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मकर संक्रांति ऊर्जा, सकारात्मकता, स्वास्थ्य और नए संकल्पों का प्रतीक – डॉ. द्विवेदी
इंदौर | देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य एवं एस.के.आर.पी. गुजराती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, इंदौर के प्रोफेसर डॉ. ए.के. द्विवेदी ने आज सूर्य उत्तरायण पर्व मकर संक्रांति के अवसर पर ए.एन.एम. गुजराती ग्राउंड में आयोजित पतंग उत्सव में सहभागिता की।
इस अवसर पर डॉ. द्विवेदी ने उपस्थित नागरिकों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह पर्व ऊर्जा, सकारात्मकता, स्वास्थ्य और नए संकल्पों का प्रतीक है। उन्होंने पतंग को जीवन का प्रतीक बताते हुए कहा कि जैसे पतंगें हवा के रुख को समझते हुए संघर्ष करती हैं, गिरती-उठती हैं और अंततः ऊँचाइयों को छूती हैं, वैसे ही मनुष्य को भी उम्मीद, साहस और आत्मविश्वास के धागे को थामे रखना चाहिए।
डॉ. द्विवेदी ने मकर संक्रांति पर तिल–गुड़ के लड्डू के स्वास्थ्य महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय परंपराओं में निहित यह प्रथा गहरे वैज्ञानिक और पोषण संबंधी महत्व से जुड़ी हुई है। तिल और गुड़ आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम तथा आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो रक्ताल्पता (एनीमिया), हड्डियों की कमजोरी और सर्दी के मौसम में होने वाली ऊर्जा की कमी से बचाव में सहायक हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा अपनाई गई परंपरा—“खुद भी खाएं और दूसरों को भी खिलाएं”—सामूहिक स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता का संदेश देती है। संभवतः मकर संक्रांति मनाने के पीछे रक्त और हड्डियों से जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता का भाव भी निहित रहा होगा।
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि सूर्य के उत्तरायण होने का यह पर्व हमें अंधकार से प्रकाश, अस्वस्थता से स्वास्थ्य, अज्ञान से जागरूकता और निराशा से आशा की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि मकर संक्रांति को केवल पर्व नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के संकल्प के रूप में मनाएँ और संतुलित आहार, सकारात्मक सोच एवं जागरूकता के साथ स्वस्थ भारत के निर्माण में सहभागी बनें।


