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एचएसबीसी इंडिया और एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ‘हैंड मेड इन इंडिया’ की महत्वपूर्ण उपलब्धि का मनाया उत्सव
एचएसबीसी इंडिया ने एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई), अहमदाबाद के साथ मिलकर गुजरात की समृद्ध हथकरघा परंपरा को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तथा राज्य के प्रमुख क्लस्टरों में बुनकरों और शिल्पकारों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए ‘हैंड मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक सुरेंद्रनगर और भुज के दो हथकरघा क्लस्टरों के 1,500 बुनकरों और शिल्पकारों तक पहुंच बनाई गई है, ताकि हथकरघा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न कार्यों और बाजार व्यवस्थाओं को मजबूत बनाया जा सके और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा सके।
इस समारोह में प्रसिद्ध शेफ श्री रणवीर बरार; एचएसबीसी इंडिया में इंटरनेशनल वेल्थ एंड प्रीमियर बैंकिंग के प्रमुख श्री संदीप बत्रा; डॉ. सुनील शुक्ला, महानिदेशक, एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) तथा एचएसबीसी इंडिया और ईडीआईआई के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर गुजरात के सूरत में एचएसबीसी इंडिया की नई शाखा का भी शुभारंभ किया गया। यह शाखा भारत के तेजी से उभरते समृद्धि और औद्योगिक केंद्रों में से एक सूरत में बैंक की उपस्थिति को और मजबूत करेगी।
यह अवसर गुजरात के हथकरघा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ और राज्य में स्थानीय समुदायों तथा उद्यमिता-आधारित विकास को बढ़ावा देने के प्रति बैंक की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
‘हैंड मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बुनकरों और शिल्पकारों के सामने मौजूद वास्तविक चुनौतियों का समाधान करना है। इनमें उत्पादों में सीमित विविधता, बाजार तक सीमित पहुंच, प्रौद्योगिकी का कम उपयोग तथा ई-कॉमर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीमित उपस्थिति जैसी समस्याएं शामिल हैं। कार्यक्रम के तहत इन चुनौतियों से निपटने के लिए उद्यमिता संबंधी क्षमताओं का विकास किया जाता है, जिससे शिल्पकार अपनी पारंपरिक कला की विशिष्ट पहचान को बनाए रखते हुए ऐसे उद्यम विकसित कर सकें, जो व्यवहारिक, मजबूत और लंबे समय तक टिकाऊ हों।
एचएसबीसी इंडिया की हेड – सस्टेनेबिलिटी, श्री आलोका मजूमदार ने कहा, “भारत का हथकरघा क्षेत्र हमारी समृद्ध विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और ग्रामीण आजीविका, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण तथा सतत उत्पादन को बढ़ावा देने में इसकी अहम भूमिका है। उद्यमिता कौशल विकसित करने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और प्राकृतिक रेशों तथा प्राकृतिक रंगों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के माध्यम से यह साझेदारी गुजरात के बुनकरों और शिल्पकारों को मजबूत और टिकाऊ उद्यम विकसित करने में सहायता कर रही है, साथ ही हथकरघा परंपराओं को भी जीवंत बनाए रख रही है।”
एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (ईडीआईआई) के महानिदेशक, डॉ. सुनील शुक्ला ने कहा, “यह साझेदारी बुनकरों और शिल्पकारों के लिए क्षमता निर्माण और बाजार से जुड़ाव, दोनों को एक साथ मजबूत करने का कार्य कर रही है। हम बुनकरों और शिल्पकारों को उत्पाद विकास, डिजिटल उपकरणों के उपयोग और बाजार से जुड़ाव जैसे व्यावहारिक उद्यमिता कौशल उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि वे अपने उत्पादों में विविधता ला सकें, नए ग्राहकों तक पहुंच बना सकें और ऐसे उद्यम विकसित कर सकें, जो आगे बढ़ें और लंबे समय तक सफलतापूर्वक संचालित होते रहें।”
इस कार्यक्रम का प्रभाव इसकी सफलता को स्वयं दर्शाता है। गुजरात में ‘हैंड मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम ने अब तक उत्पाद नवाचार, सतत विकास और बाजार तक पहुंच बढ़ाने के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। कार्यक्रम के तहत:
- हथकरघा बुनाई और ब्लॉक प्रिंटिंग में 734 नए डिज़ाइन विकसित किए गए हैं।
- 13 नई उत्पाद श्रृंखलाएं शुरू की गई हैं।
- 131 नए उद्यमों की स्थापना में सहयोग प्रदान किया गया है।
- 35 बुनकरों को प्राकृतिक रेशों के उपयोग को अपनाने में सहायता दी गई है।
- 222 बुनकरों ने प्राकृतिक रंगों का उपयोग अपनाया है।
- खुदरा बाजार, प्रदर्शनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बाजार से जुड़ाव मजबूत किया गया है, जिससे आय बढ़ाने और उत्पादों की व्यापक पहचान बनाने में मदद मिली है।
‘हैंड मेड इन इंडिया’ कार्यक्रम, जो ईडीआईआई और एचएसबीसी इंडिया की साझेदारी का परिणाम है, ने अब तक भारत के 5 राज्यों के 7 हथकरघा क्लस्टरों में लगभग 4,500 बुनकरों को सहयोग और समर्थन प्रदान किया है।


