प्रेरित होकर उन्होंने इस पुस्तक की रचना की है। उन्होंने बताया कि “अलौकिक मध्यप्रदेश” में प्रदेश के प्रमुख और कम चर्चित धार्मिक स्थलों का आकर्षक सचित्र संकलन प्रस्तुत किया गया है, जो पाठकों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक है, बल्कि यात्रा के दौरान उपयोगी भी सिद्ध होगी।
डॉ. द्विवेदी ने आगे बताया कि “पुस्तक के प्रकाशन के बाद अब तक पाठकों की सराहना प्राप्त हो रही है। कई सुधि पाठकों ने सुझाव दिए हैं कि मध्यप्रदेश के कुछ और अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को भी अगली कड़ी में शामिल किया जाए। हम इस पर गंभीरतापूर्वक कार्य कर रहे हैं ताकि आगामी संस्करण में और भी अधिक समृद्ध सामग्री पाठकों को उपलब्ध हो सके।”
उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक के अंतिम भाग में प्रदेश के धार्मिक स्थलों के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण सरकारी पहलों और योजनाओं का भी संकलन किया गया है, जिससे पाठक इन स्थलों के वर्तमान स्वरूप और विकास कार्यों की जानकारी भी प्राप्त कर सकें।
समारोह में अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षाविद्, चिकित्सक, साहित्यकार और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस पुस्तक को प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संजोने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज बताया।
लिखने और पढ़ने में भी काफी दिलचस्पी
डॉ. द्विवेदी होम्योपैथिक चिकित्सक हैं लेकिन उन्हें लिखने और पढ़ने में भी काफी दिलचस्पी है। इसलिए वे समय-समय पर विभिन्न विषयों पर आधारित विस्तार से जानकारी लिए पुस्तक का लेखन कर रहे हैं। पूर्व में डॉ. द्विवेदी द्वारा लिखी गई अन्य चर्चित पुस्तकें में मानव शरीर रचना विज्ञान, बाली की फुलवारी, कोरोना के साथ कोरोना के बाद, एनीमिया के लिए होम्योपैथी शामिल है। जिसे संपूर्ण देश में पढ़ा जा रहा है और उसमें संकलित जानकारी को सराहा जा रहा है। वहीं 25 वर्ष से अधिक समय से डॉ. द्विवेदी होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से रक्त जनित बीमारियों जैसे अप्लास्टिक एनीमिया, सिकल सेल एनीमिया प्रमुख हैं इसके रोगियों का इलाज होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति से कर उन्हें उनकी बीमारी से संबंधित तकलीफ से राहत दिला रहे हैं।


