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मलिका-ए-ग़ज़ल को याद करते हुए शबे मालवा होगी रोशन
इंदौर।मलिका-ए-ग़ज़ल बेगम अख्तर को याद करते हुए नामवर शायरों के कलाम से दीपावली का जश्न मनाया जाएगा।शबे मालवा में उम्दा ग़ज़लों से दिलों को रोशन करने की तैयारी है। सुरताल संस्था ने हमेशा बेहतरीन संगीत की महफिल शहर को दी है।
एक बार फिर नई पेशकश ग़ज़ल नाईट लेकर संस्था सुरताल हाज़िर होगो।ग़ज़लों की श्रद्धांजलि मल्लिका-ए-ग़ज़ल बेगम अख़्तर फ़ैज़ाबादी (मुस्तरी बाई)को दी जा रही है जिनकी पुण्यतिथि 30 अक्टूबर को थी,संस्था द्वारा उनको शिद्दत से याद भी किया जाएगा।ये ग़ज़ल नाईट 3 नवम्बर को शाम 6.30 बजे प्रीतमलाल दुआ सभागृह रीगल सर्कल पर खास तैयारियों के साथ होगी।
मोहब्बत व प्यार की ग़ज़लों की रोशनी के साथ दीवाली के जश्न का आगाज़ होगा।इस ग़ज़ल नाईट का शीर्षक है “अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं”।ये खूबसूरत पंक्तिया मुल्क के मशहूर शायर निदा फाजली साहब की है।आज हम ऐसे महान गीतकारों,संगीतकरो एवं गायक को शामिल कर रहे हैं,जिन्होंने ग़ज़ल को असली मायने में अवाम तक पंहुचाया है और इसके ज़रिये मोहब्बत के एहसास को ज़िंदा रखा।
निदा फाजली, बशीर बद्र ,मिर्ज़ा ग़ालिब,चित्रा सिंह, जगजीत सिंह जैसे महान गीतकार संगीतकार और गायकों को लेकर मोहब्बत भरी महफ़िल ग़ज़ल नाईट सजेगी।जहाँ मेयारी और गहराई वाले कलाम को शहर और आसपास के उभरते फनकार बड़े सलीके से उसी शिद्दत से पेश करेंगे,जिस जज़्बे से लिखे गए हैं।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आल्हाद काशीकर होंगे।
आल्हाद काशीकर मुंबई फ़िल्म इंड्स्ट्री से ताल्लुक़ रखते हैं और वे खुद एक ग़ज़ल गायक,कम्पोज़र एवं म्यूजिक डायरेक्टर हैं। उन्होंने ग़ज़ल गायकी में बड़ा नाम कमाया है।साथ ही निदा फाजली की ग़ज़लों पर उनका एल्बम “निदा बिटवीन द लाइन्स” काफी मशहूर हुआ।इसे टाइम्स ऑफ म्यूजिक ने लॉंच किया था।आल्हाद जी ने कई बडी हस्तियां जैसे अनूप जलोटा,पिनाज मसानी,जसविंदर नरूला के साथ मिलकर ग़ज़लें गायीं हैं।
ग़ज़ल नाईट में प्रमुख गायक और गायिका उपासना पराशर,महू की सुप्रसिद्ध गायिका माला स्टीफंस, योगेश विंजे, प्रदीप तपस्वी और नयी उभरती गायिका सुनीता केलकर और सचिन होंगे।संगीत संयोजन मयूर पांडेय का रहेगा जो की अनूप जलोटा के शिष्य हैं तबले पर नवीन राणा, ऑक्टोपेड पर सौरभ राठौर, गिटार पर विकास जैन,कीबोर्ड पर मयूर पांडेय, हारमोनियम पर अक्षय चिखलीकर संगत देंगे।संचालन सुरुचि नाईक का रहेगा।सभी क़द्रदानों के लिए कार्यक्रम खुला है।
सरोजनी नायडू ने जब बेगम अख़्तर को तोहफे में साड़ी दी
बेगम अख़्तर के नाम से प्रसिद्ध, अख़्तरी बाई फ़ैज़ाबादी (7 अक्टूबर 1914- 30 अक्टूबर 1974) भारत की प्रसिद्ध गायिका थीं, जिन्हें दादरा, ठुमरी व ग़ज़ल में महारत हासिल थी। उन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार पहले पद्मश्री तथा सन 1975 में मरणोपरांत पद्मभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें “मल्लिका-ए-ग़ज़ल” के ख़िताब से नवाज़ा गया था।
उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में रहने वाले एक कुलीन परिवार में उस आवाज ने जन्म लिया जिसकी शोहरत दुनियाभर में हुई।
मां-बाप ने बड़े प्यार से नाम रखा, ‘बिब्बी’। बिब्बी को संगीत से इश्क हुआ 7 साल की उम्र में, जब उसने थियेटर अभिनेत्री चंदा का गाना सुना।उस जमाने के मशहूर संगीत उस्ताद अता मुहम्मद खान, अब्दुल वाहिद खान और पटियाला घराने के उस्ताद झंडे खान से उन्हें शास्त्रीय संगीत की दीक्षा दिलाई गई।
साल था 1930. बिब्बी अब अख्तरी हो गई थीं। 15 की उम्र में उन्होंने मंच पर पहला कलाम पेश किया तो सामने बैठी मशहूर कवयित्री सरोजनी नायडू फिदा हो गईं और खुश होकर उन्हें एक साड़ी भेंट की। इस गजल के बोल थे, ‘तूने बूटे ए हरजाई तूने बूटे हरजाई कुछ ऐसी अदा पाई, ताकता तेरी सूरत हरेक तमाशाई।


