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एमपीएएसआई कॉन के पहले दिन 500 से अधिक सर्जन्स ने देखी 14 लाइव सर्जरी
हैदराबाद से रोबोटिक कैंसर सर्जरी लाइव, लेप्रोस्कोपी से जटिल हर्निया के केस सफलतापूर्वक किए गए इंदौर । तीन दिवसीय एमपीएएसआई कॉन (MPASICON) 2026 के पहले दिन सर्जरी के आधुनिक और जटिल मामलों की लाइव सर्जरी हुई इसमें देशभर से आए सर्जनों का ध्यान खींचा। एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के मध्यप्रदेश स्टेट चैप्टर और इंदौर सिटी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में होने वाली इस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में हैदराबाद से दिखाई गई एक रेयर रोबोटिक कैंसर सर्जरी से हुई, जिसमें रोबोटिक तकनीक के जरिए महिला मरीज के कैंसर का सफलता पूर्वक उपचार किया गया।
हैदराबाद से डॉ जगदीश्वर गौड़ ने यह लाइव सर्जरी प्रस्तुत की, जिसे होटल रेडिसन ब्लू में दिखाया गया। इस प्रक्रिया में मलाशय को हटाकर सीधे बड़ी आंत को जोड़ा गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह सर्जरी तकनीकी रूप से काफी जटिल और दुर्लभ मानी जाती है। लाइव सर्जरी के दौरान हर स्टेप को विस्तार से समझाया गया, जिससे मौजूद सर्जनों को रोबोटिक और मिनिमल इनवेसिव तकनीक की व्यावहारिक जानकारी मिली।
प्रेसिडेंट डॉ राकेश शिवहरे ने बताया कि एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के मध्यप्रदेश स्टेट चैप्टर और इंदौर सिटी चैप्टर के संयुक्त तत्वावधान में हो रही इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से 500 से ज्यादा सर्जन हिस्सा ले रहे हैं। डॉ.शिवहरे ने लेप्रोस्कोपी से रेक्टम कैंसर सर्जरी की जिसमें मरीज़ के मलाशय को हटाकर सीधे बड़ी आंत से जोड़ा गया। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन कुल 15 लाइव सर्जरी की गईं। इनमें हर्निया, गॉल ब्लैडर और कैंसर से जुड़े जटिल केसेस शामिल रहे।
सेक्रेटरी डॉ अक्षय शर्मा ने पाइल्स की स्टेपलर सर्जरी से स्विचर लगाए जिसमें मरीज 2 घंटे में चले फिरने लगा और एक दिन में घर जाने के की स्थिति में था। डॉ. शर्मा कहते हैं कि तीन दिनों के दौरान करीब 200 रिसर्च पेपर प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनमें सर्जरी के क्षेत्र में हो रहे नए शोध और अनुभव साझा किए जाएंगे।
जटिल केस में की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी
बडौदा से आए एसोसिएशन ऑफ मिनिमल एक्सेस ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ कल्पेश जानी ने 75 साल की महिला मरीज की जटिल सर्जरी की। मरीज का जठर ऊपर की ओर खिसक गया था, जिससे डाइजेस्टिव एसिड छाती तक पहुंच रहा था। ऐसी स्थिति में सीने में तेज जलन होती है और गंभीर मामलों में खून की उल्टी का खतरा भी रहता है। इस केस को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए सुरक्षित तरीके से ठीक किया गया। अरविंदो मेडिकल कॉलेज से डॉ मोहक भंडारी ने लेप्रोस्कोपिक हर्निया सर्जरी का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दिया।
मुंबई केईएम हॉस्पिटल से आए प्रो.डॉ. समीर अशोक रेगे ने बताया उत्तर प्रदेश से आई महिला मरीज की आंतें छाती में चली गई थीं यदि इस मरीज की ओपन सर्जरी की जाती तो पेट से छाती तक बड़ा चीरा लगाना पड़ता, जिससे दर्द, इन्फेक्शन और रिकवरी टाइम बढ़ जाता। जबकि लेप्रोस्कोपिक तकनीक से केवल तीन छोटे सुराख के जरिए सर्जरी पूरी कर ली गई। मरीज को सांस फूलने और बार बार उल्टियों की शिकायत थी, जिसे सर्जरी के बाद नियंत्रित किया गया।


