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लोकसभा अध्यक्ष और कानून मंत्री ने JGU में चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन, पॉलिटिकल कम्युनिकेशन और लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग पर तीन नए मास्टर्स डिग्री कार्यक्रमों की शुरुआत की
नई दिल्ली, 25 फरवरी, 2026: ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी देश में कानून के शासन, लोकतांत्रिक एवं संसदीय संस्थाओं को और बेहतर बनाने तथा चुनावी प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए समर्पित है, जिसने चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन, राजनीतिक संचार और विधायी प्रारूपण में तीन नए डिग्री पाठ्यक्रमों का शुभारंभ किया है।
इन तीनों पाठ्यक्रमों का शुभारंभ माननीय लोकसभा अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि, श्री ओम बिरला, और विशिष्ट अतिथि श्री अर्जुन राम मेघवाल, माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर मौजूद अन्य गणमान्य हस्तियों में भारत के सॉलिसिटर जनरल, श्री तुषार मेहता और ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति एवं सांसद, श्री नवीन जिंदल भी शामिल थे।
ये तीन मास्टर्स डिग्री पाठ्यक्रम इस प्रकार हैं:
• लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग में एम.ए.
• इलेक्टोरल एनालिसिस एंड मैनेजमेंट में एम.ए.
• पॉलिटिकल कम्युनिकेशन में एम.ए.
ये तीनों मास्टर्स डिग्री पाठ्यक्रम एक साल की अवधि के हैं, जिसका उद्देश्य पेशेवर रूप से प्रशिक्षित ऐसे विशेषज्ञों की बढ़ती मांग को पूरा करना है जो आज के लोकतंत्र की जटिल सच्चाइयों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हों— जिसमें चुनाव के प्रबंधन और राजनीतिक अभियानों से लेकर सुनियोजित तरीके से संचार और उच्च गुणवत्ता वाले कानून बनाने तक की प्रक्रियाएं शामिल हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं लोकसभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा, “मौजूदा लोकतांत्रिक दौर में, हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, इसलिए मौजूदा और भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, ये मास्टर्स डिग्री पाठ्यक्रम हमारे लोकतंत्र को और बेहतर बनाएंगे। इन पाठ्यक्रमों से ऐसे युवाओं को तैयार करने में मदद मिलेगी, जो हमारे देश के राजनीतिक, लोकतांत्रिक, तकनीकी और जागरूकता से जुड़े पहलुओं को एक नई दिशा देंगे। ये पाठ्यक्रम हमारी आर्थिक व्यवस्था को बेहतर बनाएंगे और लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी को एक नई दिशा देंगे। साल 1952 से लेकर अब तक 18 बार लोकसभा के चुनाव हुए हैं और भारत अकेला ऐसा लोकतांत्रिक देश है, जहाँ पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव कराए जाते हैं। हमारी आने वाली पीढ़ी को अब चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन का अध्ययन करने और नई रिसर्च करने का अवसर मिलेगा। हमारे युवा इस विषय का जितना अधिक अध्ययन करेंगे, वे उतना ही इनोवेशन कर पाएंगे और लोकतंत्र में सक्रिय भागीदारी भी बढ़ेगी। मौजूदा दौर में अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद ज़रूरी हो गया है। भारतीय संसद ने लोगों और सांसदों के बीच की दूरी को कम करने के लिए एआई तकनीक का भी उपयोग किया है। ये सभी पाठ्यक्रम आने वाली पीढ़ी को इस तरह से तैयार करेंगे कि उनकी भागीदारी से लोकतांत्रिक संस्थाओं, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और न्यायिक प्रणालियों को और मजबूती मिलेगी।“
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि, श्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा, “ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की ओर से विधायी अभ्यास, चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन, और राजनीतिक संचार में उन्नत डिग्री कार्यक्रमों का शुभारंभ एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। कानूनी भाषा में एक ही शब्द के भी अलग-अलग मतलब हो सकते हैं। संविधान के हर शब्द का एक अर्थ; हर अवधारणा का अपना विशेष महत्व है। विधायी प्रारूपण बेहद जरूरी प्रक्रिया है: जब भी कोई मंत्रालय विधेयक तैयार करता है, तो उसे कानूनी जांच और सावधानीपूर्वक प्रारूपण के लिए भेजा जाता है। उसमें लिखे हर शब्द की स्पष्टता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए एक पूरी संस्थागत व्यवस्था मौजूद है। इन पाठ्यक्रमों के ज़रिए, JGU के छात्रों को विधायी प्रारूपण और शासन-व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इस प्रकार हासिल किए गए ज्ञान से बड़े पैमाने पर समाज को फायदा होगा।”
इस मौके पर भारत के सॉलिसिटर जनरल, श्री तुषार मेहता ने कहा, “आज के इस कार्यक्रम में शामिल होना सच में मेरे लिए बड़े सम्मान की बात है। कानून के क्षेत्र में विधायी प्रारूपण एक ऐसा विषय है, जिसे सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया गया है। JGU शायद देश का पहला ऐसा संस्थान होगा, जहां विधायी प्रारूपण में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की पेशकश की जा रही है, और यह इसलिए भी ज़रूरी है क्योंकि एक देश के तौर पर हमारे पास अच्छे विधायी प्रारूपण की कमी है। अब हमारे पास ऐसे काबिल और पूरी तरह समर्पित पेशेवर उपलब्ध होंगे, जिन्हें कानून का ड्राफ्ट तैयार करने में प्रशिक्षण प्राप्त है। अक्सर हमें लगता है कि कानून का ड्राफ्ट करना कोई ऐसी चीज़ नहीं, जिसे पढ़ाया जाए। लेकिन यह अपने आप में एक विज्ञान है!”
चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन (EAM) में एम.ए. के पाठ्यक्रम में चुनावों के सिद्धांत और इसके प्रायोगिक अध्ययन पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसमें चुनावी व्यवस्था, मतदाताओं का व्यवहार, कैंपेन की रणनीति, चुनाव प्रशासन, डेटा एनालिटिक्स और लोकतांत्रिक नैतिकता जैसे विषय शामिल हैं। यह कार्यक्रम स्नातकों को चुनाव प्रबंधन निकायों, राजनीतिक दलों, कैंपेन करने वाले संगठनों, नीति बनाने वाली संस्थानों और नागरिक समाज में विभिन्न प्रकार की भूमिकाओं के लिए तैयार करता है।
राजनीतिक संचार में एम.ए. के पाठ्यक्रम में राजनीति, मीडिया, टेक्नोलॉजी और आम जनता की राय के बीच के आपसी संबंधों को ध्यान में रखा गया है। राजनीतिक सिद्धांत को संचार अध्ययन, डिजिटल रणनीति, कैंपेन के कृत्रिम अभ्यास और अभ्यास पर आधारित शिक्षण के साथ जोड़ते हुए, यह कार्यक्रम छात्रों को पारंपरिक और डिजिटल प्लेटफार्मों पर राजनीतिक संदेशों को डिजाइन करने, विश्लेषण करने और प्रबंधन करने के लिए तैयार करता है।
विधायी प्रारूपण में एम.ए. के अंतर्गत कानूनों और विनियमों का प्रारूप तैयार करने, कानूनी व्याख्या, संवैधानिक सिद्धांतों और नीति बनाने जैसे विषयों में खास प्रशिक्षण दिया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कानूनी सटीकता, सरल भाषा में प्रारूप तैयार करने और तुलनात्मक रूप से सबसे अच्छे तरीकों को मिलाकर विधायी प्रारूपण को एक पेशे की तरह बनाना है, जो स्नातकों को विधानसभाओं, सरकारी विभागों, नियामक निकायों और नीति अनुसंधान के क्षेत्र में करियर के लिए तैयार करता है।


