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प्रधानमंत्री ने सभी धर्म के लोगों की समान चिंता की
इंदौर. 2014 में जब नरेन्द्र मोदी ने देश के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. तब से उनके द्वारा देश में निवासरत प्रत्येक जाति धर्म के लोगों की समान चिंता की गई. इनमें सामान्य, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति सभी सम्मिलित है.
यह बात भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती, नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे, मीडिया प्रभारी देवकीनंदन तिवारी और पिछड़ा वर्ग मोर्चा अध्यक्ष प्रकाश राठौर ने भाजपा कार्यालय, पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही. उन्होंने बताया कि भारत वर्ष में निवास करने वाले व्यक्तियों और जनसंख्या की दृष्टि से 52 प्रतिशत जनसंख्या पिछड़ा वर्ग समाज से आती है.
स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश में 15 प्रधानमंत्री हुए. मध्यवर्ती सरकारें तो जाति के आधार पर बनी किंतु किसी भी सरकार ने देश के अंदर रहने वाले पिछड़ा वर्ग समाज की चिंता नहीं की. केवल उन्हे वोट बैंक समझा. चूंकि देश की लगभग 52 प्रतिशत जनसंख्या पिछड़ा वर्ग समाज से आती है. हमारे प्रधानमंत्री ने यह महसूस किया है कि इस वर्ग को प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हो पाया है, तब मोदी सरकार-1 के कार्यकाल में प्रधानमंत्रीजी ने वर्ष 2017 में 123वां संविधान संशोधन विधेयक संसद में प्रस्तुत कर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी प्रदान की.
साथ ही आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया ताकि इस वर्ग के लोगो को उसका लाभ मिल सके. दूसरे कार्यकाल में पहला मंत्री मण्डल विस्तार किया जिसमें कुल 43 सांसदों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जिसके बाद स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार रिकार्ड 27 ओबीसी. मंत्री बनाये गये. प्रधानमंत्र के इस निर्णय से संपूर्ण देश के पिछड़ा वर्ग समाज में हर्ष व्याप्त है हर पिछड़े वर्ग समाज का व्यक्ति अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहा है. पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से पिछड़ा वर्ग मोर्चा महामंत्री संतोष यादव, राकेश कुशवाह उपस्थित थे.


