एआई डायग्नोसिस से रोबोटिक सर्जरी तक, पेट्स ट्रीटमेंट में हाईटेक मेडिकल रेवोल्यूशन

तीन दिनी FSAPAI का महाकुंभ आरंभ, 2000 से ज्यादा विशेषज्ञ जुटे

इंदौर। पालतू पशुओं में कैंसर सर्जरी की तकनीक पहले से काफी उन्नत हो चुकी है। कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी में भी सुधार हुआ है, जबकि अब इम्यूनोथेरेपी का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब इंसानों की तरह ही पेट्स की सर्जरी में रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू हो चुका है और डायग्नोस्टिक के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग भी बढ़ रहा है।

प्रदेश और शहर में पहली बार आयोजित 17वीं FSAPAI इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया से आए सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ चार्ल्स कुन्त्ज़ ने कही। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में फेडरेशन ऑफ स्मॉल एनिमल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FSAPAI) और यूनाइटेड स्मॉल एनिमल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे इस आयोजन में दुनिया भर से करीब 2000 विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
डॉ चार्ल्स ने विशेषज्ञों की उपलब्धता को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनके अनुसार ऑस्ट्रेलिया में 25 मिलियन की आबादी पर करीब 150 स्पेशलिस्ट हैं, जबकि भारत में बड़ी आबादी के बावजूद इस क्षेत्र में विशेषज्ञों की कमी है।

बोनमैरो ट्रांसप्लांट और किडनी पर विशेष सत्र

ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ नरेंद्र चौहान के अनुसार, कॉन्फ्रेंस में पालतू पशुओं से जुड़ी जटिल बीमारियों जैसे किडनी, आंखों की समस्याएं, गंभीर सर्जरी और बोनमैरो ट्रांसप्लांट जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हो रही है। वैज्ञानिक सत्रों के साथ हैंड्स ऑन वर्कशॉप, इंटरएक्टिव सेमिनार और केस डिस्कशन आयोजित किए गए। खास बात यह रही कि प्रतिभागियों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी दी गई, जिससे वे नई तकनीकों को सीधे समझ सके।

ऑर्गेनाइजिंग कमिटी के प्रेसिडेंट डॉ एचएल साहू ने बताया कि देश-विदेश से आए विशेषज्ञ केस स्टडी के माध्यम से अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे वेटनरी डॉक्टरों को नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों की जानकारी मिल रही है। अमेरिका, ब्राजील और यूरोप से आए विशेषज्ञों ने एडवांस तकनीकों और अपने शोध प्रस्तुत किए। इसके साथ ही उन्होंने युवा वेटनरी सर्जन्स के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

ज्यादा लागत है बड़ी चुनौती

राज्य पशु चिकित्सालय भोपाल के सीनियर वेटनरी सर्जन डॉ सुनील कुमार तुमड़िया ने बताया कि सम्मेलन में किडनी से जुड़े मामलों पर भी गहन चर्चा हुई। विदेशी विशेषज्ञों ने जांच और उपचार की आधुनिक विधियों की जानकारी साझा की, जो भारतीय परिप्रेक्ष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं। हालाँकि इन आधुनिक तकनीकों की लागत काफी अधिक है, जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कम संख्या में लोग अपने पालतू पशुओं का इस स्तर का इलाज करवा पाते हैं, जिससे प्रति केस खर्च और बढ़ जाता है।

डॉग के कैंसर के नए इलाज

  1. इम्यूनोथेरेपी
    शरीर की इम्यूनिटी को मजबूत कर कैंसर से लड़ाया जाता है
    कम साइड इफेक्ट, ट्रेडिशनल कीमो से बेहतर माना जा रहा है
  2. टारगेटेड थेरेपी
    सीधे कैंसर सेल्स पर असर होता है
    हेल्थी सेल्स को कम नुकसान होता है
  3. रेडिशन थैरेपी
    नई मशीनों से ज्यादा सटीक इलाज जो ट्यूमर को छोटा करने में असरदार

डॉग्स में किडनी के इलाज
1.डायलिसिस
गंभीर मामलों में खून को मशीन की मदद से साफ किया जाता है, पहले यह सुविधा बहुत कम जगहों पर उपलब्ध थी, अब कुछ वेटरनरी सेंटर्स में उपलब्ध है।

  1. किडनी ट्रांसप्लांट
    यह एक अत्याधुनिक और जटिल प्रक्रिया है
    सीमित स्थानों पर उपलब्ध और काफी महंगी
    सफल होने पर जीवन बचाने में मददगार। विदेशों में यह अब होने लगी है।
  2. विशेष आहार प्रबंधन
    किडनी रोग के लिए विशेष रूप से तैयार आहार दिया जाता है,इससे बीमारी की गति को धीमा किया जा सकता है।
  3. रिजनरेटिवर मेडिसिन
    क्षतिग्रस्त किडनी कोशिकाओं को सुधारने की दिशा में काम किया जाता है,यह तकनीक अभी विकास (research) के चरण में है।

डॉग्स की आंखों की बीमारियों के नए इलाज

  1. फेकोइमल्सिफिकेशन
    मोतियाबिंद का आधुनिक ऑपरेशन
    जल्दी रिकवरी होती है और दृष्टि वापस लाई जा सकती है
    2.लेजर थेरेपी
    ग्लूकोमा जैसी बीमारियों में आंख का दबाव नियंत्रित करता है। दर्द कम करने में सहायक होता है।
  2. आर्टिफिशियल टीयर्स थेरेपी
    ड्राई आई (KCS) में उपयोगी
    आधुनिक आई ड्रॉप्स और जेल से आंखों को नमी मिलती है।
  3. कॉर्नियल ट्रांसप्लांट
    कॉर्निया के डैमेज होने पर की जाने वाली सर्जरी
    दृष्टि को बचाने में मदद मिलती है।

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