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ओजोन थेरेपी से रिवर्स कर सकते हैं एवीएन और ऑर्थराइटिस, रिप्लेसमेंट की जरूरत नहीं
तीन दिनी 5वीं इंटरनेशनल ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस में नई तकनीकों पर हुई चर्चा
इंदौर। आज भी कई बीमारियां ऐसी है, जिनमें जॉइंट रिप्लेसमेंट ही अंतिम इलाज होता है। यह मरीजों के लिए एक लंबी पीड़ादायक प्रकिर्या होती है पर अब अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए इन बीमारियों को रिवर्स करना भी संभव है। ऐसी ही एक तकनीक है ओजोन थेरेपी।
स्काईलाइन रिजॉर्ट एंड कन्वेंशन सेंटर में शुक्रवार से शुरू हुई तीन दिवसीय 5वीं इंटरनेशनल ऑर्थोपेडिक कॉन्फ्रेंस के दौरान मुंबई से डॉ प्रसन्न शाह ने ओजोन थेरेपी के बारे में बताया कि ओजोन में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण होते हैं। यह संक्रमण रोकने, ऊतकों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ा कर तेजी से हीलिंग करने के साथ ही आर्थराइटिस या मांसपेशियों के दर्द को कम करने में भी मददगार होता है। डायबिटिक फुट अल्सर जैसे जटिल घावों में इसे सपोर्टिव थेरेपी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पैर काटने से बचाया जा सकता है। वहीं स्ट्रोक या हार्ट अटैक की स्थिति में 48 घंटे में यह इंजेक्शन दे दिया जाए तो ईसीजी रिपोर्ट नार्मल हो जाती है। ओजोन थेरेपी से कई प्रकार के अल्सर में अंगों को बचाया जा सकता है, हिप जॉइंट के एवीएन में बिना जॉइंट रिप्लेसमेंट के इलाज के संभव है, साथ ही घुटनों के ऑर्थराइटिस को रिवर्स भी किया जा सकता है। इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।
बोन मॉडल्स पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. अरविंद वर्मा जांगिड़ के अनुसार कॉन्फ्रेंस की थीम “लर्न टुडे, इम्प्लीमेंट टुमारो” रखी गई है, जिसका उद्देश्य नई तकनीकों को सीधे प्रैक्टिस में लाना है। तीन दिनों तक चलने वाली इस कॉन्फ्रेंस में हर दिन 3 से 4 सेशन आयोजित किए जाएंगे। इनमें लेक्चर के साथ लाइव वर्कशॉप भी होंगी। प्रतिभागियों को बोन मॉडल्स पर हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे नई तकनीकों को प्रैक्टिकल रूप से समझ सकें। ऑर्गेनाइजिंग प्रेसिडेंट डॉ. एल प्रकाश के मुताबिक कॉन्फ्रेंस में करीब 350 डेलीगेट्स ने हिस्सा लिया। जबकि 42 विशेषज्ञ देश-विदेश से अपनी विशेषज्ञता साझा की। इसमें इटली और नेपाल सहित कई देशों के विशेषज्ञ शामिल होंगे।
बिना सर्जरी के गंभीर फ्रैक्चर का इलाज
इटली से डॉ. मारिओ मिरोज तकनीक पर सत्र लिया, जिसके जरिए फ्रैक्चर का इलाज बिना ओपन सर्जरी के किया जा सकता है। वहीं नेपाल से डॉ. दीपेंद्र गुरुंग मिनिमल इनवेसिव तकनीकों के जरिए जटिल फ्रैक्चर के उपचार का प्रशिक्षण दिया। कॉन्फ्रेंस में सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. डीके तनेजा “100 साल तक स्वस्थ कैसे जिया जाए” विषय पर मार्गदर्शन दिया। इस मौके पर मुंबई से डॉ.अरूप मुखर्जी, डॉ प्रशम शाह इंदौर से डॉ. साकेत जाती, केरला से डॉ. पी एन वासुदेवन खासतौर पे उपस्थित थे।


